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राजस्थान विलय के समय सीकर के राजा ने भेजे थे सोने के सिंहासन, चर्चा में रहा शेखावाटी

सीकर. रंग-रंगीले राजस्थान के एकीकरण के दौर में भी सीकर चर्चाओं में रहा।

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सीकर

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Ajay Sharma

Mar 30, 2022

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सीकर. रंग-रंगीले राजस्थान के एकीकरण के दौर में भी सीकर चर्चाओं में रहा। 30 मार्च 1949 को वृहत्त राजस्थान की जयपुर के सिटी पैलेस में सरदार पटेल की मौजूदगी में बैठक होना तय हुआ। इस दौरान राजस्थान के रजवाड़ों ने तय किया कि सरदार पटेल के लिए सोने के सिंहासन का इंतजाम किया जाए। इस दौरान जयपुर रियासत में एक जैसे दो रत्न जाडि़त सोने के सिंहासन नहीं मिले। इतिहासकार महावीर पुरोहित ने पत्रिका को बताया कि इस दौरान सीकर के राजा को सिंहासनों का इंतजाम कराने का जिम्मा दिया गया। उन्होंने एक दिन पहले ही दो सोने के सिंहासन जयपुर भिजवा दिए। जयपुर के सिटी पैलेस में सजे दरबार में यह सिंहासन लगाए गए। इनमें से एक सिंहासन पर सरदार पटेल तो दूसरे पर सवाई मानसिंह विराजे थे। अगले दिन जयपुर राजपरिवार ने दोनों सिंहासनों को सीकर भिजवाया था। एकीकरण के दौर में हुई बैठकों में सीकर व खेतड़ी रियासत का दखल रहा था।

राजस्थान की माटी को हमारा जुनून भी दिला रहा पहचान...

शिक्षा: 1925 से हम शिक्षा में आगे, अब भी सिरमौर
इतिहासकार अरविन्द भास्कर ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि 1925 के दौर में राजस्थान में स्कूलों का ही काफी अभाव था। इस दौर में सीकर व झुंझुनूं जिले के कस्बे शिक्षा में लगातार कदमताल कर रहे थे। बगड़, फतेहपुर, रामगढ़-शेखावाटी व नवलगढ़ आदि कस्बों में अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे। इसके बाद कॉलेजों की संख्या भी यहां सबसे ज्यादा बढ़ी। इस वजह से महिलाओं में उच्च शिक्षा का प्रतिशत काफी बढ़ा है। वर्तमान में इंजीनियरिंग व मेडिकल के साथ बेहतर स्कूलिंग की वजह से पूरे राजस्थान के विद्यार्थी यहां पढ़ाई करने आ रहे है। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं में यहां के युवाओं का सफलता का प्रतिशत सबसे ज्यादा है।


सेना: हर युद्ध में हमारे जवानों ने लगाया वीरता का विजय तिलक

युद्ध चाहे कोई भी हमारे सेना के जवानों ने हमेशा देश के माथे पर विजय का तिलक लगवाया है। करगिल युद्ध के दौर सबसे ज्यादा शहीद शेखावाटी की माटी से हुए। इसके बाद भी यहां के युवा सेना में जाने में सबसे आगे है। अब सरकार ने यहां की माटी में ही उत्तरी भारत की पहली सैन्य अकादमी बनाने की कदमताल की है। ऐसे में अब सेना की अफसरी में भी हमारा कद बढऩा तय है।

ट्यूरिज्म: लगातार बढ़ रहे पर्यटक, अब रंगीन पर्दे पर चमक
शेखावाटी के ट्यूरिज्म सेक्टर की राजस्थान की संस्कृति में अपनी अलग पहचान है। मंडावा व फतेहपुर की हवेलियों को देखने के लिए दुनियाभर के पर्यटक यहां आते है। फिल्मों की शूटिंग के लिए हमारी हवेलियां सहित अन्य स्थान पसंद आ रहे है। भविष्य में हर्ष पर्वत पर रोपवे की स्थापना से पर्यटन सेक्टर को और बूम मिलेगा। इससे राजस्थान की धाक देश-दुनिया में मजबूत होगी।


रोजगार: दुनियाभर में हमारे उद्योगपति, अब यहां भी खुलेंगी राहें

शेखावाटी की धरती ने देश-दुनिया को कई उद्योगपति दिए है। देश की अर्थव्यवस्था में हमारे उद्योगपतियों का काफी योगदान है। शेखावाटी में पिछले सात साल में रोजगार की नई राहें भी खुलने लगी है। शेखावाटी के इन उद्योगपतियों की वजह से राजस्थान की भी पहचान है।