
राजस्थान: शादी पार्टियों में डांस करते करते स्टार प्लस के Dance Plus तक पहुंचे दो भाई
योगेश पारीक, फतेहपुर.
नींद हो न हो, आंखों में ख्वाब जरूरी होते है, चांद को छू पा के लिए, ख्याल जरूरी होते है! किसी कवि की यह पंक्तियां फतेहपुर के दो चचेरे भाइयों पर फिट बैठती है। शादी पार्टियों में डांस करते करते डांसिंग का ऐसा जुनून चढ़ा की फिर पीछे मुडकऱ नहीं देखा। जुनून ऐसा था कि सारे हालातों को भी अपनी ओर मोड़ लिया। खुद ने टायर पंचर बनाने का काम किया औ छोटे भाई को भी डांस सिखाया। छह माह की मेहनत के बाद दोनों भाई स्टार प्लस ( Star Plus ) के रियलटी शो डांस प्लस ( Dance Plus ) में टॉप 30 ( Top 30 ) में जगह बनाने में कामयाब हो गए। अब रविवार को फैसला होगा कि वह टॉप 16 में पहुचेंगे या नहीं।
जानकारी के अनुसार कस्बे के वार्ड 21 निवासी शाकीर व रेहान ( Shakir and Rehan Selected for Dance Plus ) की कहानी किसी फिल्मी कहानी के जैसी ही है। शाकीर पिछले कई वर्षों से डांस कर रहा है। उसके साथ ही उसके चाचा का बेटा रेहान भी डांस करने लग गया। सीकर में हुए एक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर रेहान के हौसलों ने उड़ान भरी। हाजी वजीर खान शिक्षण संस्थान में पढ़ाई के दौरान उसने डांस को अपना शौक बना लिया। शाकीर व रेहान ने मुम्बई में तीन महीनों के लिए डांस क्लास ज्वाइन की। उसके बाद डांस प्लस के ऑडिशन्स देकर उसमें जगह पाई। टॉप 30 में जगह मिलने के बाद घर पर खुशी का माहौल तो है लेकिन घर वालो को यह भी नही पता कि बेटे किस मुकाम पर पंहुचे हैं।
पिछले 2 सालों से ही डांस कर रहा है रेहान : रेहान के पिता मुबारिक अली विदेश रहते हैं। बड़े भाई शाकीर को डांस करते देख रेहान के भी डांस की ललक लग गई। पहले शादी पार्टी में डांस किया। शाकीर ने डांस सिखाया तो स्कूल से लेकर कई जगहों पर डांस में प्रथम स्थान प्राप्त किया। करीब छह माह पहले डांस सीखने के लिए मुम्बई गए। वहां पर एकेडमी ज्वाइन की। शाकीर ने राजस्थान पत्रिका से बताया कि डांस प्लस 5 के लिए जयपुर में ऑडिशन दिया। इसके बाद तीन ऑडिशन मुंबई में दिए। ऑडिशन पास करने के बाद डांस प्लस की ओर से ही रहने खाने की व्यवस्था की गई।
टायर पंचर का काम करता था शाकीर
शाकीर को डांस का बचपन से शौक था। उसने खुद ने अलग अलग जगह देख कर खुद से डांस सिखा। पिता की तबीयतखराब होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी भी शाकीर के कंधों पर आ गई। वह सीकर में टायर पंचर बनाने का काम करता था। लेकिन उसके दिमाग मे सिर्फ डांस ही था। मुम्बई जाके भी संघर्ष किया। शाकीर के पापा टायर पंचर की दुकान चलाकर शाकीर को पैसे भेज रहे थे। शाकीर ने बताया कि मुम्बई में भी उसके लिए संघर्ष कम नही था।
Published on:
13 Nov 2019 03:44 pm
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