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Special News: कांग्रेस-भाजपा… पुराने परिवारों पर ही जनता ने जताया भरोसा, नए को नहीं मिला मौका

राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे। कौन बनेगा श्रीमाधोपुर का विधायक अब एक ही सवाल हर आदमी की जुबां पर है। कौन बनेगा श्रीमाधोपुर का विधायक इस बार इसका फैसला नतीजों से ही सामने आएगा। हर आम से लेकर खास वोटों की गणित में लगे हुए हैं।

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सीकर

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Mukesh Kumawat

Dec 02, 2023

Special News: कांग्रेस-भाजपा... पुराने परिवारों पर ही जनता ने जताया भरोसा, नए को नहीं मिला मौका

Special News: कांग्रेस-भाजपा... पुराने परिवारों पर ही जनता ने जताया भरोसा, नए को नहीं मिला मौका

सीकर/श्रीमाधोपुर राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे। कौन बनेगा श्रीमाधोपुर का विधायक अब एक ही सवाल हर आदमी की जुबां पर है। कौन बनेगा श्रीमाधोपुर का विधायक इस बार इसका फैसला नतीजों से ही सामने आएगा। हर आम से लेकर खास वोटों की गणित में लगे हुए हैं। अब यह चर्चा पार्टी से लेकर बूथ पर मिले वोटों तक पहुंच गई है। जीत हार की यह चर्चा चाय की थडिय़ों से लेकर गली-मोहल्लों में भी है। राजस्थान विधानसभा के लिए 1951-52 में हुए पहले चुनाव का वो दौर भी खास था। तब चुनाव हाईटेक न होकर कार्यकर्ताओं के दम पर लड़ा जाता था। नेता खुद अपनी जनसभाओं के लिए तांगे में बैठकर चुनाव प्रचार किया करते थे। श्रीमाधोपुर में पहले विधानसभा चुनाव वर्ष 1951-52 में यहां से 2425 वोट से रूपनारायण लाटा ने राम राज्य परिषद (आरआरपी) दल चुनाव चिन्ह उगता हुआ सूरज ने चुनाव जीता। दूसरा चुनाव 1957 में भैरोंसिंह शेखावत ने 1790 वोट से जीतकर भारतीय जनसंघ का दीपक जलाया। 1962 में रामचन्द्र सुण्डा ने 12395 वोट से कांग्रेस से दो बैलों की जोड़ी सिंबल पर जीता। 1967 में 4126 वोट से जीत कर हरलाल सिंह खर्रा भारतीय जनसंघ पार्टी के दीपक सिंबल पर पहली बार विधायक चुने गए।1972 में सांवरमल मोर 6588 वोट से कांग्रेस के चुनाव चिह्न गाय और बछड़ा पर जीते। 1977 में हरलाल सिंह खर्रा कंधे पर हल लिए हुए किसान चुनाव चिन्ह पर जनता पार्टी से 12228 वोट से जीते। 1980 में दीपेन्द्र सिंह 8091 वोट से इंदिरा कांग्रेस हाथ के निशान पर जीत कर पहली बार विधायक बने। 1985 में हरलाल सिंह खर्रा ने 8403 वोट से जीतकर भारतीय जनता पार्टी का कमल खिलाया। 1990 में दीपेन्द्र सिंह की टिकट कांग्रेस ने काटकर सांवरमल मोर को दी इस चुनाव में हरलाल सिंह खर्रा ने 20615 वोट से लगातार दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी से जीत दर्ज की। 1993 में दीपेन्द्र सिंह 10844 वोट व 1998 में 10832 वोट से जीतकर कांग्रेस से विधायक बने। 2003 के चुनाव में भाजपा ने हरलाल सिंह खर्रा की टिकट काटकर हीरासिंह सामोता को दी थी। सामोता की जमानत जब्त हो गई व मात्र 2416 वोट मिले निर्दलीय हरलाल सिंह खर्रा कैंची के निशान पर 19332 वोट से जीते। 2008 में कांग्रेस के दीपेन्द्र सिंह 7233 वोट से जीते। 2013 में भाजपा के झाबर सिंह खर्रा ने कांग्रेस के दीपेन्द्र सिंह पर 7902 वोट से जीत दर्ज की। 2018 में कांग्रेस के दीपेन्द्र सिंह ने भाजपा के झाबर सिंह खर्रा पर 11810 वोट से जीत दर्ज की। अब तक सीट से एक बार ब्राह्मण, एक बार महाजन, छह बार राजपूत व सात बार जाट प्रत्याशी जीत चुके हैं चुनाव। इस बार कांग्रेस व भाजपा प्रत्याशी तीसरी बार आमने सामने है। दीपेंद्र सिंह व हरलाल सिंह खर्रा 5-5 बार बने विधायक कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र सिंह शेखावत 1980 में पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1993 व 1998 लगातार दो बार फिर 2008 व पांचवीं बार 2018 में विधायक बने। वहीं भाजपा प्रत्याशी झाबर सिंह खर्रा 2013 में पहली बार विधायक बने। इससे पूर्व इनके पिता हरलाल सिंह खर्रा पहली बार 1967 में जनसंघ से, दूसरी बार 1977 में जनता पार्टी से, इसके बाद 1985 व 1990 लगातार दो बार भाजपा से, फिर 2003 में निर्दलीय पांचवीं बार विधायक रहे।