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Video: पंचकर्म में बढ़ा विश्वास, कम पड़ रहा स्पेस और स्टाफ

सीकर. पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के प्रति आमजन का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। इसकी बानगी राजेंद्र अस्पताल में देखी जा सकती है।

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सीकर

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Sachin Mathur

Aug 10, 2023

Video: पंचकर्म में बढ़ा विश्वास, कम पड़ रहा स्पेस और स्टाफ

Video: पंचकर्म में बढ़ा विश्वास, कम पड़ रहा स्पेस और स्टाफ

सीकर. पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के प्रति आमजन का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। इसकी बानगी राजेंद्र अस्पताल में देखी जा सकती है। जहां मरीजों की बढ़ती संख्या के सामने स्पेस और स्टाफ भी कम पडऩे लगा है। आलम ये है कि उपचार नहीं मिलने पर पांच से 10 मरीजों को तो रोजाना निराश लौटना पड़ रहा है। ऐसे में केंद्र में स्टाफ व सुविधा बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है।

केंद्र खुलने से पहले लगती है कतार, 35 मरीजों का उपचार
अस्पताल में पंचकर्म केंद्र सुबह आठ बजे खुलता है। जिसके लिए मरीज सुबह साढ़े सात बजे से कतार में लग जाते हैं। प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि केंद्र में तीन स्थाई नर्सिंगकर्मी सहित कुल छह कर्मचारियों का स्टाफ है। जो एक दिन में अधिकतम 35 मरीजों को ही सेवा दे पाते हैं। ऐसे में बाकी मरीजों को बेमन से वापस लौटाना पड़ता है।

साइटिका, माइग्रेन व अर्थराइटिस का उपचार, डायरी में लिख रहे अनुभव
पंचकर्म चिकित्सा केंद्र में साइटिका, माइग्रेन व अर्थराइटिस सरीखी पीड़ादायक बीमारी का भी सफल उपचार हो रहा है। आमजन से लेकर अफसर तक इसका लाभ ले रहे हैं। जो उपचार के बाद अपने अनुभव भी एक डायरी में लिखकर जाते हैं।

पिता की बीमारी से मिली प्रेरणा, भामाशाह कर रहे सहयोग
प्रभारी चौधरी ने बताया कि पंचकर्म की शुरुआत उन्होंने सन 2000 में की थी। जिसकी प्रेरणा उन्हें पंचकर्म से पिता की साइटिका की बीमारी ठीक होने पर मिली। उन्होंने बताया कि हर जगह उपचार पर भी पिता का उपचार नहीं हुआ तो माधव सागर तालाब पर पंचकर्म विशेषज्ञ बाबूलाल ने उन्हें बिल्कुल ठीक कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने भामाशाहों के सहयोग से पंचकर्म चिकित्सा सेवा को एक मिशन के रूप में शुरू किया। 2012 के बाद सरकार से भी इसमें योगदान मिलना शुरू हो गया। बकौल चौधरी अब भी शहर के कई भामाशाह केंद्र में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं।