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शेखावाटी के इस प्राचीन भैरव मन्दिर में पूरी होती है हर मनोकामना…!

शिश्यू के निकट कई सालों पहले देवनारायण भगवान की प्रतिमा रुपगढ़ के पास खातीवास से लाई गई थी। मंदिर करीब 450 साल पुराना है।

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सीकर

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Gaurav Saxena

Jun 18, 2022

शेखावाटी के इस प्राचीन भैरव मन्दिर में पूरी होती है हर मनोकामना...!

शेखावाटी के इस प्राचीन भैरव मन्दिर में पूरी होती है हर मनोकामना...!

Every wish is fulfilled in this ancient Bhairav temple of Shekhawati...!
- शिश्यू भैरव का अति प्राचीन मंदिर बना आस्था का केन्द्र
-भैरव अष्टमी पर जुटते हैं हजारों की संख्या में भक्त
सीकर. इस आपाधापी वाले इस युग में प्राचीन मान्यताओं का अपना स्थान अभी भी बरकरार है। इसी कड़ी में राजस्थान(Rajasthan) के शेखावाटी(Shekhawati) इलाके का प्राचीन भैरव मंदिर भी आस्था का बड़ा केन्द्र है, जहां सालों से चली आ रही मान्यता के कारण हर वर्ष हजारों और लाखों भक्त यहां पहुंचते हैं।

450 साल पुराने मंदिर की महिमा अपरमपार!
रानोली- शिश्यू (Shishu)मन्दिर के पुजारी जगदीश गुर्जर ने बताया कि कई सालों पहले देवनारायण भगवान की प्रतिमा रुपगढ़ के पास खातीवास से लाई गई थी। ये मंदिर करीब 450 साल पुराना है। जहां आज भी बरसों पुरानी आस्था का ज्वार देखा जाता है।

मान्यता: स्वंय प्रकट हुए थे भैरव!
बुजुर्गों के अनुसार यहां पर भैरव जी स्वयं प्रकट हुए थे। शिश्यू भैरव का अति प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां पर दर्शन मात्र से ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

शिव का दूसरा रूप है भैरव...
पुराणों के मतानुसार मार्गशीष कृष्णाष्टमी को मध्यान्ह के समय भगवान शंकर के अंश से भैरव की उत्पत्ति हुई थी। अत: यह दिन भैरवाष्टमी के रूप में उत्सव के समान मनाया जाता है। शिव पुराण की शतरूद्र संहिता के अनुसार परमेश्वर सदाशिव ने मार्गशीष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भैरव रूप में अवतार लिया था। अत: उन्हें साक्षात भगवान शंकर ही मानना चाहिए। पुराणों के अनुसार भैरव भगवान शिव का दूसरा रूप हैं, भैरव का अर्थ भयानक तथा पोषक दोनों हैं, इनसे काल भी सहमा रहता है। इसलिए इन्हें काल भैरव कहा जाता है। भगवान शिव के दो रूप हैं भैरव नाथ एवं विश्व नाथ। एक रूप तो अत्यन्त विकराल, रौद्र, भयानक, प्रचण्ड तथा दूसरा रूप अत्यन्त शील, करूण, शान्त, सौम्यता का प्रतीक है। पहला रूप पापी, धर्मद्रोही तथा अपराधियों को दण्ड देने के लिए है तथा दूसरा रूप सौम्य रूप जगत की रक्षार्थ माना जाता।

हर साल लगते हैं भंडारे
इस भैरव मंदिर में कई वर्षों से सर्व समिति से भंडारे का आयोजन किया जाता है। सामाजिक सुरक्षा अधिकारी भंवर लाल गुर्जर ने बताया हर साल की भांति इस साल भी शुक्रवार रात्रि को भव्य जागरण का आयोजन किया गया। जिसमें गायक महेश लताला, अनिल चंदेला द्वारा एक से बढकऱ एक भजनों की प्रस्तुति दी गई। शनिवार को सुबह श्री देवनारायण भेरुजी महाराज की डीजे की धुन और महिला एवं पुरुषों ने नाचते गाते झांकी गांव के सभी मार्गो से होते हुए निकाली गई। झांकी का गांव के लोगों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर के स्वागत किया। इसी के साथ मालपुआ का विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें सभी गांव के लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मंदिर में शनिवार और रविवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।