
सीकर. प्रदेश में बेटी बचाओ अभियान के साथ पीसीपीएनडीटी टीम ने भी कोख में कत्ल करने वालों पर शिकंजा कसा हैं। कोख में कत्ल करने वाले दलालों व सोनोग्राफी सेंटर के खिलाफ विभाग की मुहिम रंग लाई है और दो वर्ष में 109 डिकॉय ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है। यह कार्रवाई 2016-17 एवं 2017-18 में की गई है।
अब तक 200 से अधिक आरोपित गिरफ्तार
वर्ष 2016-17 में प्रदेश में पीसीपीएनडीटी टीम ने 33 डिकाय आपरेशन को अंजाम दिया था। इसी तरह वर्ष 2017-18 में डिकॉय ऑपरेशन के माध्यम से शिकंजा कसना शुरू किया तो संख्या बढकऱ 46 तक पहुंच गई। पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ ने कन्या भ्रूण हत्या में लिप्त लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन न्यायालयों में बेहतर पैरवी के कारण उनको सजा नहीं दिला पाए। जबकि डिकॉय ऑपरेशन के दौरान सरकारी अधिकारियों ने बढ़-चढकऱ हिस्सा लिया। जिले के बाहर जाकर अच्छा काम किया।
अब तक 40 चिकित्सक भी हुए गिरफ्तार
वर्ष 2016-17 व वर्ष 17-18 में सबसे बड़ी बात यह भी रही है कि 200 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 40 चिकित्सक भी शामिल हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी पता लगता है कि 25 चिकित्सक राजस्थान से बाहर के राज्यों में इंटरस्टेट डिकाय आपरेशन में पकड़े गए हैं। मई 2016 में राजस्थान का पहला इंटरस्टेट डिकाय आपरेशन किया गया। इन दोनों वर्षों में अब तक 31 इंटरस्टेट डिकाय ऑपरेशन किए गए। इनमें से सर्वाधिक उत्तरप्रदेश में 11 तथा यहां भी सबसे अधिक आगरा में 6 डिकाय ऑपरेशन किए गए है।
मुखबिर योजना में भी बढ़ाई राशि
मुखबिर योजना का शुभारम्भ भी वर्ष 2009 में हुआ था, लेकिन योजना में व्यावहारिक रूप से बदलाव वर्ष 2015 में किया गया। पूर्व में मुखबिर योजना के तहत केवल मुखबिर को ही पुरस्कार दिया जाता था। परन्तु वर्ष 2015 में योजना में बदलाव करते हुए मुखबिर के साथ डिकाय गर्भवती महिला को एक लाख रुपए एवं डिकाय महिला के साथ जाने वाले अन्य सहयोगी को भी 50 हजार रुपए तक का पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया। प्रदेश में प्रेगनेंसी एंड चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम (पीसीटीएस) साफ्टवेयर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार लिंगानुपात का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक किया जाता है, साथ ही इम्पेक्ट साफ्टवेयर में सोनोग्राफी के समय दर्ज होने वाले आंकड़ों में 18 से 35 वर्ष तक की गर्भवतियों के आंकड़ों का भी गहन विश्लेषण किया जा रहा है।
सरकारी कर्मचारियों की भी मिलीभगत
डिकॉय ऑपरेशन के दौरान पकड़ में आए आरोपितों की जांच न्यायालय में लम्बित चल रही है। आरोपितों को कड़ी सजा नहीं मिलने के कारण इनके हौसले बुलंद है। गवाहों के अभाव में इनके मामले लम्बे खींचते जा रहे है। जबकि डिकॉय ऑपरेशन के दौरान कई सरकारी नर्सिंगकर्मी भी पकड़ में आ चुके है।
Updated on:
26 Mar 2018 02:02 pm
Published on:
26 Mar 2018 09:32 am
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