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650 फीट ऊंचे पहाड़ पर एक साथ विराजित चार देवियां, 550 वर्ष पुरान यह मंदिर एक चूने की परात से बना है

Sikar News in Hindi : शेखावाटी में पहाड़ों पर स्थित कई ऐसे दुर्ग व मंदिर हैं जिनका इतिहास बेहद ही रोचक है। एक ऐसा ही मंदिर सीकर जिले के खंडेला में अरावली की वादियों में बसा है जिसकी मान्यता समय के साथ बढ़ती जा रही है।

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सीकर

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Naveen Parmuwal

Oct 08, 2019

650 फीट ऊंचे पहाड़ पर एक साथ विराजित चार देवियां, 550 वर्ष पुरान यह मंदिर एक चूने की परात से बना है

650 फीट ऊंचे पहाड़ पर एक साथ विराजित चार देवियां, 550 वर्ष पुरान यह मंदिर एक चूने की परात से बना है

सीकर।
Sikar News in Hindi : शेखावाटी में पहाड़ों पर स्थित कई ऐसे दुर्ग व मंदिर हैं जिनका इतिहास बेहद ही रोचक है। एक ऐसा ही मंदिर सीकर जिले के खंडेला में अरावली की वादियों में बसा है जिसकी मान्यता समय के साथ बढ़ती जा रही है। 650 फीट ऊंचे पहाड़ पर स्थित मां चामुंडा मंदिर ( Maa Chamunda Temple in Khandela ) में एक साथ चार देवियां विराजित है। मंदिर में शारदीय नवरात्रि के समापन के पर दूर दूराज से आए श्रद्धालुओं ने माता के मंदिर पहुंचकर माता को धोक लगाकर अपने परिवार की खुशहाली की कामना की। पूरे भारत वर्ष में बसे हुए लोग अपनी कुलदेवी माता के दर्शनार्थ यहां आते हैं तथा साल में जात जडूले भी करते है।

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मंदिर के पुजारी लक्ष्मण शर्मा ने बताया कि बुजुर्गों के अनुसार चामुंडा माता देवी का प्राचीन मंदिर खंडेला के पश्चिमी में खंडेश्वर नाम का प्रसिद्ध शिवालय का मंदिर था उसी शिवालय के मंदिर में चामुंडा माता का एक छोटा मंदिर था। उस मंदिर के आस पास श्मशान थे। श्मशान होने पर मूर्दो को वहां जलाया जाता था। एक दिन चामुंडा माता पुजारी के स्वपन में आई ओर कहा कि मुझे यहां मुर्दे जलने की दुर्गंध आती हैं तुम मुझे इस सामने वाली पहाड़ी पर स्थापित करवाओ।

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पुजारी ने कहा कि माता जी वहां मै मंदिर कैसे बना पाऊंगा, तो माता ने कहा कि तुम तो पहाड़ पर एक चुने की परात व एक जल के मटका लेकर चले जाना। इसके बाद पुजारी ने स्वपन के अनुसार ही किया ओर एक परात चूना व एक पानी के मटके से बना पश्चिम पर्वत पर चामुंडा माता का मंदिर बनकर तैयार हो गया था। जो आज जन जन की आस्था का केंद्र है। यहां बारह माह पूरे भारतवर्ष से अपनी कुलदेवी के दर्शनार्थ और जात जडूलो के लिये आते हैं।