
उमेश शर्मा, गणेश्वर (सीकर)
रंगों का त्योहार होली के कुछ ही दिन शेष है। जैसे-जैसे होली के दिन करीब आ रहे है, वैसे-वैसे लोगों की तैयारियां भी बढ़ती जा रही है। बाजार में रंग बिरंगी पिचकारी की दुकानें सज गई है। बच्चों की पसंदीदा डोरेमोन जैसे नाम की पिचकारी बाजार में उपलब्ध है। इसके साथ ही रंग-गुलाल की ब्रिकी भी जोरों पर है। वहीं देशभर में जहां अलग-अलग तरीके से होली के उत्सव को मनाते है। वहीं एक गांव ऐसा भी है जहां होली के दूसरे दिन धुलंडी नहीं बल्कि डूडू महोत्सव मनाया जाता है। जी हां हम बात कर रहे है राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना में स्थित गणेश्वर गांव की, जहां पर होली के दूसरे दिन डूडू महोत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि विक्रम संवत 1444 में बाबा रायसल ने उजड़े हुए गांव को गणेश्वर के रूप में बसाया था। इसी दिन बाबा रायसल महाराज का राजतिलक हुआ था। इस महोत्सव के दौरान मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें 25 गांवों के लोग भाग लेते है और रायसल महाराज की पूजा की जाती है। यह परम्परा करीब 500 साल से चली आ रही है। होली के दूसरे दिन सुबह ग्रामीण हाथों में तलवार व झॉकिया सजाकर रायसल महाराज के मंदिर पहुंचते है और महाराज को ग्राम देवता के रूप में पूजते है। इसके बाद दोपहर को डूडू मेले का आयोजन होता है। जिसमें में निशानेबाजी, ऊंट दौड़, कुश्ती, दंगल जैसी अनेक प्रतियोगिता होती है।
पूर्णीमा के दिन होती विशेष पूजा-अर्चना
पूर्णीमा के दिन ग्राम देवता रायसल महाराज के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। महाराज का आर्शीवाद लेने दूर-दराज से भक्त यहां पहुंचते है। इसके अलावा मंदिर में गठजोड़े की जात भी जाती है। गांव में नई दुल्हन भी महाराज का आर्शीवाद लेने बाद ही घर प्रवेश करती है।
उजड़े गांव को मिला था गणेश्वर का रूप
मान्यता है कि विक्रम संवत 1444 में बाबा रायसल महाराज ने उजड़े हुए गांव को गणेश्वर के रूप में बसाया था। उनके राजतिलक के दिन को डूडू महोत्सव के रुप में मनाया जाता है। रायसल महाराज का मंदिर पहाड़ी स्थित बना हुआ है। डूडू महोत्सव के दिन रात को भजनों का आयोजन होता है। गांव के कुछ ग्रामीण बताते है कि आज भी बाबा रायसल महाराज गालव गंगा तीर्थ धाम पर रात को स्नान करने घोड़ी पर सवार होकर आते है।
इस दिन खेली जाती है होली
गणेश्वर गांव में होली का त्योहार शीतला अष्टमी के दिन मनाया जाता है। इस दिन रंग-गुलाल से होली खेली जाती है। यहां पर रंग से खेलते-खेलते बाबा रायसल महाराज के मंदिर पहुंचते है।
Updated on:
25 Feb 2018 05:53 pm
Published on:
25 Feb 2018 03:39 pm
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