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सीकर की अनूठी जोड़ी: बेटी ने पास की NEET-UG परीक्षा, मां बन गई व्याख्याता, सरकारी सेवा में तीसरी बार हुआ चयन

सीकर के एक शिक्षक परिवार में मां-बेटी ने एक ही साल में बड़ी सफलता हासिल कर मिसाल पेश की है। बेटी अभिलाषा चौधरी ने NEET-UG 2026 में शानदार रैंक प्राप्त की और मां सुमन चौधरी का राजस्थान स्कूल व्याख्याता भर्ती में तीसरी बार सरकारी सेवा के लिए चयन हुआ।
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सीकर

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Akshita Deora

Jul 20, 2026

Govt Job Motivational Story

मां-बेटी की फोटो: पत्रिका

Real Life Motivational Story: सीकर के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बगड़ियों का बास निवासी शिक्षक परिवार ने एक ही साल में दो बड़ी उपलब्धियां हासिल कर युवाओं के लिए प्रेरक मिसाल पेश की है। बेटी अभिलाषा चौधरी ने नीट यूजी-2026 में 636 अंक हासिल कर ऑल इंडिया 2760वीं तथा ओबीसी वर्ग में 1019वीं रैंक प्राप्त की है। वहीं उनकी मां सुमन चौधरी का चयन राजस्थान स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा में हिंदी विषय से 113वीं रैंक के साथ व्याख्याता पद पर हुआ है। एक ही परिवार में मिली इन दो सफलताओं से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

अभिलाषा ने पहले प्रयास में सरकारी मेडिकल कॉलेज, बांसवाड़ा मिलने के बावजूद प्रवेश नहीं लिया। बेहतर रैंक के लक्ष्य के साथ उन्होंने एक वर्ष का ड्रॉप लेकर दोबारा तैयारी की। उनका यह फैसला सफल रहा और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट रैंक हासिल की। सुमन चौधरी का ये सरकारी सेवा में तीसरा चयन है। इससे पहले उनका चयन वर्ष 2017 में लेवल-2 तथा 2019 में लेवल-1 शिक्षक के रूप में हो चुका है। एक ही वर्ष में मां-बेटी की सफलता को परिवार की वर्षों की मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम माना जा रहा है। अभिलाषा ने नियमित अध्ययन, मॉक टेस्ट और समयबद्ध तैयारी को अपनी सफलता का आधार बताया। वहीं सुमन चौधरी ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई जारी रखते हुए यह उपलब्धि हासिल की जो कामकाजी महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है।

दादा हैं सेवानिवृत्त अध्यापक

परिवार के मुखिया मनोज कुमार बगड़िया सरकारी अध्यापक हैं और दादा ओमप्रकाश बगड़िया सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। चाची प्रियंका सरकारी अध्यापक और चाचा सुभाष दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं। परिवार में शिक्षा को संस्कार और जीवन मूल्यों का आधार माना जाता है। अभिलाषा की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और तैयारी पूरी ईमानदारी से की जाए तो एक अतिरिक्त वर्ष भी सफलता की नई इबारत लिख सकता है।

परिजनों का कहना है कि घर का शैक्षणिक माहौल हमेशा बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा है। परिवार में पढ़ाई को केवल नौकरी का माध्यम नहीं बल्कि समाज की सेवा और बेहतर भविष्य बनाने का जरिया माना जाता है। यही कारण है कि परिवार के अधिकांश सदस्य शिक्षा और सार्वजनिक सेवा से जुड़े हुए हैं।