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पैरों में लौटी ताकत: जटिल स्पाइन सर्जरी के बाद मिला महिला को नया जीवन

सीकर. मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद कल्याण अस्पताल का आर्थोपेडिक विभाग में अब मेट्रो सिटी की तर्ज पर सर्जरी होने लगी है। अस्पताल की ओपीडी में दिखाने आई पैरों के लकवे की शिकार कासरड़ा निवासी प्रेमदेवी की रीढ़ की हड्डी की जटिल मंगलवार को जटिल सर्जरी की गई।

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सीकर. मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद कल्याण अस्पताल का आर्थोपेडिक विभाग में अब मेट्रो सिटी की तर्ज पर सर्जरी होने लगी है। अस्पताल की ओपीडी में दिखाने आई पैरों के लकवे की शिकार कासरड़ा निवासी प्रेमदेवी की रीढ़ की हड्डी की जटिल मंगलवार को जटिल सर्जरी की गई। आमतौर पर निजी अस्पतालों में दो से तीन लाख रुपए में होने वाली सर्जरी कल्याण अस्पताल में निशुल्क की गई। सर्जरी साढ़े पांच घंटे तक चली। अच्छी बात है कि सर्जरी के बाद महिला पूरी तरह से ठीक है। चिकित्सकों का दावा है कि दस-पन्द्रह दिन में महिला की दिनचर्या सामान्य हो जाएगी। महिला के परिजनों ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण निजी अस्पताल में इलाज संभव नहीं था। सरकारी अस्पताल में समय पर इलाज मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। सर्जरी डाॅ. केके अग्रवाल, डॉ. महेन्द्र स्वामी, डॉ. प्रमोद सुंडा, डॉ. महेन्द्र डूकिया की टीम ने की। ऑपरेशन के दौरान बतौर सहयोगी एनेस्थेटिक डॉ. सरोज, डॉ. प्रियंका, नर्सिंग स्टॉफ शुभकरण जाखड़, राकेश शामिल रहे।

रीढ़ की हड़डी में दब गई थी नसें

चिकित्सकों के अनुसार कासरड़ा निवासी प्रेमदेवी की रीढ़ की हड्डी में नसें दब गई थी। जिससे मरीज की पैरों में धीरे-धीरे सुन्नपन्न के बाद नसों पर दवाब ज्यादा हो गया और कमर के नीचे हिस्से में लकवा मार गया। जिससे महिला चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गई। इस पर परिजनों ने सोमवार को महिला को आर्थो ओपीडी में दिखाया। जहां डॉ. महेन्द्र स्वामी ने एमआरआई जांच की। जिसमें रीढ़ की हड़डी में नसों के दबने की पुष्टि हुई। इस पर चिकित्सकों की टीम ने फौरन महिला की इमरजेंसी सर्जरी का प्लान किया। इसके बाद टीम ने जटिल सर्जरी कर रीढ़ की हड्डी पर पड़े दबाव को हटाया। ऑपरेशन के बाद महिला के पैरों में धीरे-धीरे संवेदना लौटने लगी है। फिलहाल उसे निगरानी में वार्ड में शिफ्ट किया गया है।

इनका कहना है

कल्याण अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग में सुविधाएं बढ़ने से अब जटिल सर्जरी होने लगी है। जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों में लाखों रुपए खर्च करने से काफी हद तक निजात मिल गई है।

डॉ. कमल कुमार अग्रवाल, अधीक्षक कल्याण अस्पताल