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अजब जुड़वां भाइयों का गजब संजोग, एक बीमार तो दूसरे को भी चाहिए दवा, इनकी अन्य समानताएं जानकार तो चौंक जाओगे आप

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जोगेंद्र सिंह गौड़
सीकर. राम और श्याम, सीता और गीता सहित सलमान खान की जुड़वा फिल्म ने भले ही परदे पर धमाल मचाया हो। लेकिन, सीकर जिले के कूदन गांव में भी जुड़वा भाइयों की एक ऐसी जोड़ी है। जिसने हकीकत में पूरे गांव में धूम मचा रखी है। यह कुदरत का कोई अनूठा खेल ही है कि दोनों की शक्ल सूरत एक जैसी होने के साथ-साथ दोनों के दिमाग भी एक जैसे ही चलते हैं। बानगी यह है कि दोनों भाइयों के स्कूल प्रवेश से लेकर इंजीनियरिंग तक की पढ़ाई में करीब-करीब समान अंक आ रहे हैं।

गांव वालों को और ज्यादा आश्चर्य तब हुआ। जब दोनों जुड़वा भाइयों का आईआईटी में एक साथ चयन हुआ और इसका कॉल लेटर भी एक ही दिन घर आने के कारण दोनों के हाथ में एक साथ पहुंंचा। जी हां, ये दोनों जुड़वा भाई है अमित और सुमित जो कि, संजोग से बीमार भी एक साथ ही होते हैं। दोनों का जन्म एक साथ हुआ।

एक साथ स्कूल में दाखिला लिया। लेकिन, गजब तब होने लगा जब बाकी कक्षाओं के अलावा 8वीं व 10वीं की बोर्ड परीक्षा में करीब 68 व 74 फीसदी समान अंक आए हैं। जबकि 12वीं व इंजिनियरिंग में दोनों के 70 या 80 फीसदी से ऊपर अंक मिले हैं। आईआईटी में चयन होने का कॉल लेटर भी दो जून को जरिए डाक एक साथ घर आया।

हालांकि दोनों भाइयों को आईआईटी में चयन होने की खुशी तो है। लेकिन, अफसोस इस बात का भी है कि जन्म से लेकर अब तक 22 साल साथ रहे। पढ़ाई-लिखाई की और कभी एक दूसरे से दूर नहीं हुए। परंतु आगे की पढ़ाई के लिए अब उन्हें बिछुडऩा होगा और एक दूसरे का साथ छोडऩा होगा। क्योंकि इनमें अमित को आईआईटी खातिर धनबाद (झारखंड) जाना होगा और सुमित को इसके लिए आईआईटी हिमाचल(यूपी) में रहकर आगे की पढ़ाई करनी होगी।

पिता सरकारी शिक्षक, मां गृहिणी
जुड़वां भाइयों के पिता बीरबल भढ़ासरा सरकारी शिक्षक हैं और मंजू देवी गृहिणी है। इनका कहना है कि ऐसे मौके कई बार आए हैं, जब अमित ने गलती की और शक्ल एक जैसी होने पर सुमित को डांट खानी पड़ी है।

एक जैसे शौक
संजोग से दोनों भाइयों के शौक भी बचपन से एक जैसे रहे हैं। जिनमें क्रिकेट, शतरंज, कुकिंग करना और एक जैसे नॉवल पढऩा शामिल हैं। ऐसा भी होता है जिस दिन एक भाई बीमार हो जाता है तो शाम होते-होते दूसरे भाई को भी दवाइयों की जरूरत पड़ जाती है। हालांकि इस मामले में इनका इलाज करने वाले कई चिकित्सकों का मानना है कि संजोग के साथ कई बार एक जैसी सोच होने के कारण भी थकान और सुस्ती एक साथ आ जाती है।