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खाटूश्यामजी में 150 Km पैदल चलकर पहुंचे 10 हजार श्रद्धालुओं ने चढ़ाया सूरजगढ़ का 371 वां निशान

श्री श्याम दरबार सूरजगढ़ का 371 वां निशान श्याम बाबा के लक्खी मेले पर आज अपनी हाजिरी लगाने खाटूधाम पहुंचा है।

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श्री श्याम दरबार सूरजगढ़ का 371 वां निशान श्याम बाबा के लक्खी मेले पर आज अपनी हाजिरी लगाने खाटूधाम पहुंचा है।

खाटूश्यामजी में 150 पैदल चलकर पहुंचे 10 हजार श्रद्धालुओं ने चढ़ाया सूरजगढ़ का 371 वां निशान

सीकर।
श्री श्याम दरबार सूरजगढ़ का 371 वां निशान श्याम बाबा के लक्खी मेले पर आज अपनी हाजिरी लगाने खाटूधाम पहुंचा है। श्याम मंदिर के शिखर पर फहराने वाली सूरजगढ़ की ध्वजा भी चढ़ा दी गई। 371 साल की इस परंपरा को सूरजगढ़ से पैदल जोत लेकर आए श्रद्धालुओं ने हमेशा की तरह यह परंपरा ठीक सवा ग्यारह बजे निभाई। इस दौरान श्याम मंदिर बाबा श्याम के जयकारों से गूंज उठा। ध्वज चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दर्शन कर ध्वज परंपरा का आगे भी निभते होते रहने की मनौती मांगी और इसके बाद वापस पैदल ही रवाना हो गए। बतादें कि खाटूश्यामजी के मेले में हर साल यूं तो लाखों निशान चढ़ते हैं। लेकिन, इन सारे निशानों में से सिर्फ सूरजगढ़ का निशान ही हर साल खाटूश्यामजी के मंदिर के शिखर पर सालभर लहराता है। झुंझुनू जिले के सूरजगढ़ शहर के इस निशान को लेकर करीब दस हजार श्रद्धालु हर साल चार दिन की पदयात्रा कर मेले में पहुंचते हैं। पदयात्राा में काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल होती है। जो सिर पर सिगड़ी में जोत लिए गीत गाती हुई चलती है। मान्यता है कि जो महिला अपने सिर पर सिगड़ी रखकर यात्रा करती है, उसकी हर मनौती बाबा श्याम पूरी करते हैं। सूरजगढ़ की इस निशान यात्रा के पीछे एक दंतकथा भी है। जिसके मुताबिक सीकर जिले के खण्डेला कस्बे के एक भक्त की बाबा श्याम में गहरी आस्था था। वह हर साल मेले में खण्डेला से खाटूधाम निशान लेकर जाया करता था। उस श्याम भक्त ने एक बार अन्य श्याम भक्तों को बताया कि बाबा श्याम उसके सपने में आए और खण्डेला की बजाय सूरजगढ़ से निशान चढ़ाने की बात कही है। इसके बाद से ही सूरजगढ़ से निशान लाने की यह परंपरा 370 साल पहले शुरू हुई।

जानिए क्यो चढ़ता है सूरजगढ़ का निशान

khatu mela : 370 साल से खाटूश्यामजी के शिखर पर लहराता है सिर्फ सूरजगढ़ का निशान, सिर पर जोत लेकर महिलाएं पहुंचती है खाटूधाम