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फल-सब्जियों से दूरी, पाइल्स की नजदीकी

सीकर. बदलती जीवनशैली और खान-पान में फाइबर की कमी पाइल्स (बवासीर) के मामलों को तेजी से बढ़ा रही है। फल और हरी सब्जियों से दूरी अब लोगों को अस्पताल तक पहुंचा रही है। अकेले कल्याण अस्पताल की सर्जरी और मेडिसिन ओपीडी में आने वाले हर दसवें मरीज में पाइल्स के लक्षण सामने आ रहे हैं।

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सीकर. बदलती जीवनशैली और खान-पान में फाइबर की कमी पाइल्स (बवासीर) के मामलों को तेजी से बढ़ा रही है। फल और हरी सब्जियों से दूरी अब लोगों को अस्पताल तक पहुंचा रही है। अकेले कल्याण अस्पताल की सर्जरी और मेडिसिन ओपीडी में आने वाले हर दसवें मरीज में पाइल्स के लक्षण सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार अक्सर लोग पेट साफ नहीं होने की समस्या को गंभीरता नहीं लेते हैं और दवा की दुकानों से बिना चिकित्सक की सलाह दवाएं लेनी शुरू कर देते हैं। जिससे यह समस्या बढ़ जाती है और बवासीर की बीमारी पैदा हो जाती है। समय पर इलाज नहीं लेने से कई मरीजों को सर्जरी का सहारा लेना पड़ रहा है। चिंताजनक बात है कि इन मरीजों में 30 से 55 वर्ष आयु वर्ग में अधिक है। राहत की बात है कि समय रहते खान-पान और जीवनशैली में सुधार किया जाए तो पाइल्स जैसी बीमारी से बचा जा सकता है। शुरुआती लक्षण दिखते ही फौरन चिकित्सक से परामर्श लें जिससे सर्जरी जैसी पीड़ादायक िस्थति से बचा जा सके।

सर्दी के सीजन में परेशानी ज्यादा

पर्याप्त पानी और फाइबर युक्त खाना और सलाद न खाने की वजह से पाइल्स के मरीजों की संख्या बढ़ी है। व्यक्ति को सर्दी में औसतन एक दिन में दो से ढाई लीटर पानी पीना चाहिए। ठंडा पानी न पी सकें तो गुनगुना पानी पियें। रात में खाना खाने के आधे घंटे बाद गुनगुना पानी पीने से कब्ज की शिकायत नहीं होती है। बार-बार पेशाब आने की समस्या को नजरअंदाज नहीं करें। पेट या पीठ में तेज दर्द होने पर फौरन जांच कराएं। मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करें। तला-भुना और नमकयुक्त भोजन करने से बचें। हरी सब्जियां जैसे पालक, मूली, लौकी और मेथी का सेवन करें। मोटे अनाज के आटे की रोटी खाएं।

छिपाएं नहीं चिकित्सक को बताएं

चिकित्सकों के अनुसार फाइबर युक्त भोजन नहीं करने और घंटों एक जगह बैठकर काम करने से पाइल्स से पीड़ित कामकाजी लोगों को मल त्याग के दौरान तेज दर्द, जलन और खून आने की समस्या झेलनी पड़ रही है। अधिकांश मरीज तो इस बीमारी के लक्षणों को छिपा लेते हैं। जिससे यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। दर्द के कारण बैठने-उठने और दैनिक कामकाज में भी परेशानी होने लगती है तब थकहार कर चिकित्सक के पास पहुंचतें तो सर्जरी के लिए विकल्प नहीं बचता है।

इनका कहना है

समय रहते खान-पान और जीवनशैली में सुधार किया जाए तो पाइल्स जैसी बीमारी से बचा जा सकता है। शुरुआती लक्षण नजर आते ही चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। जिससे सर्जरी जैसी स्थिति से बचा जा सके।

डॉ. रामरतन यादव, सर्जरी विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज