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Exclusive: राजस्थान में यहां मिला 10 हजार टन यूरेनियम, निकालने के लिए बन रही 1 KM लंबी सुरंग

सीकर के खंडेला में दस हजार टन यूरेनियम ( 10 Thousand Tons of Uranium in Rajasthan Khandela ) मिलने के 22 साल पुराने सर्वे पर अब पूरी तरह मुहर लग गई है। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ( Uranium Corporation of India ) ने यहां से यूरेनियम निकालने की तैयारी शुरू कर दी है।

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सीकर

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Naveen Parmuwal

Jan 29, 2020

Exclusive: राजस्थान में यहां मिला 10 हजार टन यूरेनियम, निकालने के लिए बन रही 1 किमी लंबी सुरंग

Exclusive: राजस्थान में यहां मिला 10 हजार टन यूरेनियम, निकालने के लिए बन रही 1 किमी लंबी सुरंग

अजय शर्मा, सीकर।
सीकर के खंडेला में दस हजार टन यूरेनियम ( 10 Thousand Tons of Uranium in Rajasthan Khandela ) मिलने के 22 साल पुराने सर्वे पर अब पूरी तरह मुहर लग गई है। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ( Uranium Corporation of India ) ने यहां से यूरेनियम निकालने की तैयारी शुरू कर दी है। यूसीआइएल ने अब खुदाई के लिए लगभग 22 करोड़ की लागत से सुरंग ( Tunnel For Uranium in Rajasthan ) बनाना भी शुरू कर दिया है। यूसीआइएल अधिकारियों का दावा है कि राजस्थान में यूरेनियम का यह पहला और देश का तीसरा प्रोजेक्ट है। इससे पहले झारखंड और तेलगांना में इस तरह के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। रॉयल इलाके में 23 हेक्टेयर जमीन से यूरेनियम की खुदाई में लगभग 20 साल का समय लगेगा। यूसीआइएल ने खुदाई के लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू कर दिया है। प्रोजेक्ट पर लगभग छह हजार करोड़ से अधिक का खर्चा आएगा।

400 फीट नीचे से होगी खुदाई
रायल व सुहागपुरा गांव में 400 फीट नीचे से खुदाई शुरू होनी है। यूरेनियम की गुणवत्ता झारखंड के यूरेनियम के समान ही है। यहां चट्टानों के बीच में धार के रूप में यूरेनियम होने की पुष्टि हुई है।

प्रदेश को फायदा

खंडेला इलाके में खनन शुरू होने पर तीन हजार लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। तीन हजार कर्मचारियों की वजह से स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा। प्लांट में कुछ पदों के लिए स्थायी भर्ती भी होगी। इसमें इलाके के लोगों को प्राथमिकता मिलेगी।

एनएफसी को जाएगा यूरेनियम
योजना के तहत सीकर जिले से निकलने वाला यूरेनियम एनएफसी (नेशनल फ्यूल कॉर्पोरेशन) में भेजा जाएगा। इसके बाद यहां से समन्वय समिति की रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न कार्यों में उपयोग लिया जा सकेगा।

आंकड़ों में समझें पूरे प्रोजेक्ट को
कहां है यूरेनियम: खंडेला इलाके के रॉयल गांव में
प्रारंभिक जानकारी कब मिली: 1998 में
ड्रिल से खुदाई: 1999 से
यूरेनियम की पुष्टि: 2005 में
प्रोजेक्ट के लिए कवायद: 2016 से
यूरेनियम के लिए सुरंग: लगभग एक किलोमीटर
सुरंग की चौडाई: 6 मीटर
सुरंग का काम पूरा होगा: 20 महीने में
सुरंग पर खर्चा: 22 करोड़ से अधिक

आगे क्या: डीपीआर से तय होगी खुदाई की योजना
यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की टीम ने खंडेला में प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू कर दिया है। डीपीआर बनने में लगभग एक साल का समय लगेगा। तब तक खुदाई के लिए सुरंग का काम पूरा होने की संभावना है। डीपीआर स्वीकृति के बाद यहां से यूरेनियम खुदाई का काम शुरू होगा।

खास बात : खुदाई के लिए देश की अनूठी सुरंग होगी
यूसीआइएल के माइंस मैनेजर हेमन्त कुमार मण्डा ने बताया कि खंडेला इलाके में खुदाई के लिए बनने वाली सुरंग अनूठी होगी। इस सुरंग को नई टैक्नोलॉजी के आधार पर तैयार करवाया जा रहा है। यहां दस हजार टन यूरेनियम होने की पुष्टि के बाद सरकार ने प्रोजेक्ट की दिशा में काम शुरू किया है।

खदानों के लिए सीकर से जाएगा पानी, एमओयू पर साइन

भारत सरकार के इस प्रोजेक्ट के तहत पानी सीकर से जाएगा। इसके लिए सीकर नगर परिषद और यूसीआइएल के बीच एमओयू हो चुका है। इसके तहत सीवरेज के पानी को भूमिगत पेयजल लाइनों के सहारे खंडेला तक भेजा जाएगा। तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है, अब जल्द वित्तीय स्वीकृति भी मिलने की संभावना है।

एक महीने से शेखावाटी में हवाई सर्वे
पिछले एक महीने से सीकर, चूरू व झुंझुनूं जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हवाई सर्वे जारी है। इस सर्वे को मंत्रालय ने वेसिक मैग्नेटिक सर्वे का नाम दिया है। यूसीआइएल के अधिकारियों ने बताया कि 400 स्कवायर किलोमीटर में यह सर्वे होना है।

दुनिया में कहां-कहां है यूरेनियम के भंडार

भारत में लगभग दो लाख टन से अधिक यूरेनियम के भंडार होने की पुष्टि हो चुकी है। दुनिया की बात करें तो सबसे ज्यादा कजाकिस्तान में यूरेनियम है। इसके अलावा कनाडा और ऑस्टेलिया में भी यूरेनियम के भंडार है।

शेखावाटी में यहां भी है यूरेनियम
शेखावाटी में तीन और स्थानों पर यूरेनियम होने की संभावना है। इसके लिए जल्द विभाग की टीम ड्रिल की कवायद शुरू करेगी। इसमें उदयपुरवाटी क्षेत्र का जहाज, नृसिंहपुरी व नीमकाथाना क्षेत्र के तीन गांव शामिल हैं।