
सीकर के सबसे बड़े कल्याण अस्पताल में मरीजों को खून चढ़ाने का संकट
सीकर. जिला मुख्यालय के सबसे बड़े कल्याण अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीजों को खून चढ़ाने का संकट हो गया है। वजह जिला मुख्यालय के एकमात्र सरकारी ब्लड बैंक की क्षमता 600 यूनिट की है लेकिन इस बैंक में महज 270 यूनिट रक्त ही बचा है। जबकि जिला मुख्यालय पर रोजाना औसतन 40 से 45 यूनिट की प्रतिदिन खपत है। नियमानुसार ब्लड बैंक में 400 यूनिट हर समय मौजूद रहनी चाहिए। ब्लड बैंक में ए और ओ पॉजिटिव की केवल वे यूनिट बची हुई है जो रोगियों के लिए उनके रिश्तेदार या परिचितों ने डोनेट की है। इनमें से भी कई यूनिट तो अनटेस्टेड ही है। रिजर्व केटेगरी वाली इन यूनिट को गंभीर या जटिल ऑपरेशन में काम में लेने से पहले जांच होना जरूरी है। मजबूरी में रोजाना मरीजों को बाहर के निजी ब्लड बैंक से खून मंगवाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि एमसीएच विंग में ब्लड की सबसे ज्यादा खपत है।
यूं समझे परेशानी
एचआईवी पॉजीटिव, हेपेटाइटिस व मलेरिया जैसी बीमारियों में खून की कमी होती है। इन मरीजों को बिना जांच किए खून नहीं चढ़ाया जा सकता है। जांच में लगने वाले समय के कारण मरीजों को दो से तीन घंटे पहले खून नहीं चढ़ाया जा सकता है। कई बार गंभीर स्थिति में मरीज को खून चढ़ाने की जरूरत होती लेकिन ब्लड बैंक में अनटेस्टेड होने के कारण समय पर रक्त नहीं लगाया जा सकता है।
यह है कारण
शिक्षण संस्थानों के अवकाश के कारण रक्तदान शिविर की संख्या घटी है। इस कारण ब्लड बैंक में पिछले एक माह के दौरान सात से आठ यूनिट रक्त संग्रहित हो रहा है।
पॉजीटिव ग्रुप की कमी
ब्लड बैंक में इस समय ए और ओ समूह के पॉजीटिव खून की कमी है। ब्लड बैंक की 600 यूनिट क्षमता के बावजूद महज 270 यूनिट रक्त ही मौजूद है। नियमानुसार 400 यूनिट रक्त हर समय मौजूद रहना चाहिए। इससे मरीजों को परेशानी होती है।
सतेन्द्र कुड़ी, तकनीशियन ब्लड बैंक सीकर
Published on:
23 May 2018 12:05 pm
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