16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आतंकी हमले के बाद राजस्थान में यहां सामने आई चौंका देने वाली हकीकत, जोखिम में जान

देश में बढ़ रही आतंकी घटनाओं के बीच सीकर में सुरक्षा का घेरा कमजोर है। यहां सार्वजनिक स्थल रेलवे स्टेशन, बस डिपो से लेकर प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा के लिए पुलिस की ओर से कई बार योजनाएं बनाई गई। लेकिन इन योजनाओं ने कागजों में ही दम तोड़ दिया।

2 min read
Google source verification
देश में बढ़ रही आतंकी घटनाओं के बीच सीकर में सुरक्षा का घेरा कमजोर है। यहां सार्वजनिक स्थल रेलवे स्टेशन, बस डिपो से लेकर प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा के लिए पुलिस की ओर से कई बार योजनाएं बनाई गई। लेकिन इन योजनाओं ने कागजों में ही दम तोड़ दिया।

आतंकी हमले के बाद राजस्थान में यहां सामने आई चौंका देने वाली हकीकत, जोखिम में जान

सीकर.

देश में बढ़ रही आतंकी घटनाओं के बीच सीकर में सुरक्षा का घेरा कमजोर है। यहां सार्वजनिक स्थल रेलवे स्टेशन, बस डिपो से लेकर प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा के लिए पुलिस की ओर से कई बार योजनाएं बनाई गई। लेकिन इन योजनाओं ने कागजों में ही दम तोड़ दिया। राज्य सरकार की ओर से अभयकमांड सेंटर बनाकर चार सौ अधिक कैमरे लगाने की योजना भी अभी सिरे नहीं चढ़ पाई है। शहर के प्रमुख स्थानों पर कैमरे लगा तो दिए गए, लेकिन एक भी कैमरा चालू नहीं होने के कारण बड़ी वारदात होने पर पुलिस को इसका सहयोग नहीं मिल सकता। विधायक कोटे से सिल्वर जुबली रोड पर लगे कैमरों की स्थिति भी कमजोर है। समय पर जांच नहीं होने के कारण आधे कैमरे हर समय बंद रहते हैं। पुलिस भी वारदात के बाद ही इन्हें फुटेज के लिए खंगालती है। फुटेज नहीं मिलने पर इनकी समीक्षा की जाती है। लेकिन बाद में वहीं ढाक के तीन पात।


मॉक ड्रिल में सफल, हकीकत में कमजोर
सीकर पुलिस ने इसी माह शहर के रोडवेज बस डिपो में दो आतंकियों को गिरफ्तार करने के लिए मॉक ड्रिल किया गया। आंतरिक सुरक्षा को मापने के लिए किए इस अभ्यास को पूरी तरह सफल माना गया, लेकिन वर्तमान में रोडवेज बस डिपो की सुरक्षा पर नजर डाली जाए तो यहां पर सीसीटीवी तक नहीं लगा है। यहां आने वाले यात्रियों की किसी तरह की जांच रखने की व्यवस्था नहीं है। कई बार बसों में वारदात होने पर यात्री फुटेज के लिए चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन कैमरे नहीं होने से आरोपित का फुटेज नहीं मिल पाता।


चारों तरफ से खुला, नहीं है कोई रोक टोक
सीकर का रेलवे स्टेशन सुरक्षा के मामले में बेहद कमजोर स्थिति में हैं। यहां पर सुरक्षा का किसी तरह का इंतजाम नहीं है। रेलवे स्टेशन पर आने के चारों तरफ से रास्ते हैं। ऐसे में यात्री कम और क्षेत्र के लोग आवागमन ज्यादा करते हैं। सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने के कारण करीब तीन हजार लोग प्रतिदिन पटरी पार करते हैं। जबकि इससे ज्यादा सुरक्षा की स्थिति मीटरगेज के दौरान थी। उस दौरान स्टेशन पर यात्रियों की जांच के लिए डीएफएमडी भी लगाए गए थे। सूत्रों का कहना है कि ब्रॉडगेज के काम के दौरान उन्हें कबाड़ में डाल दिया गया।
जीआरपी थाना भी यहां यात्रियों की पहुंच में नहीं है। थाना कॉलोनी में बना होने के कारण वारदात का शिकार होने पर यात्री वहां पहुंच ही नहीं सकते।


धर्म स्थलों की सुरक्षा के दावे दफन
पुलिस ने सीकर शहर के धर्मस्थलों की सुरक्षा मजबूत करने की चार वर्ष पहले कार्य योजना तैयार की थी। योजना के तहत धर्मस्थलों के प्रमुखों की शहर कोतवाली में बैठक बुलाकर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। धर्मस्थलों के संचालकों ने भी पुलिस के इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए सहयोग करने का आश्वासन दिया था।
दो प्रमुख मंदिरों में कैमरे भी लगाए गए, लेकिन बाद में योजना ठंडे बस्ते में चली गई। मॉनिटरिंग के अभाव में धर्मस्थलों के संचालकों ने भी गंभीरता नहीं दिखाई।

इनका कहना है...
अभय कमांड योजना के तहत शहर में चार सौ से अधिक कै मरे लगाए गए हैं। कै मरे अभी शुरू नहीं हो पाए हैं। उन्हें इंस्टॉल करने का कार्य चल रहा है। इनके शुरू होते ही शहर के प्रमुख मार्ग सीसीटीवी की नजर में हो जाएंगे। शहर की सुरक्षा कड़ी करने का पुलिस हमेशा प्रयास करती है। जनता को भी इस मामले में जागरूक होना चाहिए। -डा. तेजपाल सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक, सीकर