
राम भक्त हनुमान से सीखे: एकाग्रता, नीति, साहस और लीडरशिप
सीकर. भगवान हनुमान के जीवन चरित्र से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। शिक्षानगरी सीकर में देश-दुनिया के विद्यार्थी अध्ययन करने के लिए आते है। प्रतियोगी परीक्षआों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा से विद्यार्थी और अभिभावक काफी तनाव में रहते है। ऐसे में वह भी काफी कुछ हनुमानजी के जीवन से सीखकर सफलता हासिल कर सकते है। रामचरित मानस में और हनुमान जी को समर्पित सुंदरकांड में ऐसे कई वृतांत है जहां पर हनुमान जी ने बल और बुद्धि का बेहतरीन संतुलन पेश किया है। बल और बुद्धि का उपयोग करते हुए ही हनुमान जी ने माता सीता की खोज की थी। हनुमान जी ने हर समस्याओं को परिस्थितियों के हिसाब से सुलझाया है। जहां बल का प्रयोग करना था वहां बल का प्रयोग किया और जहां विन्रमता की आवश्यकता थी वहां बुद्धि का पूर्ण उपयोग कर संकट को टाला। विद्यार्थी वर्ग को खासकर अपने काम में, लक्ष्य के प्रति एकाग्रता उनसे जरूर सीखनी चाहिए। हनुमान जी का लक्ष्य था सीता जी की खोज। इस लक्ष्य को पाने में उन्हें कदम-कदम पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जीवन पथ पर आने वाली मुश्किलों का कैसे सामना करें, इसका समाधान-सूत्र हनुमान जी बताते हैं। हनुमान जी माता सीता की खोज में जब लंका की तरफ बढ़ रहे थे, तभी समुंद्र ने हनुमान जी से विश्राम करने का आग्रह किया और अपने भीतर रह रहे पर्वत से कहा की तुम हनुमान जी को विश्राम करने दो। हनुमान जी विश्राम करने से मना करते हुए निमंत्रण का मान रखते हुए मैनाक पर्वत को छू कर आगे की ओर निकल पड़े। हनुमान जी की इस बात से हमे यह सीखने को मिलता है कि हमें जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए हमें रुकना नहीं चाहिए।
1. नया सीखने की धुन और प्रबंधन:
हनुमान के बचपन से भी काफी कुछ सीखा जा सकता है। उन्होंने बचपन में ही दिखा दिया कि वह बालक तो साधारण है लेकिन हमेशा नया सीखने की धुन सवार रहेगी। हनुमान को जिस भी कार्य की जिम्मेदारी मिली वह पीछे नहीं हटे। हर बार नया सीखने की धुन के चलते प्रबंधन कला भी उनके जीवन का हिस्सा बन गई। युद्ध में भी बानर शक्ति को एकजुट कर बेहतर प्रबंधन का परिचय दिया। इसलिए विद्यार्थियों को भी नया सीखने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। जब भी लीडरशिप का मौका मिले तो चुनौतियों का डटकर मुकाबले करें।
2. सफलता का रोडमैप:
राम-रावण यु्द्ध का परिणाम वैसे तो भगवान को पहले से ज्ञात था। लेकिन जिस तरह भक्त हनुमान ने दूरदर्शिता का परिचय दिया वह भी काफी कुछ सीखाता है। उनको पता था कि लंका में माता सीता की खोज से लेकर युद्ध तक विभिषण का अहम रोल रहेगा। इसलिए उन्होंने नीति के मार्ग पर चलने वाले विभिषण की दोस्ती कराई। इससे सीखने को मिलता है कि हमें किसी भी परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए रोडमैप पहले ही बनाना होगा। बिना रोडमैप के कोई भी युद्ध नहीं जीता जा सकता है।
3. चुनौती कैसी भी हो तनाव मुक्त रहें:
राम-रावण युद्ध में कई ऐसे मौके आए जब अच्छे से अच्छा योद्धा भी विचलित हुए। लेकिन वह अपनी धुन में लगे रहे। उन्होंने युद्ध को उत्सव की तरह लिया। इससे विद्यार्थी सीख सकते हैं कि उनको अपने लक्ष्य को एक मिशन में रुप में लेना चाहिए और तनाव मुक्त रहना चाहिए।
4. विन्रमता:
भक्त हनुमान महा शक्तिशाली थे। उन्होंने लंका को उजाड़ दिया और कई असुरों का संहार किया। लेकिन उन्होंने इस बीच में विन्रमता को भी नहीं छोड़ा। इसलिए विद्यार्थियों को जीवन में विन्रमता के गुण को जरूर धारण करना चाहिए।
5. साहस:
हनुमान के अकेले लंका में जाकर पहले नीति से रावण को समझाना और फिर भी नहीं मानने पर अपनी शक्ति का अहसास कराना। लक्ष्मण के मुर्छित होने पर पूरी सेना में सन्नाटा था। लेकिन हनुमान ने वहां भी संजीवनी बूटी लाने का काम भी अपने हाथ में लिया। इससे विद्यार्थियों को प्रेरणा लेनी चाहिए कि किसी भी स्थिति में हिम्मत नहीं हारें साहसी बनें।
Published on:
16 Apr 2022 12:56 pm
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