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तो इस वजह से तीन टुकड़ों में बंटा था शेखावाटी का सबसे बड़ा कॉलेज, अब क्यों आंसू बहा रहा है ये कॉलेज

अगले माह विश्वविद्यालय की परीक्षा शुरू होने वाली है, लेकिन राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय के परीक्षार्थी व्याख्याताओं की कमी से जूझ रहे हैं।

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राज्य सरकार ने कोरी वाहवाही लूटने के लिए राजकीय कल्याण महाविद्यायल के कई टुकड़े कर तीन तो बना दिए, लेकिन पद नहीं भरने से परेशानी बढ़ गई है। जब से कॉलेज के टुकड़े हुए हैं तब से ना केवल विद्यार्थी परेशान हैं बल्कि गैर शैक्षणिक स्टाफ भी खुश नहीं है। अगले माह विश्वविद्यालय की परीक्षा शुरू होने वाली है, लेकिन राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय के परीक्षार्थी व्याख्याताओं की कमी से जूझ रहे हैं।

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लगभग तीन हजार विद्यार्थियों वाले महाविद्यालय में 42 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत आधे भी नहीं है। महाविद्यालय में ना अधिकारी पूरे हैं ना ही कर्मचारी। लिपिकीय व अन्य कार्य संविदा के कर्मचारियों से करवाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी एबीएसटी की है। इस विषय के कुल आठ पद मंजूर हैं, लेकिन छह खाली हैं। केवल दो ही कार्यरत हैं। उनमें से भी एक की पदोन्नति हो चुकी। वे कभी भी जा सकते हैं। क्लर्क (ग्रेड दो) भी केवल एक दिन ज्वाइन करने के लिए आया उसके बाद से नहीं आ रहा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तो चारों पद खाली हैं।

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विद्यार्थी परेशान

सभी संकायों में व्याख्याताओं के पद खाली पड़े हैं। कई बार प्रदर्शन कर चुके, लेकिन कोरे आश्वासन ही मिल रहे हैं। विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। अब परीक्षा होने वाली है,लेकिन विद्यार्थियों की सुनवाई नहीं की जा रही। अब फिर से मांग उठाएंगे।

पंकज टेलर, छात्रसंघ उपाध्यक्ष

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महाविद्यालय में जो भी पद खाली हैं, उनकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को नियमित भेज रहे हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के चारों नियमित पद खाली पड़े हैं। शैक्षणिक स्टाफ भी पूरा नहीं है। परेशानी तो हो ही रही है।

केके गुप्ता,प्राचार्य,राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय सीकर

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