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देश में पहली बार राजस्थान के विधायकों के मोबाइल में होंगे प्रदेश के सभी स्कूल, एक क्लिक में खुलेगा राज

अब शिक्षा विभाग में छोटे कार्यो के लिए प्रदेशभर के शिक्षकों को सरकारी दफ्तरों में चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जनप्रतिनिधि भी एक क्लिक पर अपने इलाके की स्कूलों का पूरा रेकार्ड देख सकेंगे।

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अब शिक्षा विभाग में छोटे कार्यो के लिए प्रदेशभर के शिक्षकों को सरकारी दफ्तरों में चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जनप्रतिनिधि भी एक क्लिक पर अपने इलाके की स्कूलों का पूरा रेकार्ड देख सकेंगे।

देश में पहली बार राजस्थान के विधायकों के मोबाइल में होंगे प्रदेश के सभी स्कूल, एक क्लिक में खुलेगा राज

सीकर.

अब शिक्षा विभाग ( Rajasthan Education ) में छोटे कार्यो के लिए प्रदेशभर के शिक्षकों को सरकारी दफ्तरों में चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जनप्रतिनिधि भी एक क्लिक पर अपने इलाके की स्कूलों का पूरा रेकार्ड देख सकेंगे। यह सब कुछ होगा ‘इंटीग्रेटेड शाला दर्पण पोर्टल ( Integrated ShalaDarpan Portal ) के जरिए। पोर्टल का शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ( Govind Singh Dotasra ) ने शुभारंभ किया। इस पोर्टल की खास बात यह है कि इसमें स्टाफ कॉर्नर का ऑप्शन भी रहेगा, जिसके जरिए शिक्षक तबादले सहित अन्य कार्यो के लिए ऑनलाइन ही परेशानी बता सकेंगे। विभाग ने पारदर्शिता लाने के लिए यह कवायद की है।

देश का पहला ऑटो अपडेशन वाला पोर्टल
शाला दर्पण इंटीग्रेटेड पोर्टल देशभर में ऐसा पोर्टल बन गया है जिस पर ऑटो अपडेशन होगा। खास बात यह है कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट, गुजरात, असम, तमिलनाडू, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य 15 राज्यों के प्रतिनिधि इस पोर्टल को सराह चुके है।

जिलों की रैकिंग होगी तय
पहले सर्व शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा अभियान अलग-अलग संचालित होते थे। इसलिए शाला दर्पण और शाला दर्शन पोर्टल भी अलग-अलग थे। अब इन्हें एक कर लिया गया है। शिक्षा विभाग अब जिलों की रैकिंग भी इस पोर्टल के आधार पर तय करेगा। सूत्रों के अनुसार हर महीने की चार तारीख तक जो भी डाटा संबंधित जिले की ओर से अपलोड होगा उसी के आधार पर रैकिंग घोषित होगी।

नेताजी भी फोन में देख सकेंगे, कितने पद रिक्त
प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को भी कई बार अपने विधानसभा क्षेत्र के स्कूल, उनके संसाधन व शिक्षकों के रिक्त पदों की जानकारी जुटाने के लिए काफी दिक्कत होगी। अब शिक्षा राज्य मंत्री की पहल पर प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को ऑनलाइन पोर्टल के आईडी-पासवर्ड दिए जाएंगे, इससे वह घर बैठे अपने क्षेत्र की स्थिति देख सकेंगे।

पोर्टल से किसे क्या होगा फायदा
स्कूल: प्रदेश के 65 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों के भवन, बिजली, पानी, खेल मैदान, छात्र संख्या व आंगनबाड़ी एकीककरण सहित अन्य जानकारी ग्रामीण आसानी से देख सकेंगे। ग्रामीणों को अब इस तरह की जानकारी के लिए सूचना का अधिकार का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।


छात्र: प्रदेश के 86 लाख से अधिक विद्यार्थियों का रेकार्ड भी पोर्टल पर अपलोड होगा। इसके तहत विद्यार्थियों के विषय से लेकर पिछली कक्षाओं के परिणाम की जानकारी अपलोड की जाएगी। छात्र की परफोरमेंस रिपोर्ट को भी अभिभावक आसानी से देख सकेंगे। शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी इस पोर्टल के जरिए आसानी से मिल सकेगी।


शिक्षक: शाला दपर्ण पर फिलहाल प्रदेश के चार से अधिक शिक्षक व अन्य कर्मचारियों का रेकार्ड है। पोर्टल पर कर्मचारियों के र्काग्रहण से लेकर वेतन व अन्य बिलों की जानकारी मिलेगी। विभाग ने सबसे बड़ा नवाचार यह किया है कि स्टाफ कोनर्र के जरिए शिक्षक अपनी समस्याओं का समाधान भी ऑनलाइन करा सकेंगे।

तबादले के लिए भी ऑनलाइन आवेदन
तबादलों के लिए भी अब शिक्षकों को चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। नई व्यवस्था के तहत अब शिक्षकों को स्टाफ कॉनर्र के जरिए आवेदन करना होगा। शिक्षकों को विभाग लॉगिन आईडी व पासवर्ड उपलब्ध कराने की तैयारी में है।
पांच करोड़ का दान, सुधरेगी स्कूलों की हालत
शिक्षा विभाग का बाल सभाओं का नवाचार भी प्रदेश के भामाशाओं को खासा पंसद आया है। नौ मई को हुई बाल सभाओं से प्रदेशभर में लगभग पांच करोड़ की दान राशि एकत्रित हुई है। इस राशि से विद्यालयों की सूरत बदलने का काम होगा।