
अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन जो परहित के लिए जिए वो अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन जाते हैं। बात जब देश का भविष्य बनाने वाले शिक्षा मंदिर के लिए अपनी जमीन देने की हो तो उसका सानी कोई नहीं होता। 40-50 साल पहले गांव छोड़कर जयपुर बसने के बाद भी अपनी जड़ों को सींचने वाला यह परिवार दांतारामगढ़ तहसील के बानूड़ा गांव का तेजावत परिवार है। जी हां गांव के बीच स्थित स्कूल के विस्तार के लिए जब जगह कम पड़ी तो गांव के दानदाता तेजावत परिवार ने स्कूल के पीछे स्थित अपनी जमीन दान दे दी। आज गांव का हर व्यक्ति दानदाता परिवार के बड़े दिल की तारीफ करते नहीं थकता है।
1962 में भी दानदाता के दादा ने हवेली खरीद कर दे दी थी स्कूल को
दानदाता परविार के घनश्याम तेजावत ने बताया कि बानूड़ा गांव में 1962 से राजकीय माध्यमिक स्कूल के भवन विस्तार व बच्चों के खेल मैदान के लिए जगह की जरूरत होने लगी। प्रधानाध्यापक राकेश तेतरवाल ने बताया कि लम्बे समय से स्कूल को किसी दानदाता की आवश्यकता थी। हाल ही में तेजावत परिवार ने ही स्कूल के पीछे स्थित अपनी करीब 850 वर्ग गज जमीन स्कूल के लिए दान देने की घोषणा कर दी।
दादा व पिता की स्मृति में बेटों ने जमीन देने का किया निर्णय
बानूड़ा गांव मूल निवासी हाल जयपुर के सांवरमल, घनश्याम, पवन कुमार, श्यामसुन्दर, कैलाशचन्द्र, अशोक कुमार व विनोद कुमार ने अपनी माता बिड़दी देवी की प्रेरणा से स्कूल भवन विस्तार को देखते हुए स्कूल को अपने दादा पन्नालाल तेजावत तथा पिता लिखमीचंद व बद्रीनारायण की स्मृति में स्कूल के पीछे स्थित अपनी 850 वर्ग गज जमीन देने का निर्णय किया। उन्होंने 26 जनवरी को गांव में आकर जमीन दान करने की घोषणा कर दी। तेजावत परिवार का जयपुर में अपना व्यवसाय है। परिवार हाल जयपुर में ही रह रहा है।
गांव छोड़े लम्बा समय हो गया है। लेकिन गांव से बराबर जुड़े हुए है। जब पता चला कि स्कूल के लिए जगह की आवश्यकता है, तो पुराने स्कूल भवन के पीछे स्थित करीब साढ़े आठ सौ वर्ग गज जमीन दे दी। मन को सुकून मिलता है।
- घनश्याम तेजावत, दानदाता परिवार का सदस्य
Published on:
03 Feb 2017 04:29 pm
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