
झुंझुनूं.
हाड कंपाती सर्द रात। चारों तरफ घना अंधेरा। चुभती हुई सर्द हवा और फसलों के बीच सिंचाई करने की मजबूरी। कभी आवारा पशुओं से फसल चौपट करने का डर तो कभी हिंसक होती नील गाय(रोजड़ों) व अन्य जंगली जानवरों से खुद को बचाने की चिंता।राजस्थान पत्रिका की टीम ने किसानों का दर्द जानने के लिए रात को आठ से दो बजे तक खेतों का दौरा किया।वहां किसानों से उनकी परेशानी जानी तो उनका दर्द छलक उठा। किसानों ने कहा, नील गाय व आवारा पशु फसल को चौपट कर रहे हैं। ना सरकार की तरफ से कोई सहायता मिल रही है ना ही आवारा पशुओं के लिए कोई गोशाला या अन्य रिजर्व क्षेत्र घोषित किया जा रहा है। इन सबके बीच किसानों को सिंचाई के लिए रात को बिजली दी जा रही है। रात में जब लोगों को कमरों में रजाई ओढ़े हुए को सर्दी लगती है तब भूमिपुत्रों को खेतों की रखवाली व सिंचाई करनी पड़ रही है। पेश है खेतों से पत्रिका की लाइव रिपोर्ट।
मनोज टांक, उदयपुरवाटी.
रात के 8 बजकर 45 मिनट का समय। स्थान नगर पालिका क्षेत्र के अंतिम छोर पर बसी ढाणी सिलावटा वाली। किसान मूलचंद सैनी के परिजन अलाव जला रहे हैं। एक पेड़ के नीचे चारपाई डली हुई है। जिसके पास ही एक लंबी मोटी लकड़ी रखी हुई है।
चारपाई पर किसान मूलचंद सैनी लेटा ही है, कि हम वहां पहुंच गए। पूछने पर बताया किरात्रि में आवारा मवेशी फसल को चौपट कर जाते हैं, इसलिए खुले आसमान के नीचे ही चारपाई डाल कर लेट जाते हैं। जिससे अगर कोई मवेशी आए तो उन्हें भगा सकें। सर्दी का अहसास कम लगे इसके लिए पास में ही अलाव जला लेते हैं। फसल की सुरक्षा के लिए बाड़ व तारबंदी कर रखी है , लेकिन पशु उन्हें भी लांघकर आ जाते हैं। कुछ इसी प्रकार की अपनी पीड़ा बयां की कोट गांव में स्थित ढाणी भाठावाली के किसान राजेंद्र सैनी व रामकरण सैनी ने भी। अब रात के 9 बज गए हैं।किसान राजेंद्र सैनी फसल में सिंचाई कर रहा है। सैनी ने बताया कि रात को कई बार बिजली चली जाती है, जिससे सिंचाई में परेशानी आ रही है। रात्रि को मवेशियों से फसल को बचाने के लिए खुले आसमान में ही डेरा जमा कर सो जाते हैं। रात को जब सिंचाई करते हैं तब हाथों की उंगलियां कडक़ हो जाती है। जिसके कारण ठीक ढंग से खाना भी नहीं खाया जा सकता है। किसान रामकरण सैनी ने बताया कि बाड़बंदी व तारबंदी के बावजूद जंगली नीलगाय व आवारा गाय-सांड आदि खेत में घुसकर फसल को खा जाते हैं। हालांकि फसल को बचाने के लिए हम खेत में रात्रि को सो जाते हैं और जाग होती है तो ल_ लेकर पशुओं को दूर भगा कर आते हैं , लेकिन वे दूसरे खेतों में घुस जाती हैं । सरकार को चाहिए कि रात्रि के बजाय दिन में बिजली दें, जिससे हमारी थोड़ी परेशानी कम जरूर हो। साथ ही फसल की सुरक्षा के लिए प्रत्येक किसान को तारबंदी या फिर चार दीवारी निर्माण के लिए अनुदान देने चाहिए। वर्तमान में सर्दी परवान पर है और किसी भी किसान के साथ अनहोनी भी हो सकती हैं। विदित हो कि इलाके में किसानों के पास मवेशियों से फसल को बचाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है जिसके चलते किसान आवारा मवेशी से पूरी तरह आहत है। कुछ माह पहले एक नील गाय ने तो महिला को मार दिया था।
जितेंद्रसिंह शेखावत, मंडावा.
रात के 11 बजे हैं। किसानों के दर्द को जानने के लिए मंडावा के पास ढिगाल रोड पर जीतास गांव के खेतों में खड़ा हूं। चारों ओर सुनसान व फैले हुए अंधेरे के बीच टॉर्च की रोशनी में किसान फसल में पानी देने के लिए पाइप लाइन बदल रहा है तो कोई हाथ में लाठी लिए हुए खेत के चारों ओर घूमकर आवारा पशुओं से खेतों की रखवाली कर रहा है। किसानों ने बताया, एक तरफ तो फसल में पानी लगने के बाद फिर से उस लाइन को बदलना पड़ता है व इन कामों के बीच पूरी रात उनको जागना पड़ता है। कुमावतों की ढाणी के किसान श्रवण कुमार, भागीरथ मल व जीतास के प्रभूसिंह, वीरेंद्र, जसंवत, गजेंद्र ने बताया कि पशुओं से फसल को बचाने के लिए परिवार सदस्यों को भी जागकर खेतों में पहरा देना पड़ता है। यह सबकुछ इसलिए करना पड़ता है कि जो तपस्या करके फसल को बचाने के लिए सर्द रात में मेहनत करने से कुछ बच जाए ताकि परिवार पालने के लिए कुछ मिल जाए। अगर इन आवारा पशुओं का समाधान नहीं हुआ तो किसानों को खेती बंद करनी पड़ेगी तथा इस समस्या को लेकर सरकार भी कुछ नहीं कर रही है।
एक भी रात रखवाली नहीं करें तो सुबह फसल चौपट
सुरेन्द्र डैला, चिड़ावा. नश्तर सी चुभती ठंडी हवा। जहरीले जानवर, कीड़े-मकाड़े, खुला आसमान व जमीन पर बिछौना। कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दे रहा है। जहां खेतों की तरफ जाने वाली आम रास्ते पर आग जलती दिखी। जाकर देखा तो किसान विजयसिंह गोदारा, नरेशकुमार, पवन डांगी, कैलाश धाबाई, शंकरलाल, उम्मेद गोदारा, प्रताप गोदारा आदि हाथ में लकड़ी व बैटरी मिले मिले। बोले, आवारा पशुओं ने परेशान कर दिया। यहां किसान अलाव तापकर रात गुजारने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि एक रात भी रखवाली नहीं करें तो सुबह फसलें चौपट मिले। आवारा पशुओं के झुंड के झुंड निकलते हैं। किसानों के अनुसार आवारा पशु तो पीड़ा हैं ही, बिजली सप्लाई भी कम परेशान नहीं कर रही। रात के समय थ्री फेज सप्लाई दस बजे से दी जाती है। जिससे रातभर किसान को पानी देने के लिए भी जागना पड़ता है। दिन का ब्लॉक चलता है तो रात में सिंगल फेज सप्लाई नहीं आती। जिससे किसानों को फसल की रखवाली करना भी मुश्किल हो रहा है। यहां से नरहड़, भोमपुरा, लांबा गोठड़ा, अजीतपुरा, गोठड़ी, नूनिया गोठड़ा, कंवरपुरा आदि गांवों में जाकर हालात जाने। रात करीब 12.30 गोठड़ी गांव का किसान इंद्राजसिंह लठ लिए खेत की रखवाली करते मिला। किसान खेत के चारों ओर पहरा दे रहा था। ऐसे ही हालात उपखंड के अन्य गावों के भी हैं। यहां भी किसान रातभर जागकर फसलों की रखवाली कर
रहे हैं।
सूरज तिवारी, झुंझुनूं.
रात करीब सवा दस बजे हैं। मैं मंड्रेला रोड स्थित एक खेत में किसान महेंद्र के साथ खड़ा हूं। सर्द हवा चल रही है। बादल छाने के कारण चारों तरफ अंधेरा है। कई बार तेज हवा के झोंकों से सर्दी तेज हो रही है, लेकिन किसान अपनी फसल बचाने के लिए हाथ में डंडा लिए खड़ा है। उसका घर करीब एक किलोमीटर दूर है। उसके हाथ में एक लाइट है। किसान ने बताया वे प्रति दिन देर रात तक जगकर खेतों में पानी देते हैं और बेसहारा पशुओं से फसलों को बचाते हैं।
नियमित रूप से ऐसा करने के लिए घर के अन्य सदस्यों का भी सहयोग लेना पड़ता है। शर्द रात में खेतों में रहना बेहद मुश्किल काम है। फिर भी फसलों को बचाने के लिए खेतों पर रहना पड़ता है। इनके अलावा दूसरे स्थानों पर भी कई किसान खेतों में सिंचाई करते व अलाव तापते मिले।
बुहाना से राजेश तंवर:
हाड़ कंपा देने वाली सर्दी। चहुंओर घने कोहरे के साथ चलती तेज हवा। ऐसे परिस्थिति में रात्रि को बर्फ जमे पाईपों की लाइन बदलता किसान। इतना सोचने भर से शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। लेकिन धरती पुत्र किसान को रात्रि पारी में बिजली आपूर्ति होने के कारण हरेक रात्रि को इस प्रकार के वाकए से रूबरू होना पड़ता है। रात्रि को कृषि उपयोग के लिए आपूर्ति की जाने वाली थ्री फेस बिजली धरती पुत्र किसान के लिए मुसीबत बनी हुुई है। फसल पैदावार करने के लिए किसानों को कड़ाके की ठंड में खेत में पानी देना पड़ रहा है। कृषि आधारित उपखंड में करीब तीन हजार चालू कृषि कनेक्शन है। किसानों को पांच से छह घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। रात्रि पारी में किसान को कड़ाके की ठंड में फसल में पानी देना पड़ता है। रात्रि की पारी में बिजली ट्रिपिंग भी किसान के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। बार-बार की ट्रिपिंग आने से किसान असहाय बना हुआ है। क्षेत्र के गांव काकड़ा, खांदवा, निम्बास, कुहाड़वास, बड़बर, थली, सुलताना अहीरान, घसेड़ा, बुहाना सहित अन्य उप बिजली घरों के तहत आने वाले गांवों में पारी के हिसाब से रात्रि को बिजली आपूर्ति की जा रही है, जो किसान के लिए किसी सजा से कम नहीं है। पड़ौसी राज्य हरियाणा में किसान को राज्य सरकार राहत दे रही है। राज्य सरकार की तरफ से किसानों को फसल पैदावार के लिए बिजली केवल दिन में आपूर्ति की जाती है। हरियाणा में सर्दी के दिनों में सवेरे छह बजे से शाम पांच बजे तक पारी के हिसाब से किसान को थ्री फेस बिजली देकर रात को पडऩे वाली कड़ाके की ठंड से राहत दी हुई है।
Published on:
24 Jan 2018 04:24 pm
बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
