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गणेशजी व गोपीनाथजी नहीं, श्रीमदन मोहन मंदिर है सबसे पुराना, आज भी अष्टधातु की मूर्ति की चमक बरकरार

सीकर के सबसे पहलेे मंदिर ( The Oldest Temple of Sikar ) की सबसे पुरानी मूर्ति है। जो 332 साल पहले सीकर की स्थापना के समय राव राजा दौलत सिंह सीकर लाए थे।

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सीकर

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Sachin Mathur

Sep 06, 2019

गणेशजी व गोपीनाथजी नहीं, श्रीमदन मोहन मंदिर है सबसे पुराना, आज भी अष्टधातु की मूर्ति की चमक बरकरार

गणेशजी व गोपीनाथजी नहीं, श्रीमदन मोहन मंदिर है सबसे पुराना, आज भी अष्टधातु की मूर्ति की चमक बरकरार

सचिन माथुर, सीकर.

यदि आपसे कोई सीकर शहर के सबसे पुराने मंदिर ( ( The Oldest Temple of Sikar ) ) के बारे में पूछे तो जहन में फतेहपुरी गेट स्थित गणेश, रघुनाथ या गोपीनाथ मंदिर की तस्वीर उभरती होगी। लेकिन, ऐसा है तो अब से उन तस्वीरों की जगह राधा- कृष्ण की इस मूरत को अपने मन मंदिर में बसा लीजिए। क्योंकि यही वह मूर्ति है, जो सीकर के सबसे पहलेे मंदिर की सबसे पुरानी मूर्ति है। जो 332 साल पहले सीकर की स्थापना के समय राव राजा दौलत सिंह ( Rao Raja Daulat Singh ) सीकर लाए थे। यहां सुभाष चौक गढ़ के साथ ही उन्होंने वर्तमान गोपीनाथ मंदिर के पास श्रीमदन मोहन मंदिर की नींव रखी थी। जिसमें यह मूर्तियां अब भी विराजमान है। राधा अष्टमी पर इतिहास के साथ राधा-कृष्ण की यह मूर्ति पहली बार प्रकाशित की जा रही है। जिसकी चमक इसके चमत्कारों की तरह कम नहीं हुई है।


गणेश व रघुनाथ मंदिर से 96 साल पुराना ( Ganesh & Raghunath Temple Sikar )
श्रीमदन मोहन मंदिर फतेहपुरी गेट स्थित विजय गणेश, रघुनाथ और गोपीनाथ मंदिर से भी पुराना है। इतिहासकार महावीर पुरोहित बताते हैं कि विजय गणेश और रघुनाथ मंदिर संवत 1840 और गोपीनाथ मंदिर संवत 1781 में बनाए गए थे। जबकि मदन मोहन मंदिर का निर्माण सीकर स्थापना के साथ 1744 में हो गया था। लिहाजा यह मूर्ति व मंदिर गोपीनाथ मंदिर से 37 और गणेश व रघुनाथ मंदिर से 96 साल पुराना है। मूर्तियों की चमक लगातार बरकरार है। बकौल पुरोहित मूर्ति मथुरा से लाई गई थी।

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नानी गांव की जागीर से चला खर्च
राव दौलत सिंह ने जब मंदिर को निर्माण कराया तो इस मंदिर के खर्च का मुद्दा भी उठा। इस पर राव राजा ने नानी गांव की जागीर इस मंदिर के नाम कर दी। जिससे होने वाली सारी आमदनी इस मंदिर के काम ली जाती रही। कहते हैं मंदिर के निर्माण के बाद राज्य विस्तार के साथ राज घराना समृद्ध होता चला गया।


8वीं पीढ़ी कर रही मंदिर की सेवा
मंदिर की स्थापना के साथ ही राव राजा ने पूजा- अर्चना का जिम्मा पाराशर परिवार को दे दिया गया था। तभी यह परिवार मंदिर की सार-संभाल में जुटा है। पुजारी सुरेश पाराशर ने बताया कि 8वीं पीढ़ी मंदिर की सेवा में जुटी है।

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सडक़ से ढाई फीट नीचे हुआ मंदिर

श्रीमदन मोहन मंदिर की प्राचीनता का अनुमान इसकी बनावट से भी होता है। मंदिर का आधा हिस्सा ऊंची होती गई सडक़ की वजह से करीब ढाई फीट नीचे हो गया है। जिसके एक हिस्से में प्राचीन शिव मंदिर भी है। पुननिर्माण के चलते भगवान राधा-कृष्ण की मूर्ति को ऊंचाई दे दी गई है।