
झुंझुनूं/सीकर. राजस्थान के शहीद परिवारों को जल्द ही खुशखबर मिल सकती है। वर्ष 1999 से पहले शहीद होने वाले जवानों के एक-एक आश्रित को सरकारी नौकरी मिल सकती है। इसकी घोषणा जल्द होने की संभावना है। इसके अलावा परिवार के आश्रित को प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य किसी योजना में फ्लेट या जमीन देने की भी तैयारियां की जा रही है।
वर्तमान में शहीद के परिवार को ही मूर्ति लगाने का अधिकांश खर्च उठाना पड़ रहा है। अब ऐसी घोषणा होने की पूरी संभावना है कि सरकार ही शहीदों की मूर्ति लगवाने का खर्च उठाएगी। इसकी शुरुआत झुंझुनूं में शहीद कर्नल जेपी जानू की मूर्ति लगवाने से की जा सकती है।
अब तक क्या था
1999 के बाद के सभी शहीदों को पैकेज दिए गए हैं। लेकिन अभी तक 1962, 1965 और 1971 के अलावा अन्य युद्धो/ऑपरेशन में शहीद हुए जवानों की ना तो पार्थिव देह उनके घर तक आई और ना ही उन्हें कोई विशेष पैकेज दिया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ही शहीदों के पार्थिव देह उनके घर तक पहुंचाने और उनके आश्रितों को विशेष पैकेज देने की शुरुआत की थी। पहले तो शहीद को बड़ा पैकेज नहीं मिलता था। शहीद के अंतिम संस्कार में भी ना तो सरकार की तरफ से कोई बडे प्रतिनिधि जाते थे।
शेखावाटी ही क्यों...
झुंझुनूं देश के ऐसे जिलों में शामिल हैं, जिसने देश को सर्वाधिक सैनिक दिए हैं। राजस्थान में झुंझुनूं जैसा कोई जिला नहीं है, जहां इतने शहीद परिवार व सैनिक परिवार हो। झुंझुनूं के पड़ौसी जिले सीकर, चूरू, नागौर, अलवर, हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर ने भी देश को बड़ी संख्या में फौजी दिए हैं। ऐसे में यहीं से इसकी घोषणा हो सकती है।
बाजौर ने दिए संकेत
राज्य सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर ने भी इस संबंध में संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट तो कुछ नहीं कहा, लेकिन संकेत देते हुए बताया कि वर्ष 1999 से पहले शहीद होने वाले शहीदों की वीरांगनाओं एवं उनके आश्रितों तथा गौरव सेनानियों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा जल्द की जाएगी।
शहीदों की स्थिति
झुंझुनूं
452
सीकर
207
Updated on:
12 Dec 2017 11:45 am
Published on:
12 Dec 2017 11:40 am
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