
Flowers blooming in stone: Mustard growing in 15 acres stone land
सीकर. मौसम में आए व्यापक बदलाव से रबी की फसलें लहलहाने लगी हैं। एक ओर जहां सर्दी बढऩे से जनजीवन प्रभावित हो रहा है वहीं लहलहाती अगेती फसलों को देखकर किसानों के चेहरों पर संतोष झलकने लगा है। जानकारों की मानें तो बुवाई के बाद अंकुरण अच्छा होने पर सीजन में भी फसल का उत्पादन बेहतर मिलता है। विभाग अनुसार रबी की बुवाई अधिकांश क्षेत्रों में हो चुकी है। इस समय गेहूं की बुवाई अंतिम चरण में चल रही है।
अच्छी बढ़वार
नवम्बर माह के पहले सप्ताह में पळाव कर चना व सरसों की बुवाई की थी। मध्यरात्रि से अलसुबह तक ठंड अच्छी पडऩे से अंकुरित बीजों में नई कोंपल आ गई। हाल में बोए गए गेहूं व जौ का अंकुरण व बढ़वार धीरे हो रहे हैं। बादलों के कारण दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने से गेहूं की बुवाई प्रभावित हो रही है। तापमान में गिरावट आने से फसलों में रोग कीट का प्रकोप नजर नहीं आ रहा है। पौधों की मुख्य जड़ें जम ने लगी है। अंकुरण होने के बाद पौधे की शाखाएं बन पा रही है।
रबी फसल पर विचार गोष्ठी
सीकर. देवीपुरा ग्राम सेवा सहकारी समिति में इफ्को की ओर से रबी फसल विचार गोष्ठी हुई। गोष्ठी में मुख्य अतिथि जिला कलक्टर यज्ञमित्र सिंहदेव ने कहा कि उन्नत खेती अपनाकर ही किसान प्रति बीघा लागत घटा सकता है। अध्यक्षता ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष सीताराम खीचड़ ने की। बतौर अतिथि राज्य विपणन प्रबंधक इफ्को राजेन्द खर्रा, केन्द्रीय सहकारी बैंक के एमडी बीएल मीणा मौजूद रहे। इस दौरान अतिथियों ने किसानों को प्रदर्शन किट बांटे।
Published on:
08 Nov 2019 06:04 pm
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