
वल्दियत मतलब पिता का नाम, हमशीरा यानी बहन, जानिए ऐसे ही कुछ अनसुने शब्दों का राज
नरेंद्र शर्मा
सीकर. चांदा...वल्दियत...हमशीरा। ये अजीब से नाम भले ही हमारी बोलचाल की भाषा में शामिल न हो, लेकिन आज आज भी ये सरकारी फाइलों में हमसे गहरे जुड़े हैं। चांदा यानि सीमा चिह्न, वल्दियत पिता का नाम तथा हमशीरा यानि बहन। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान जो शब्द शासन में स्थापित हो गए, वे आज भी हमारे इर्द-गिर्द हैं। इनमें कई शब्द उर्दू के हैं, तो कई उर्दू-फारसी मिश्रित। हालांकि कुछ शब्द आम बोलचाल में बखूबी उपयोग होने लगे, लेकिन इनमें अधिकांश शब्द बोलचाल की भाषा में खत्म हो चुके हैं। खसरा, रकबा व कुर्की जैसे शब्द तो समझ आते हैं, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में हमारी जमीनों, खेतों के लिए इस्तेमाल होने वाले कई शब्द बेहद कठिन है। मसलन, दिशाओं को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में फारसी शब्दों का उपयोग किया गया। पूर्व दिशा को शर्क, पश्चिम को गर्व, दक्षिण को जनूब तथा उत्तर के लिए शुमाल शब्द का उपयोग किया है।
इसी तरह बारानी भूमि यानि बारिश पर निर्भर भूमि, जिस भूमि की सिंचाई बारिश के पानी से होती हो, बारानी भूमि कहलाती है, लेकिन नहरी, चाही नहरी, चाही, चाही मुस्तार, आबी शब्द अजीबोगरीब हंै। इनके अर्थ भी रोचक हैं-नहरी-नहर के पानी से सिंचित भूमि, चाही नहरी-नहर व कुएं द्वारा सिंचित भूमि, चाही- केवल कुएं द्वारा सिंचित भूमि, चाही मुस्तार यानि खरीदे हुए पानी द्वारा सिंचित भूमि तथा आबी यानि नहर व कुएं के अलावा अन्य साधनों से सिंचित भूमि।
...और भी है रोचक लेकिन जटिल शब्द
बंजर जदीद, बंजर कदीम, गैर मुमकीन, नौतौड और क्लर शब्द बेहद कठिन है, लेकिन जमीनों के राजस्व रिकॉर्ड में ये शब्द भी दर्ज हैं। बंजर जदीद यानि चार फसलों तक खाली भूमि, बंजर कदीम यानि आठ फसलों तक खाली पड़ी भूमि, गैर मुमकीन यानि कास्त के अयोग्य भूमि, नौतौड यानि अयोग्य भूमि को कास्त के योग्य बनाना तथा क्लर यानि खारयुक्त भूमि।
देखिए इन शब्दों का अंदाज-ए-बयां
मौजा बेचिराग-बिना आबादी का गांव
गोरा देह भूमि-गांव के साथ लगी भूमि
जमाबंदी-भूमि की मिल्कियत और अधिकारों की पुस्तक
कौमियत-जाति
चाह आबनोशी-आबादी में पीने के उपयोग का कुआं
चाह आब पाशी-सिंचाई का कुआं
साकिन-निवासी
शजरा परचा-कपड़े पर बना खेतों का नक्शा
तबादला-भूमि के बदले भूमि लेना
पडत सरकार-राजस्व रिकार्ड रूम में रखी जाने वाली प्रति
पडत पटवार-रिकार्ड की पटवारी के पास रखी जाने वाली प्रति
फर्द बदर-राजस्व रिकार्ड में हुई गलती को ठीक करना
&ये मुगलकालीन शब्दावली है, जिसे राजपूत राजाओं और उसके बाद अंग्रेजों ने बरकरार रखा। यह बदलनी चाहिए। इसके लिए उच्चस्तर पर ही कार्ययोजना की जरूरत है। हालांकि अब कुछ बदलाव किया जा रहा है। मसलन नक्शे पर उपर-नीचे एन और एस लिखा जाने लगा है। मजमा ए आम की जगह आमसभा या ग्रामसभा लिखा जाने लगा है। अभी और बदलाव की जरूरत है। एमएस राजावत, तहसीलदार, श्रीमाधोपुर
Published on:
25 Jan 2020 06:45 pm
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