
सीकर.
इन दिनों आईपीएल 2018 का जादू हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है। पूरा देश IPL के रंगों में रंगा हुआ है। मैच दर मैच रोमांच भी बढ़ता जा रहा है। साथ ही बढ़ती जा रही है सटोरियों और बुकी की व्यस्तता।
राजस्थान में खासकर शेखावाटी के सटोरियों की। इन सटोरियों के तगड़े सम्पर्क हैं। ये अपनी खास जगहों पर बैठे-बैठे ही आईपीएल के मैचों में अरबों रुपए दांव पर लगवा रहे हैं। यहां के सटोरियों का आईपीएल के मैच फिक्सिंग तक में नाम आ चुका है।
आईपीएल 2018 के रोमांच के दौरान हम आपको बता रहे हैं कि सट्टा बाजार की कुछ अंदरुनी बातें, जो शायद ही आपको पता हो।
आईपीएल 2018 के मैदान में जहां खिलाड़ी मैच खेलते हैं, वहीं शेखावाटी के सटोरियेे भी पुलिस के साथ 20-20 मैच खेलने से नहीं चूक रहे हैं। यहीं वजह है कि शेखावाटी में हाइटेक सटोरियों के आगे पुलिस बेबस नजर आ रही है। पिछले तीन साल में शेखावाटी के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिले की पुलिस ने सटोरियों के बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया है।
सटोरिये अब बंद कारों से लेकर दूरदराज इलाकों में ढाणियों में बैठकर क्रिकेट मैच पर सट्टे के भावों को बातते हैं। ऐसे सटोरिये सैकड़ों में हैं, मगर पिछले दो साल में कार्रवाई पर महज दो से तीन के खिलाफ हुई।
IPL से वर्ल्ड कप तक फैला है जाल
सीकर सहित चूरू जिले के सटोरियों का नेटवर्क आईपीएल से लेकर किक्रेट वल्र्डकप के हर मैच में भावों का नेटवर्क फैला है। आईपीएल 2013 मैच फिक्सिंग मुम्बई में भी शेखावाटी के सटोरियों का नाम सामने आया था। इसके बाद मुम्बई की पुलिस ने कई जगह दबिश भी दी थी। शेखावाटी से दो जनों को पुलिस गिरफ्तार भी करके लेकर गई थी। इसके अलावा सीकर पुलिस ने जेल में चल रहे क्रिकेट सट्टे पर भी कार्रवाई कर लाखों के हिसाब-किताब की डायरी जब्त की थी।
हर बुकी का रहता है अपना नाम
क्रिकेट सट्टे में बड़े बुकी अपने नाम की बजाय छोटे नाम से ज्यादा चर्चा में रहते है। जिसमें प्रचलित नामों में भास्कर सीकर, बालाजी सीकर जैसे छोटे नामों पर है। क्रिकेट में शहर के सभी बुकी को एक जगह से भाव मिलते हैं। मैच के दौरान हर गेंद व रन पर भाव बदलते हंै। बुकी के पास लगाए गए स्पीकर पर मुख्य बुकी भाव देता है, जो माइक के जरिए सब तक पहुंच जाते है।
पुलिस के मुखबिर तंत्र पर भी उठे सवाल
जिले में आईपीएल 2018 पर चल रहे क्रिकेट सट्टे पर खानापूर्ति की कार्रवाई ने सीकर पुलिस के मुखबिर तंत्र को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस की ओर से थानास्तर पर बीट प्रणाली बनाई गई है। बीट प्रणाली के तहत एक कांस्टेबल को बीट में लगाया जाता है। बीट कांस्टेबल अपने क्षेत्र में हर प्रकार की गतिविधियों पर भी नजर रखता है। ऐसे में सटोरियों के खिलाफ कम कार्रवाई ने प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
Updated on:
13 Apr 2018 08:48 pm
Published on:
13 Apr 2018 08:44 pm
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