
Ayodhya Live: भगवान राम को देख रोम-रोम हुआ रोमांचित, प्रेमाश्रुओं से भीगे भक्त
अयोध्या के लिए बुधवार को सीकर जंक्शन से चली पहली आस्था स्पेशल रेल उमंग व उल्लास से भरी थी। राम नाम के जयकारों के साथ रेल में चढ़े रामभक्त रास्तेभर राम में ही रमे व रचे- बसे रहे। हर कोच में राम नाम के जप तो कोई जयकारों में व्यस्त था। ढोल, मंजीरों व हारमोनियम के अलावा म्यूजिक सिस्टम की ताल के साथ भजन गाकर तो कोई उल्लासित मन से नाचने में मस्त रहा। पल- पल पास आती अयोध्या के साथ ये उमगन और जयकारों का जोश बढ़ता ही जा रहा था। जो देर रात को अयोध्या के सालारपुर जंक्शन पहुंचने तक परवान चढ़ गया। भगवान राम के गगनभेदी जयकारों के साथ ट्रेन से उतरते ही भावों से भरे कई श्रद्धालु तो रामजन्म भूमि को छूकर- चूमकर व माथे पर माटी लगाकर धन्य समझने लगे। रात डेढ़ बजे पहुंचे श्रद्धालुओं का भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्वागत भी उसी उत्साह व जयकारों के साथ फूल बरसाते हुए किया।
बस में भाव से भीगे भक्त
रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही उत्तरप्रदेश सरकार की पीले रंग की नई व निशुल्क ईवी बसें तीर्थयात्रियों के इंतजार में खड़ी थी। एक के बाद एक तीर्थयात्री उसमें सवार होकर टेंट सिटी के लिए रवाना होने लगे। भगवान राम व उनके प्रतीकों व सतरंगी रोशनी से सराबोर रास्तों से करीब 22 किमी सफर पर चली इन बसों को भी चालकों ने राम भजन से भक्तिमय रखा। ‘जिनकी नैया राम भरोसे, डोल भले ही जाए- डूब नहीं सकती है... और राम आएंगे... सरीखे भजनों ने भक्तों को भावों के आंसुओं से भिगो दिया। श्रद्धालु साथ गाकर भी भक्तिगीतों के आनंद में विभोर हो रहे थे। 20 एकड़ में फैली टेंट सिटी में पहुंचने पर सीकर के तीर्थयात्रियों को तीर्थ प्रयागराज कैंप में ठहराया गया। जहां सात-सात महिलाओं के समूह को पुरुषों से अलग तंबुओं में ठहराया गया। जहां अलग- अलग ट्रस्ट की ओर से संचालित भंडारों में सुबह साढ़े छह बजे शुरू होने वाली चाय व इसके बाद भोजन की व्यवस्था दिनभर निशुल्क थी।
सरयू स्नान से शुरू हुई राम यात्रा
सुबह चाय-नाश्ते के बाद तो कुछ निराहार ही भगवान राम के दर्शनों के लिए टेंट से निकलना शुरू हो गए। बाहर ही ईवी बसें श्रद्धालुओं के इंतजार में थी। जो उन्हें फिर राम भजनों की मस्ती में डूबोते हुए सरयू घाट पर डूबकी के लिए छोड़ रही थी। यहां स्नान तो कोई हाथ-पैर-मुंह धोकर रामलला के दर्शनों के लिए करीब दो किमी की यात्रा के लिए चले। इनमें कुछ श्रद्धालु ईवी ऑटो व रिक्शे से तो ज्यादातर भजन- कीर्तन करते हुए पैदल ही मंदिर पहुंचे।
श्रीराम को देख भूले सुध-बुध, टपकने लगे प्रेमाश्रु
राम मंदिर पहुंचने के साथ ही ह्रदय की हिलोरें बढऩे लगी। अद्भुद कलाकृतियों के साथ भव्य व दिव्य स्वरूप लिए हल्के गुलाबी रंग के संगमरमर के मंदिर की अनुपम छटा व अलग- अलग भाषा व भेष- भूषा वाले भक्तों के जयकारों की गूंज से राम दरस का उत्साह छलांगे मारने लगा। अलग- अलग कतार में लगकर अब भक्त भगवान राम के दर्शनों के लिए व्याकुल ह्रदय से जयकारे लगाते हुए आगे बढऩे लगे। सुरक्षा मानकों को पार कर बढ़ते हुए भक्तों का अंत:करण अब पग- पग पर नए आनंद को अनुभव कर रहा था। धीरे- धीरे आगे बढ़ते हुए मंदिर की सीढियां चढ़ते हुए जैसे ही अंतिम सीढिय़ों पर पैर रखा वैसे ही मूर्तिमान भगवान राम अब साक्षात दर्शनों के लिए खड़े थे। उनका दिव्य श्यामल रूप अचानक सामने दिखते ही श्रद्धालुओं की सुध-बुध जाती रही। भव्य गर्भगृह में सुशोभित भगवान राम का मनोहारी रूप व दैदिप्यमान आभा ने पांच मंडप दूर से भी भक्तों का आपा भुला दिया। तन में पुलकावली व रोम-रोम में रोमांच के साथ भक्त अब प्रेम के आंसुओं से भीगने लगे। गद्गद कंठों से जयकारों के शब्दों के साथ अब कदम भी लडखड़़ाने लगे। भक्ति का हर रंग, प्रेम का हर ढंग व मन की हर उमंग मानो साकार हो उठी। इष्ट को देख सारे अभिष्ट पूरे हो गए। विग्रह के सामने पहुंचने तक तो सिर्फ भाव की ही भाषा बाकी रही। अनिर्वचनीय आनंद व पूर्ण काम के अनुभव के साथ भाव से बिलखते हुए श्रद्धालु हाथ जोडकऱ भीगी पलकों के साथ दूसरे रास्ते बाहर निकले। फिर-फिरकर मंदिर की तरफ देखकर फिर से बुलाने की मन ही मन प्रार्थना करते हुए प्रसाद लेकर मंदिर परिसर से बाहर आए।
हनुमानगढ़ी व सरयु आरती के दर्शन
राम मंदिर के साथ श्रद्धालुओं ने हनुमानगढ़ी, कनक भवन व शाम की सरयु आरती के भी दर्शन किए। इसके बाद टेंट सिटी में रात का खाना खाकर फिर निशुल्क ईवी बसों से रेलवे स्टेशन पहुंचकर भारी मन से रात 11.30 बजे रवाना होकर शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे सीकर जंक्शन पहुंचे। इस बीच जयपुर, रींगस व पलसाना के साथ सीकर में तीर्थयात्रियों का श्रीराम के जयकारों व पुष्पवर्षा से स्वागत हुआ। इस दौरान भी स्टेशनों पर श्रद्धालु नाचते-गाते रहे।
ये रहे मौजूद
यात्रा के दौरान पूर्व विधायक राजकुमारी शर्मा, भाजपा प्रदेशकार्यकारिणी सदस्य नीलम मिश्रा, बीएल रणवां, मनोज बाटड़, नरेंद्र वर्मा, महेंद्र डीडवानियां, प्रियदर्शन कौशिक, भगवान सिंह, गोकुल प्रसाद, शालिनी, निर्मला, सुनीता, मदन मोहन, आभा माथुर, हरिप्रसाद वर्मा, उषा देवी शर्मा आदि मौजूद रहे।
यात्रा के अनुभव
1. भगवान राम की कृपा से ही उनके दर्शन हुए हैं। यूं महसूस हुआ कि मंदिर में विग्रह नहीं साक्षात भगवान ही है। दर्शनों के अनुभव को शब्दों से बयां नहीं किया जा सकता। उसे सिर्फ मन ही जानता है। ट्रेन व अयोध्या दोनों की व्यवस्थाएं भी बेहतरीन रही।
विनोद लाटा, रामगढ़ शेखावाटी।
2.यात्रा बहुत आराम व आनंद देने वाली रही। भगवान राम के दर्शन ने मन को तृप्त कर दिया। सफर के साथ अयोध्या में हर तरह की सुविधा मिली। मोदी व योगी सरकार का आभार जताना चाहूंगा।
फतेहसिंह, गुढागौडज़ी, झुंझुनूं।
3. इष्ट के दर्शन कर मानो सारे अभिष्ट पूरे हो गए। सोचा नहीं था कि भगवान राम के दर्शनों की लालसा इतनी जल्दी पूरी होगी। उन्हीं की कृपा से संभव हुआ है।
जितेंद्र सिंह शेखावत, राधाकिशनपुरा, सीकर।
Published on:
10 Mar 2024 11:45 am
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