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पुलिस ने खाली कागज पर गवाह का अंगूठा लगवाया, कोर्ट में गवाह बोला- मुझे घटना का कुछ पता ही नहीं

Police की कमजोर पैरवी और अहम साक्ष्य पेश नहीं कर पाने के कारण कोर्ट से हत्या जैसे गंभीर अपराधों ( Murdered Criminals ) में भी अपराधी बरी हो रहे है।

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पुलिस ने खाली कागज पर गवाह का अंगूठा लगवाया, कोर्ट में गवाह बोला- मुझे घटना का कुछ पता ही नहीं

पुलिस ने खाली कागज पर गवाह का अंगूठा लगवाया, कोर्ट में गवाह बोला- मुझे घटना का कुछ पता ही नहीं

विक्रम सिंह सोलंकी, सीकर.

Police की कमजोर पैरवी और अहम साक्ष्य पेश नहीं कर पाने के कारण कोर्ट से हत्या जैसे गंभीर अपराधों ( Murdered Criminals ) में भी अपराधी बरी हो रहे है। कोर्ट ने साक्ष्य और गवाहों के अभाव में 2017 में दांतारामगढ़ में हुए हत्या के मामले में दो को बरी कर दिया। लोक अभियोजक रहे शिवरतन शर्मा ने बताया कि पुलिस ने कोर्ट में 19 गवाह और 22 दस्तावेतों को साक्ष्य के रुप में पेश किया था। जांचधिकारी सुरेंद्र कुमार ने कोर्ट में मजबूत गवाह और साक्ष्य पेश नहीं किए। जिला न्यायाधीश देवेंद्र प्रकाश शर्मा ने फैसले में हत्या जैसे गंभीर अपराध में जांचधिकारी सुरेंद्र कुमार की ओर कमजोर जांच के लिए डीजीपी को पत्र लिखने को कहा। उन्होंने हत्या के आरोप से आशाराम पुत्र मालाराम निवासी बाज्यावास, दांतारामगढ़ व मनीष वर्मा पुत्र रिछपाल निवासी बाज्यावास दांतारामगढ़ को बरी कर दिया। उन्होंने बताया कि 2 जून 2017 को राजेंद्र कुमार ने दांतारामगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि उसका ***** श्योपाल घर पर 31 मई 2017 को आ गया था।

वह 1 जून को खाना खाकर रात नौ बजे सो गया। आशाराम ने रात ढाई बजे फोन किया तेरा ***** श्योपाल उसके घर पर आ गया है, इसे ले जाओं। वह श्योपाल को उसके पास लेने गए तो उसके साथ मारपीट की गई थी। वे उसे घर पर ले आए। करीब साढ़े नौ बजे आशाराम और मनीष दोनों ही घर पर आए। वे श्योपाल को घर से बनाथला छोडऩे की बात बोलकर लेकर चले गए। श्योपाल का कही कुछ पता नहीं लगा तो वे उसे तलाश करने लगे। बनाथला में पहाड़ी के पास वह मृत अवस्था मिला। उन्होंने आशाराम, मनीष, सुवालाल के खिलाफ मारपीट कर हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया था।


एसआई सुरेंद्र कुमार ने मौके से बाइक के टायर के सैंपल पेश किए
जांच में पाया गया कि श्योपाल का शव केकड़े के पेड़ के नीचे पड़ा हुआ मिला था। पास में ही चाय की दुकान थी। वहां पर 15-20 मजदूर काम कर रहे थे। पुलिस ने उन मजदूरों में से एक को भी पेश नहीं किया जो यह बता सके कि उसे वहां पर कौन पटक कर गया था और क्या घटना हुई थी। उसे वहां पर किसी ने भी मारपीट करते नहीं देखा था। जांचधिकारी सुरेंद्र ने मौके से बाइक के टॉयरों के निशान सैंपल के रुप में लिए, जिससे सिद्ध नहीं हो पाया कि उसे कौन लेकर गया था। वहां पर किसी कि आने-जाने के पैरों के निशान नहीं थे। कोर्ट ने माना कि जांचधिकारी सुरेंद्र की पूरे मामले में लापरवाही सामने आई है।

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1. गवाहों के पलटने से फैसला बदला ( Crime in Sikar )
गिरवर सिंह: पुलिस ने गवाह के रुप में पेश किया। उसने कहा कि बाज्यावास में क्रेसर के पास चाय की दुकान करता है। सुबह साढ़े 5 बजे दुकान खोलता है और सुबह 10 बजे बंद कर देता है। फिर शाम को 4 बजे खोलता है। उसने बताया कि आशाराम और मनीष को बाइक पर किसी को ले जाते नहंी देखा। घटना के दिन उसकी दुकान बंद थी। उसने मृत अवस्था में किसी को नहीं देखा और न ही किसी पुलिसकर्मी को देखा।


2. खाली कागजों पर लगवाएं अंगूठे
रामेश्वर: पुलिस ने 5-7 खाली कागजों पर अंगूठा लगवा लिए थे। उन कागजों में पुलिस ने क्या लिखा उसे पता नहीं है। कोर्ट में बयान दिए कि उसे नहीं पता कि श्योपाल को बाज्यावास में बांध रखा है। वह भागीरथ, झाबर, मन्नी के साथ नहीं गया था। वह आशाराम और राजेंद्र के पास भी नहीं गया था। उसने किसी को बाइक पर ले जाते नहीं देखा था उसने पुलिस को कोई बयान नहीं लिखवाए है।

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ये कैसी पुलिस जांच: दो दिन पहले हुए फैसले में एएसआई की हत्या के आरोपी भी बचे
2013 में फतेहपुर में एएसआई ओमप्रकाश की खाना लेकर आते समय दिनेश लारा और चंदन ने डंडे से वार कर हत्या कर दी थी। पुलिस की जांच में लापरवाही पाई गई। दो दिन पहले हुए फैसले में अहम साक्ष्य और गवाह पेश नहीं होने के कारण कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया था। दिनेश लारा फतेहपुर में 7 अक्टूबर 2018 को इंस्पेक्टर मुकेश कानूनगो व सिपाही रामप्रकाश की हत्या में भी शामिल रहा था।


19 गवाह और 22 दस्तावेज साक्ष्य पेश किए
कोर्ट में जांचधिकारी सुरेंद्र कुमार सहित कुल 19 गवाहों के बयान करवाए। पुलिस ने ऐसे गवाह कोर्ट में पेश किए जो सही बयान नहीं दे सके। पुलिस के कई गवाह भी कोर्ट में सही बयान नहीं दे सके। इसके अलावा 22 दस्तावेज साक्ष्य के रुप में पेश किए गए। कोर्ट में पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट, नक्शा-मौका रिपोर्ट, बाइक के टायर चिन्ह, लकड़ी की जैली का टूआ हुआ सिंगा व जप्त बाइक को पेश किया। जिन्हें कोर्ट ने अहम साक्ष्य नहीं माना।


इन कारणों से पुलिस की जांच में रही लापरवाही
1. बरामद लकड़ी का सिंगा की एफएसएल जांच नहीं करवाई गई, रक्त का सैंपल भी नहीं था।
2. पुलिस ऐसा कोई गवाह व साक्ष्य पेश नहीं सकी, जिसने घटना को देखा हो।
3. पुलिस के गवाह कोर्ट में हुए बयानों में पलट गए।
4. मृतक आशाराम के घर पर रात को क्यों गया था, इसका जवाब नहीं दिया गया।
5. आशाराम के घर पर श्योपाल से क्यों मारपीट हुई, इसका भी कोई साक्ष्य नहीं।
6. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत बताई गई, जबकि पुलिस ने मारपीट बताया।