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1971 भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटाने वाला सेना का T-55 टैंक अब बढ़ाएगा शेखावाटी की शान

रूस में निर्मित एवं 1966 में भारतीय सेना ( Indian Army ) का गौरव बने टी-55 युद्धक टैंक ( T-55 Battle Tank ) अब शिक्षा नगरी की शान बनने जा रहा है। हाल ही में यह टैंक किरकी वार सेमेट्री, खडक़ी पुणे से पालवास रोड स्थित प्रिंस एकेडमी पहुंचा।

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सीकर

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Naveen Parmuwal

Feb 15, 2020

भारतीय सेना का टी-55 टैंक बढ़ाएगा शेखावाटी की शान, 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को चुटाई थी धूल

भारतीय सेना का टी-55 टैंक बढ़ाएगा शेखावाटी की शान, 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को चुटाई थी धूल

सीकर.

रूस में निर्मित एवं 1966 में भारतीय सेना ( Indian Army ) का गौरव बने टी-55 युद्धक टैंक ( T-55 Battle Tank ) अब शिक्षा नगरी की शान बनने जा रहा है। हाल ही में यह टैंक किरकी वार सेमेट्री, खडक़ी पुणे से पालवास रोड स्थित प्रिंस एकेडमी पहुंचा। युवावर्ग को राष्ट्रप्रेम एवं सेना के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से भारतीय सेना ने यह टैंक प्रिंस एजुकेशन हब को सौंपा है। संस्था निदेशक जोगेंद्र सुंडा के अनुसार देश के जांबाज शहीदों की स्मृति में इस टी-55 युद्धक टैंंक को एक माह में जयपुर-बीकानेर बाइपास रोड स्थित प्रिंस एकेडमी कैम्पस के प्रवेश द्वार पर स्थापित किया जाएगा।

इसके बाद निर्धारित समय पर आमजन भी इसका अवलोकन सकेंगे। प्रिंस एजुकेशन हब के चेयरमैन डा. पीयूष सुंडा, भारतीय सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर एवं प्रिंस एनडीए एकेडमी के प्रबंध निदेशक बीबी जानू, मुख्य प्रबंध निदेशक राजेश ढिल्लन सहित विभिन्न गणमान्यजनों ने टैंक के सीकर आने पर खुशी व्यक्त की।

ये है महत्व
इस 36 टन वजनी टी-55 टैंक में चार क्रू मेंबर बैठते हैं। दुश्मन पर बम्पर गोलाबारी के साथ-साथ ही इसमें एंटी एयरक्राफ्ट गन भी लगी है। यह टैंक 14 किमी. दूर स्थित शत्रु सेना को भी तबाह करने की क्षमता रखता है। पाकिस्तान के साथ हुए 1971 के युद्ध में नैनाकोट, बसंतर एवं गरीबपुर की लड़ाई में इस टैंक ने पाकिस्तानी सेना को करारी शिकस्त दी थी।