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राजस्थान सरकार के इस आदेश ने बढ़ाई दो हजार ग्राम पंचायतों की मुसीबत, नहीं मिलेगा ग्रामसेवक का चार्ज

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के आदेश ने ग्राम पंचायतों की व्यवस्था बदल दी है।

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राजस्थान सरकार के इस आदेश ने बढ़ाई दो हजार ग्राम पंचायतों की मुसीबत, इनकों नहीं मिलेगा ग्रामसेवक का चार्ज

सीकर.

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के आदेश ने ग्राम पंचायतों की व्यवस्था बदल दी है। इस कारण प्रदेश की दो हजार से अधिक ग्राम पंचायत प्रभावित हुई है। सरकार ने आदेश में कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में ग्रामसेवक के पद रिक्त है, वहां चार्ज कनिष्ठ लिपिक को नहीं दिया जाएगा। इस कारण प्रदेशभर में कनिष्ठ लिपिक सरकार के विरोध में उतर गए है। सरकार ने रिक्त ग्राम पंचायतों में ग्रामसेवक का चार्ज नजदीकी ग्राम पंचायतों के ग्रामसेवक को देने का फरमान जारी किया है। ग्राम पंचायतों में ग्रामसेवक के समकक्ष कार्मिक उपलब्ध होने के बाद भी यह निर्णय लेने से आर्थिक झटका भी लगेगा। वहीं आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले स्थानीय ग्राम पंचायतों के कार्मिक को ही चार्ज मिला था। एेसे में वह आसानी से अपने कार्य करा पा रहे थे। लेकिन अब दूसरी ग्राम पंचायत के ग्रामसेवक को काम देने से दोनों ग्राम पंचायतों के कार्य प्रभावित होंगे।


योजनाएं भी होगी प्रभावित

प्रदेश की ज्यादातर ग्राम पंचायतों की आबादी औसत चार से पांच हजार तक होती है। वहीं ग्राम पंचायत क्षेत्र में पांच से दस गांव भी शामिल है। ग्राम पंचायतों में पंचायतराज की एसएफसी, टीएफसी, यूटीएफ के साथ ग्रामीण विकास विभाग की मनरेगा, बीएडीपी, एमपीलैड, एमएलएलैड जैसी योजनाऐं संचालित है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, पट्टा वितरण, स्वच्छ भारत मिशन सहित दर्जनों योजनाए है। एेसे में योजनाएं भी प्रभावित हो सकती है।

दो हजार पद रिक्त
फिलहाल प्रदेश में करीब 2 हजार ग्रामसेवकों के पद रिक्त है। एक ग्रामसेवक को दो ग्राम पंचायतें दिए जाने से चार हजार पंचायतें अस्त व्यस्त होगी। विभाग के इस आदेश के साथ अपनी अन्य मांगों के समर्थन में मंत्रालयिक संवर्ग हड़ताल पर है। मंत्रालयिक कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य सरकार उनका कैडर रिव्यू नहीं कर रही है बल्कि मंत्रालयिक संवर्ग को प्रभावित करने के लिए गलत आदेश जारी कर रही है। मंत्रालयिक संवर्ग के अनुसार कनिष्ठ लिपिक को ग्रामसेवक के रिक्त पद का कार्यभार नहीं देने से ग्राम पंचायतों में उपलब्ध मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग नहीं हो पाएगा।