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Education: तीन साल से अटकी शिक्षकों की पदोन्नति, नई भर्ती भी हुई प्रभावित

सीकर. नियमों के फेर में अटकी वरिष्ठ शिक्षकों व व्याख्याताओं की पदोन्नति शिक्षा विभाग के लिए नासूर बनती जा रही है।

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सीकर

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Sachin Mathur

Sep 21, 2023

तीन साल से अटकी शिक्षकों की पदोन्नति, नई भर्ती भी हुई प्रभावित

तीन साल से अटकी शिक्षकों की पदोन्नति, नई भर्ती भी हुई प्रभावित

सीकर. नियमों के फेर में अटकी वरिष्ठ शिक्षकों व व्याख्याताओं की पदोन्नति शिक्षा विभाग के लिए नासूर बनती जा रही है। इससे जहां सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने के साथ शिक्षकों की पदोन्नति का इंतजार बढ़ता जा रहा है, वहीं तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2022 में चयनितों की नियुक्ति के लिए खाली पदों की समस्या भी गहरा रही है।

इस वजह से अटकी है डीपीसी

व्याख्याता: व्याख्याताओं की डीपीसी 2021 में यूजी में संबंधित विषय की अनिवार्यता के नियम की वजह से अटक रखी है। दरअसल 2021 में शिक्षा विभाग ने व्याख्याता पद पर पदोन्नति के लिए पीजी के साथ यूजी में भी पद संबंधी विषय की अनिवार्यता लागू कर दी थी। ऐसे में पदोन्नति से बाहर हुए कई शिक्षकों ने सीधी भर्ती में ये नियम नहीं होने का हवाला देते हुए कोर्ट में याचिका दायर कर दी। तब से ये मामला अटका हुआ है।

वरिष्ठ शिक्षक: वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति एडिशनल विषय से स्नातक करने वाले शिक्षकों की पदोन्नति पर रोक के चलते अटकी हुई है। दरअसल 2019 में प्रदेश में एडिशनल विषय से स्नातक की फर्जी डिग्री का मामला सामने आया था। जिसके बाद शिक्षा विभाग ने एडिशनल विषय वाले सभी शिक्षकों की पदोन्नति रोक दी। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

शिक्षक भर्ती के लिए मिल जाते पूरे पद

डीपीसी नहीं होने की वजह से तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2022 की नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। यदि व्याख्याता के 17 हजार नव सृजित पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी कर डीपीसी की जाती तो 22 हजार व. अध्यापक व्याख्याता पद पर पदोन्नत हो जाते। इससे 27 हजार 500 तृतीय श्रेणी शिक्षकों का व. अध्यापक पद पर पदोन्नति का रास्ता खुल जाता। इससे तृतीय श्रेणी शिक्षकों के 27 हजार 500 पद खाली होकर वर्तमान 21 हजार रिक्त पदों के साथ मिलकर 48 हजार पदों की शिक्षक भर्ती के लिए पर्याप्त हो जाते। पर अब पर्याप्त खाली पद नहीं होने पर शिक्षा विभाग को लेवल-2 के शिक्षकों को भी लेवल-1 के पदों के साथ नव चयनितों को महात्मा गांधी स्कूलों में भी नियुक्ति देनी पड़ रही है।

तो व्याख्याताओं के 44 हजार पद होंगे खाली

शिक्षा विभाग की मौजूदा व्यवस्था से स्कूलों में व्याख्याताओं का संकट भी गहराता जा रहा है। यदि मौजूदा खाली पद, स्कूल क्रमोन्नति के बाद सृजित पद व डीपीसी के पदों को जोड़ें तो आने वाले समय में सरकारी स्कूलों में व्याख्याताओं के करीब 44 हजार पद खाली हो जाएंगे। दरअसल, शिक्षा विभाग ने नए क्रमोन्नत 6 हजार स्कूलों के हिसाब से व्याख्याता के 17 हज़ार नए पद तो सृजित कर दिए लेकिन उनकी वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में उन पदों पर लगाए गए व्याख्याताओं का वेतन अन्य स्कूलों के स्वीकृत पदों से आहरित हो रहा है। इधर, 10 हजार व्याख्याताओं को उपप्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है, जो कोर्ट के स्थगन की वजह से उसी स्कूल में कार्यरत है। ऐसे में जब कोर्ट का स्थगन हट जाएगा तो दस हज़ार व्याख्याता उपप्रधानाचार्य के पद पर दूसरी स्कूल में चले जाएंगे। वहीं, नए पदों की वित्तीय स्वीकृति और वर्तनमान खाली पदों को जोडकऱ सरकारी स्कूलों में व्याख्याताओं के कुल 44 हजार पद खाली हो जाएंगे।

इनका कहना है:-
डीपीसी नहीं होने की वजह से सरकारी स्कूलों का शैक्षिक ढांचा बिगड़ता जा रहा है। इससे स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था के साथ नई शिक्षक भर्ती भी प्रभावित हो रही है। इस संबंध में कोर्ट के फ़ैसले तक ,सरकार को डीपीसी की जगह तदर्थ पदोन्नति का सुझाव दिया था, लेकिन इसे नहीं मानने पर शैक्षिक अव्यवस्था का आलम बढ़ता जा रहा है।पिछले एक साल से शिक्षा विभाग में ठहराव की स्थिति देखने को मिल रही है।

उपेंद्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत।

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