
पिछले चुनाव में 67 प्रत्याशियों से ज्यादा नोटा था जनता की पसंद
विधानसभा चुनाव में अब सबकी निगाहें चुनाव परिणाम पर टिकी हुई है। हर किसी की नजर प्रत्याशियों की हार-जीत के साथ उन्हें मिलने वाले मतों पर है। इस बीच पिछले विधानसभा चुनाव का नोटा (कोई उम्मीदवार पसंद नहीं) से जुड़ा रोचक आंकड़ा सामने आया है। जिसमें सीकर जिले की आठों विधानसभाओं में 67 प्रत्याशियों से ज्यादा नोटा को मत मिलना सामने आया है। यहां छह सीटों पर नोटा को मिले मत चौथे या पांचवे स्थान पर रहे।
इनसे आगे रहा नोटा
2018 के विधानसभा चुनाव में फतेहपुर में 12 प्रत्याशी मैदान में थे। यहां नोटा को सात मतदाताओं से ज्यादा मत मिले। इसी तरह लक्ष्मणगढ़ में नोटा 15 में से 10, धोद में 11 में से सात, सीकर में 13 में से नौ, दांतारामगढ़ में 17 में से आठ, खंडेला में 15 में से 10, नीमकाथाना में 19 में से 10 और श्रीमाधोपुर में 12 प्रत्याशियों में से सात प्रत्याशियों से आगे रहा।
नोटा को कहां कितने मत मिले
पिछले विधानसभा चुनाव में नोटा का विकल्प सबसे ज्यादा खंडेला में चुना गया। यहां 2306 मतदाताओं ने नोटा को चुना। इसके बाद सीकर में 2031, श्रीमाधोपुर में 1796, धोद में 1775, लक्ष्मणगढ़ में 1225, दांतारामगढ़ में 1188, फतेहपुर में 1157 तथा नीमकाथाना में सबसे कम 861 मतदाताओं ने नोटा का चयन किया था।
2013 के चुनाव से लागू हुआ नोटा
भारतीय चुनाव के इतिहास में निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनावों में नोटा का विकल्प ईवीएम में उपलब्ध कराया था। इससे पहले चुनाव आयोग ने 2009 में सुप्रीम कोर्ट से नोटा का विकल्प उपलब्ध कराने की मंशा जताई थी। इसके बाद नागरिक अधिकार संगठन पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने नोटा के समर्थन में जनहित याचिका पेश की। जिस पर कोर्ट ने 2013 में मतदाताओं को चुनाव में नोटा का विकल्प देने का फैसला किया था। चुनावी मैदान में उतरा कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं होने पर मतदाता इस बटन को दबा सकता है। जिसकी गणना मतगणना के समय होती है।
Published on:
01 Dec 2023 11:00 am
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