
विश्व में पहचान दिलाने वाले विषय पर नहीं सरकार का ध्यान
रविन्द्र सिंह राठौड़
rajasthanpatrika.com
राजस्थान में बणी ठणी, नाथद्वारा शैली, लघु चित्रकला शैलियां, मांड, लोक संगीत केसरिया बालम, घूमर गीत व नृत्य विश्व प्रसिद्ध हैं। जिसे देखने के लिए विश्वभर के पर्यटक राजस्थान आते हैं। राजस्थान की चित्रकला व संगीत ने विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन संगीत व चित्रकला विषय का राजस्थान की सरकारी स्कूलों में दयनीय स्थित है। सरकारी स्कूलों में प्रायोगिक विषय में केवल भूगोल विषय को प्राथमिकता दी जा रही हैं। जबकि प्रदेश के निजी स्कूलों में विद्यार्थी बढ़ चढ़कर चित्रकला व संगीत कला को प्रायोगिक विषय के रूप में चुन रहे हैं। सरकारी स्कूलों में तो कक्षा 10 तक के विद्यार्थियों ने पिछले 30 साल से चित्रकला व संगीतकला का शिक्षण तक प्राप्त नहीं किया। ऐसे में चित्रकला व संगीतकला के प्रति सरकार का भेदभाव साफ नजर आ रहा है।
30 साल में सरकार ने की केवल 253 पदों पर नियुक्ति
30 साल में राज्य सरकार ने केवल चित्रकला में प्रथम श्रेणी के 235 और संगीत में 18 पदों पर नियुक्तियां दी है। चित्रकला में 211 व संगीत में 25 पद खाली है। सीनियर सैंकडरी में हर साल निजी व सरकारी स्कूलों में 1.30 लाख छात्र चित्रकला, संगीतकला विषय को ऐच्छिक विषय के रूप में चुनते हैं। वही कक्षा एक से 10 तक चित्रकला, संगीतकला विषय के शिक्षण की बात करे तो 1992 में विद्यार्थी शिक्षण से वंचित रहे हैं।
सरकार की गलत नीतियों को खामियाजा भुगत रहे युवा
विद्यार्थियों को न तो पुस्तक और न ही सरकार ने 30 साल में चित्रकला व संगीत कला के द्वितीय व तृतीय पद सृजित किए। बिना शिक्षण के अंक तालिकाओं में 100 अंकों का मूल्यांकन कर विद्यार्थियों को ग्रेडिंग मिल जाती हैं। ऐसे में कक्षा 10 के करीब 10 लाख और पूरे प्रदेश में 40 से 50 लाख विद्यार्थी हर साल चित्रकला व संगीतकला के शिक्षण से वंचित रहते हैं। प्रदेश में हर साल करीब 5 हजार से अधिक अभ्यर्थी चित्रकला व संगीतकला विषय में व्याख्याता बनने की आस में स्नातक व स्नातकोत्तर की डिग्री कर निकल रहे हैं। इधर, सरकार की गलत नीतियों के कारण हजारों बेरोजगार युवा भर्ती की आस में आयु सीमा बहार कर घर बैठा दिया हैं।
कक्षा 11 व 12 के प्रायोगिक विषयों में सरकारी व निजी स्कूलों का अंतर
विषय संचालित स्कूल प्रायोगिक विषय शिक्षकों के खाली पद
446 सरकारी चित्रकला 211
4269 निजी चित्रकला 00
43 सरकारी संगीतकला 25
299 निजी संगीतकला 00
6070 सरकारी भूगोल विषय 1046
6314 निजी भूगोल विषय 00
कला व संगीत के लिए बच्चे निजी में ले रहे प्रवेश
30 साल से यदि राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों में चित्रकला और संगीत ऐच्छिक विषय महत्वहीन है, तो हजारों निजी शिक्षण संस्थाओं में यह विषय संचालित क्यों हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों में केवल बहुत कम संख्या मे ही विषय संचालित हैं। इनमें भी आधे स्कूलों मे शिक्षकों के पद खाली हैं। यह सरकार की दोहरी नीति है कि अगर चित्रकला और संगीत विषय की शिक्षा बच्चों को लेनी है, तो वह निजी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश लें। जो कि चिंताजनक हैं। सरकारी स्कूलों में भूगोल विषय के समान ही चित्रकला व संगीत ऐच्छिक विषय को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सतवीर सिंह भास्कर, प्रदेश प्रभारी,
राजस्थान बेरोजगार चित्रकला अभ्यर्थी संगठन
Published on:
03 Sept 2022 01:27 pm
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