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विदेश में ऐसा भी होता है इंडियन एमबीबीएस स्टूडेंट्स के साथ, हकीकत जान खौल उठेगा खून

भारतीय दूतावास भी विद्यार्थियों को निजी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं लेने की सलाह जारी कर चुका है।

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सीकर.
कई विदेशी मेडिकल कॉलेज हमारे युवाओं के सपनों से खेलने के साथ उन्हे खुलेआम ठगी का शिकार बन रहे हैं। मामला जॉर्जिया के कई निजी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है। यहां के कई मेडिकल कॉलेज विद्यार्थियों को एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अवधि पांच वर्ष बता रहे हैं। जबकि दूतावास को स्थानीय भाषा में दिए जाने वाले पत्र में पाठ्यक्रम की अवधि छह वर्ष बता रखी है।

खास बात यह है कि इन मेडिकल कॉलेजों की ओर से विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में पत्र दिया जाता है। इसमें पाठ्यक्रम की अवधि को दर्शाया ही नहीं गया है। कई विद्यार्थी इनके झांसे में आकर प्रवेश ले रहे हंै। बाद में सच्चाई पता लगने पर विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई करना मजबूरी हो जाता है।
एक साल की फीस के लिए परेशानी
पांच वर्ष का पाठ्यक्रम होने पर विद्यार्थी इस हिसाब से लोन करा लेते हंै। जब छह साल के पाठ्यक्रम का पता लगता है ज्यादातर मामलों में दुबारा लोन भी नहीं होता है। ऐसे में मजबूरन विद्यार्थियों को घर से ही फीस चुकानी पड़ती है।

दूतावास ने किया आगाह
भारतीय दूतावास भी विद्यार्थियों को निजी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं लेने की सलाह जारी कर चुका है। इसके बाद भी कई विद्यार्थी कन्सलटेंट के विश्वास में आकर धोखा खा रहे है।


केस एक: छात्र पुष्पेन्द्र कुमार ने एक कन्सलटेंसी के जरिए जॉर्जिया में प्रवेश लिया। छात्र ने बताया कि पढ़ाई के लिए संसाधन नहीं होने सहित अन्य कारणों से वहां पढाई नहीं कर सके। अब चीन में प्रवेश लेकर डॉक्टरी की पढ़ाई में जुटा हूं। पुष्पेन्द्र भी फीस वापसी के लिए चक्कर लगा रहा है।
केस दो: छात्र धनजंय कुमार ने भी डॉक्टरी के सपने को पूरा करने के लिए जॉर्जिया में प्रवेश ले लिया। धनजंय को प्रवेश के समय कई तरह के दावे किए गए। लेकिन जब यह मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो ऐसा कुछ नहीं मिला। इस पर छात्र पर फीस वापस मांगी लेकिन कुछ नहीं मिला। अब छात्र फीस की राशि के लिए चक्कर लगा रहे है।

एक्सपर्ट वेद प्रकाश बेनीवाल के अनुसार ,विदेश में एडमिशन लेने के समय धयान रखें कि वहां के सरकारी विवि में ही प्रवेश ले। प्रवेश लेने से पहले वहां पढ़ रहे 20 से 30 छात्रों एवं उनके अभिभावकों के नंबर लेकर उनसे सब जाने। विदेश के किसी भी सरकारी यूनिवर्सिटी में किसी भी तरह की कोई मैनेजमेंट फीस, वन टाइम पेमेंट फीस, डवलपमेंट फीस, लाइसिन फीस एवं कॉन्ट्रेक्ट फीस नहीं होती है। यूनिवर्सिटी की फीस सीधे यूनिवर्सिटी के खाते में जमा करें किसी भी कन्सलटेंसी को देने से बचे।

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