
केन्द्र सरकार ने भी सीकर एज्युकेशन सिस्टम पर लगाई मुहर
गीतों और भीतों की धरती शेखावाटी की असली ताकत शिक्षा है। बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम से लेकर इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में हमारे युवाओं की धाक है। मेहनत, समपर्ण और संघर्ष के दम पर सीकर को अब शिक्षानगरी का तमगा मिल चुका है। देश के 10 से अधिक राज्यों के विद्यार्थी अब यहां पढ़ाई करने के लिए आ रहे है। शिक्षा की काशी सीकर को अभी तरक्की की कई सीढिय़ां चढऩी है। इसके लिए सीकर की सभी शिक्षण संस्थाएं ब'चों की तरक्की के नए सपने भी बुन रही है। देश को सबसे Óयादा सैनिक देने वाली धोरों की धरती का स्वाभिमान भी सेना है। जब भी देश पर कोई संकट आया तो धोरों के बेटों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की सरहदों की रक्षा की है। अब तो हमारी बेटियां भी बॉर्डर पर जाने लगी है। धोरों में भले ही पानी का संकट हो। लेकिन हमारे किसानों का जÓजा किसी से कम नहीं है। नवाचारों के दम पर किसानों ने धान से पूरी झोली भर दी है। प्रवासी शेखावाटी के माथे का तिलक है। क्योंकि देश के बड़े उद्योगपतियों में शेखावाटी के सेठ-साहुकारों का नाम शामिल है। राजस्थान पत्रिका के स्थापना दिवस के मौके पर पत्रिका संवाददाता अजय शर्मा की खास रिपोर्ट।
शिक्षा: केन्द्र सरकार ने भी सीकर एज्युकेशन सिस्टम पर लगाई मुहर
शिक्षा मंत्रालय ने पिछले साल 83 बिन्दुओं को लेकर सर्वे कराया। इसमें देशभर में सीकर की टॉप रैंक आई। सीकर के विद्यार्थियों ने 83 बिन्दुओं के आधार पर बनी रिपोर्ट में महानगरों को भी काफी पीछे छोड़ दिया। शिक्षा के एक्सपर्ट का भी मानना है कि प्रदेश के बड़े शहरों से भी Óयादा सक्सेज रेट शिक्षानगरी की है। इंजीनियरिंग और मेडिकल में सफलता के पीछे बड़ी वजह यह है कि हमारे विद्यार्थियों का कॅरियर को लेकर रोडमैप अब छठी कक्षा से तय होने लगा है। इस वजह से वह लगातार टॉप रैंकों के साथ बाजी मार रहे है।
आगे क्या: इस सत्र में 2 लाख पार होंगे विद्यार्थी
शिक्षानगरी के बेहतर परिणाम की वजह से यहां लगातर विद्यार्थियों का रूझान बढ़ रहा है। किसी दौर में पड़ौसी जिलों के ही विद्यार्थी आने लगे। लेकिन बेहतर परिणाम और शैक्षिक माहौल के लिए यहां पूरे राजस्थान के विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आने लगे। अब दस से अधिक राÓयों के विद्यार्थी अपने सपनों को पूरा करने में जुटे है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस साल यहां पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों की संख्या दो लाख पार होने की संभावना है।
सेना: हर युद्ध में हमने दी शहादत, सीेने में गोलियां खाकर भी दुश्मन को खदेड़ा
बॉर्डर पर सैनिक भेजने में फिलहाल शेखावाटी सबसे आगे है। सीकर जिले के फिलहाल 18 हजार से अधिक अधिकारी व जवान तीनों सेनाओं में कार्यरत है। वहीं 21 हजार से अधिक गौरव सेनानी अकेले सीकर जिले के है। वहीं युद्ध दिव्यांग सैनिकों की संख्या 32 से भी Óयादा है। वहीं जिले में 225 शहीद वीरांगनाएं है। हर साल सीकर जिले के 40 हजार से अधिक युवा सेना में शामिल होने को लेकर तैयारी करते है।
आगे क्या: अब अफसर भी देगी सीकर की धरती
रलावता गांव में भी उत्तरी भारत की पहली सैन्य अकादमी प्रस्तावित है। इस सत्र में एकेडमी के शुरू होने की पूरी संभावना है। इसमें पहले चरण में 100 सीट प्रस्तावित है। युवाओं में सेना में शामिल होने के जÓबे की वजह से यहां निजी एकेडमी की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
किसानी: नवाचार के सहारे पद्म श्री तक हमारे किसान
नवाचार हमारे किसानों की आदत में शुमार है। इन्ही नवाचारों के दम पर हमारे किसानों के कदम राष्ट्रपति भवन तक भी पहुंचे है। अभी भी सीकर जिले के 65 से अधिक किसान नवाचारों के लिए प्रयासरत है। प्याज की खेती कभी यहां की मुख्य पहचान थी। लेकिन अब किसान घाटे के सौदा बने खेती को भी मुनाफे में बदलकर आत्मनिर्भर बनने की नई कहानी भी लिख रहे है। ताईवानी तरबूज से लेकर अनार की खेती के नवाचारों ने भी दूसरे किसानों को राहें दिखाई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में पैदावार बढऩे से किसानों की आमदनी भी बढऩा तय है।
आगे क्या: जैविक खेती को मिलगा बढ़ावा, नए सेंटर की आस
शेखावाटी के किसानों का नवाचार लगातार जारी है। इस साल किसानों का फोकस जैविक खेती पर है। इस साल बजट में सीकर को एक्सीलेंस सेंटर का तोहफा मिल सकता है। वहीं नवाचारी किसानों के जरिए अन्य किसानों को प्रशिक्षण देने की मुहिम भी शुरू होने की आस है।
प्रवासी: पहले शिक्षा की जोत जलाई, माटी से पूरा जुड़ा
वजिस दौर में शेखावाटी में स्कूल व कॉलेज नहीं थे। उस दौर में सेठ-साहुकारों ने शिक्षा की जोत जलाने का काम किया। इसके बाद निजी शिक्षण संस्थाओं ने शिक्षा की अलख जगाने के काम को और बढ़ाया। अभी भी यहां की माटी से प्रवासियों का पूरा जुड़ाव है। कई बस स्टैण्ड से लेकर अस्पतालों के भवन भी यहां के प्रवासियों ने तैयार कराए। दुनियाभर के टॉप उद्योगपतियों में हमारे प्रवासी भी शामिल है।
आगे क्या: हमारे यहां तैयार होगी टाइल्स, 14 उद्योगों की आस
शेखावाटी के प्रवासियों का अब यहां उद्योग बढ़ाने पर भी फोकस है। निवेशक सम्मेलन में कई प्रवासी उद्योगपति आगे आए है। सीमेंट फैक्ट्री से लेकर नीमकाथाना मेंं टाइल्स उद्योग की आस भी है। यदि यह दोनों निवेश धरातल पर आते है तो यहां के 25 हजार से अधिक कारोबारियों को रोजगार मिल सकता है।
Published on:
01 Jan 2023 01:59 pm
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