
प्रदेश में सरकारी स्कूलों में नामांकन वृद्धि का लक्ष्य पूरा करना शिक्षकों के लिए नामुमकिन हो गया है। पहली कक्षा में प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष किए जाने के बाद डिजिटल सर्वे में अनामांकित बच्चों की संख्या पूरे प्रदेश में ही अब तक 33 हजार 279 मिली है। जिन सबका प्रवेश भी सरकारी स्कूलों में हो जाए तो भी नामांकन वृद्धि का एक प्रतिशत लक्ष्य भी पूरा नहीं होगा। उस पर 12वीं कक्षा पास कर चुके विद्यार्थियों के जाने से भी नामांकन कम होगा। ऐसे में सरकारी स्कूलों के लिए नामांकन वृद्धि का लक्ष्य पूरा होना तो दूर घटना तय माना जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में नामांकन का लक्ष्य 2023-24 के नामांकन से दस फीसदी ज्यादा रखा गया है। चूंकि पिछले सत्र में सरकारी स्कूलों में 81 लाख से ज्यादा नामांकन था। इस लिहाज से स्कूलों के लिए इस बार करीब आठ लाख का नामांकन लक्ष्य तय हुआ। पर इस बार ये लक्ष्य पूरा करना असंभव सा हो गया है।---------------
सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा प्रवेश पहली कक्षा में ही होते हैं। अन्य कक्षाओं में तो निजी स्कूल छोड़ने पर ही बच्चे प्रवेश लेते हैं। जिनकी संख्या काफी कम होती है। ऐसे में अनांमाकित बच्चे ही नामांकन वृद्धि के लिए उम्मीद होते हैं। पर डिजिटल सर्वे में अनामांकिन बच्चों की संख्या ही कम होने पर ये उम्मीद पूरी तरह टूट गई है।
सरकारी स्कूलों में नामांकन वृद्धि में सबसे बड़ी परेशानी पहली कक्षा के लिए विद्यार्थी की न्यूनतम आयु छह वर्ष किया जाना है। जो पिछले साल पांच वर्ष थी। ऐसे में छह वर्ष के बच्चे या तो सरकारी स्कूलों में ही दूसरी कक्षा में पहुंच गए या उनका प्रवेश पहले से निजी स्कूलों में हुआ मिल रहा है। ऐसे में नामांकन वृद्धि का आधार पहली कक्षा ही सरकारी स्कूलों में खाली रह रही है।
प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष करने, प्री प्राइमरी कक्षाओं का संचालन नहीं होने व डीपीसी व स्टाफिंग पैटर्न समय पर नहीं करने व पदरिक्तता के बढ़ते ग्राफ सहित कई कारणों की वजह से सरकारी विद्यालयों के नामांकन में कमी आ रही है। सरकार को इन सब खामियों पर ध्यान देना चाहिएबसन्तकुमार ज्याणी, प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा।
Updated on:
18 Jul 2024 11:38 am
Published on:
18 Jul 2024 11:35 am
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