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कर्जा माफी: माकपा, कांग्रेस का किनारा

अखिल भारतीय किसान सभा का २२ से जयपुर में महापड़ाव

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सीकर. सरकार की ५० हजार रुपए की कर्जा माफी की घोषणा भी शेखावाटी के किसानों को खुशी नहीं कर सकी। सम्पूर्ण कर्जा माफी सहित अन्य मांगों को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा ने जयपुर कूच की तैयारी तेज कर दी है। २२ फरवरी से किसानों ने जयपुर में महापड़ाव करने का एेलान किया है। इधर, माकपा और कांग्रेस नेताओं ने ५० हजार की कर्जा माफी को महज चुनावी जुमला बताया है। किसान नेता अमराराम का कहना है कि राजस्थान का किसान किसी भी सूरत में लाठी और गोली के दम पर शांत बैठने वाला नहीं है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सम्पूर्ण कर्जा माफी नहीं होने तक कांग्रेस का भी आंदोलन लगातार जारी रहेगा।


१२ फरवरी को झुंझुनूं व कोटा से किसान रवाना
किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर 12 फरवरी को शेखावाटी के किसानों का पहला जत्था जयपुर के लिए झुंझुनूं के बालूराम स्मारक से रवाना हो गया। किसान नेता पूर्व उप जिला प्रमुख विद्याधर गिल व छगन चौधरी के नेतृत्व में जयपुर जा रहे जत्थे को अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम ने रवाना किया। दूसरी तरफ कोटा से भी जत्था १२ फरवरी को रवाना हो गया है।


15 व १७ फरवरी : किसानों का तीसरा जत्था डाबला से
नागौर जिले के किसानों का जत्था 15 फरवरी को गांव डाबला से जयपुर के लिए कूच करेगा। इस जत्थे का नेतृत्व सीकर किसान आंदोलन के हीरो रहे अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम खुद करेंगे। किसानों का सबसे बड़ा और सबसे आखिरी जत्था 17 फरवरी 2018 को सीकर जिले के धोद विधानसभा क्षेत्र के गांव मांडोता से जयपुर के लिए कूच करेगा। इस जत्थे का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेशाध्यक्ष पेमराम व किसान सभा की राज्य कमेटी के सदस्य मंगल सिंह करेंगे।


किसानों के संघर्ष के चार गाने तैयार
माकपा के जिला सचिव किशन पारीक ने बताया कि किसानों के प्रत्येक जत्थे के साथ डीजे भी होगा। इसके लिए सीकर किसान आंदोलन और अन्य आंदोलनों में किसानों के संघर्ष को बयां करते चार गाने भी तैयार किए गए हैं, जो डीजे पर बजेंगे।


तगड़ी रणनीति
किसान नेताओं का कहना है कि राजस्थान के किसानों के चारों जत्थे अलग-अलग रास्तों से जयपुर पहुंचेंगे। सभी जत्थे एक साथ ही विधानसभा का घेराव करेंगे। माकपा नेताओं का कहना है कि सीकर आंदोलन के दौरान कई बार रणनीति भी बदलनी पड़ी। इसलिए जयपुर कूच के दौरान भी कोई ज्यादा तय रणनीति नहीं है।