
सीकर. जिले में वन विभाग की ओर से सातों रेंज में वाटर होल पद्धति से कराई गई वन्यजीव गणना के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल हुई वन्यजीव गणना में 17,953 वन्यजीव दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में करीब 1,000 अधिक हैं। पिछले साल की तुलना में छह बघेरे बढ़ गए है जबकि पिछले एक साल के दौरान जिले में अलग-अलग स्थानों से 11 बघेरों को आबादी क्षेत्र से रेस्क्यू करके वन्य जीव अभ्यारणय में छोड़ दिया गया।
खास बात यह है कि नीमकाथाना क्षेत्र में पैंथर (बघेरे) और सांभर की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है, पहले जहां जिले में 13 बघेरे मिले थे उनकी संख्या अब बढ़कर 19 पहुंच गई है। वहीं चिंकारा, जंगली सूअर, नीलगाय, भेडिए, जंगली बिल्ली सहित कई वन्य जीवों की संख्या बढ़ गई है।
वन विभाग के अनुसार जंगल के इको-सिस्टम के मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं वन्य जीव गणना लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर, सीकर, दांतारामगढ़, श्रीमाधोपुर, नीमकाथाना और पाटन क्षेत्रों में की गई। पूरे जिले में करीब 40 श्रेणियों में वन्यजीवों का आकलन किया गया।
बघेरे (पैंथर): 19
गीदड़: 575
जरख: 39
जंगली बिल्ली: 98
लोमड़ी: 127
भेड़िया: 16
बज्जू: 36
सांभर: 12
नीलगाय: 3,187
चिंकारा: 1,426
सेही: 118
मोर: 4,986
जंगली सूअर: 16
लंगूर: 7,440
कुल वन्यजीव: 17,953
इस बार बघेरों (पैंथर) की संख्या 13 से बढ़कर 19 होना सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। नीमकाथाना, पाटन, खंडेला और शाकंभरी क्षेत्रों में इनकी गतिविधियां ज्यादा दर्ज की गई हैं। गणना के लिए जिले की सातों रेंज में वाटर होल पद्धति अपनाई गई, जिसमें जल स्रोतों पर वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की गई। इससे सटीक और वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।
बदले मौसम से पड़ा प्रभाव
जिले में 80 प्रतिशत घना वनक्षेत्र नीमकाथाना व पाटन रेंज के अधीन है। वन्य जीव गणना के दौरान बारिश संग अंधड के कारण आस-पास के इलाके के कई वाटरहोल में पानी भर गया था। जिससे कई वन्य जीव विभाग की ओर से तय किए वाटर होल तक नहीं पहुंचे जिससे गणना के सटीक परिणाम पर संशय है। गौरतलब है कि जिले में शुक्रवार शाम पांच बजे से जिले के 86 वाटरहोल पर वन्यजीव गणना शुरू की गई थी।
वन्य जीव गणना पूरी हो गई है। वन्य जीव प्रेमियों के संरक्षण और विभाग के प्रबंधन के कारण गणना के दौरान पिछले साल की तुलना में एक हजार वन्य जीव बढ़े हैं। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या जंगल के बेहतर होते पर्यावरण और संतुलित इको-सिस्टम का संकेत है।
सौरभ कुमार, एसीएफ सीकर
Updated on:
06 May 2026 05:53 pm
Published on:
06 May 2026 11:34 am
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