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किशोरों में बढ़ रहा है सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस

अव्यविस्थत जीवन शैली के कारण किशोरों में सर्वाइकल डिस्आर्डर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। अस्पताल व फीजियोथैरेपी के क्लीनिक में रोजाना गर्दन में तेज दर्द और चक्कर आने की शिकायतों को लेकर अस्पतालों में दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं।

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अव्यविस्थत जीवन शैली के कारण किशोरों में सर्वाइकल डिस्आर्डर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। अस्पताल व फीजियोथैरेपी के क्लीनिक में रोजाना गर्दन में तेज दर्द और चक्कर आने की शिकायतों को लेकर अस्पतालों में दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि मेडिसिन ओपीडी के बाद आर्थोपेडिक ओपीडी में मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा रहती है। कल्याण अस्पताल की ओपीडी में रोजाना सात से आठ किशोर सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार झुककर काम करने से संबंधित व्यक्ति की गर्दन पर करीब 27 किलोग्राम वजन पड़ता है। इस कारण गर्दन से लेकर रीढ़ की हड्डी तक को नुकसान हो रहा है।

ऑपरेशन तक की नौबत

आर्थोपेडिक चिकित्सकों के अनुसार रोजाना गलत स्थिति में बैठने, लेटने या खड़े रहने से नसों पर दवाब पड़ता है। ऐसी स्थिति में नसों से जुड़ी समस्याओं की आशंका 87 फीसदी तक बढ़ जाती हैं। कई बार गंभीर होने पर मरीज का ऑपरेशन तक करना पड़ता है।

रखें सावधानी

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के कारण मरीज की गर्दन से शुरू होकर रीढ़ की हड्डी और कमर की ओर जाता है। ऐसे में जरूरी है कि कम्प्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर काम करते समय गर्दन को अधिकतम 10 डिग्री तक ही झुकाएं। लैपटॉप या कम्यूटर पर काम करते समय बिस्तर की बजाए कुर्सी टेबल का इस्तेमाल करें। बीच-बीच में उठकर फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें।------

इनका कहना हैसर्वाइकल का दर्द कई कारणों से हो सकता है। गर्दन या कमर में लम्बे समय तक दर्द होने आर्थेा चिकित्सक की सलाह के बाद ही दवा लें।

- डॉ. रामनिवास बिजारणियां