
शेखावाटी में हाईब्रिड तरबूज की खेती ने जमाए पैर
गहराते भूजल और पानी के बढ़ते पीएच को शेखावाटी के किसान हाइटेक बन गए हैं। परम्परागत बीजों से महंगा होने के बावजूद अच्छा उत्पादन मिलने के कारण ही किसान ताइवान के हाइब्रीड बीज काम में ले रहे हैं। सीकर जिले में पिछले एक दशक में यहां के किसानों का रुझान ताइवानी तरबूज के प्रति बढ़ा है। बुवाई के समय मल्चिंग शीट, बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से कम पानी और कम समय में बेहतर उत्पादन हासिल कर खेती के साथ खुद की तकदीर संवार रहे हैं। सीकर जिले में इस समय हाइब्रिड ताइवानी बीज से तरबूज की फसल किसान हाइब्रिड बीज से तैयार करते हैं। नतीजन सीकर थोक मंडी में रोजाना दस टन से ज्यादा तरबूज आ रहे हैं। मंडी में तरबूज के थोक भाव 9 -13 रुपए प्रतिकिलो बोले जा रहे हैं। जबकि खुदरा में तरबूज के भाव 15 से 20 रुपए प्रतिकिलोग्राम तक है। उद्यानिकी अधिकारियों की माने तो इस समय जिले में ताइवानी तरबूज और पपीते का क्षेत्र एक हजार हैक्टेयर से अधिक है।
ज्यादा वजन टिकाऊ
किसान तरबूज का रोग कीट से सुरक्षित बीज काम में ले रहे हैं। जिसके कारण कम पानी व कम समय में तैयार होने वाला फल काफी वजनी होता है। कई बार तो तरबूज का वजन पांच से दस किलोग्राम तक पहुंच जाता है। ताइवानी बीज से तैयार फलों का छिलका मोटा और रंग चमकदार होता है। इस कारण पूर्व में परम्परागत तरीके से तैयार फलों को पेडों से तोडऩे के तीन दिन बाद ही बेचना जरूरी जाता था। लेकिन हाइब्रीड काफी दूरी तक परिवहन किया जा सकता है। टिकाऊ होने से ताइवानी तरबूज की मंडियों में विशेष मांग रहती है। यही कारण है कि प्रदेश की सभी मंडियों में ताइवानी तरबूज के दाम सामान्य तरबूज से अधिक रहते हैं।
इनका कहना है
सीकर मंडी क्षेत्र में रोजाना ताइवानी तरबूज के एक ट्रक तरबूज की खपत हो जाती है। परम्परागत तरबूज की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होने के कारण आस-पास की मंडियों के लोग भी ताइवानी तरबूज को तरजीह देते हैं।
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Published on:
18 Apr 2023 11:42 am
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