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सीकर किसान आंदोलन : जाम से जिंदगी लगी दांव पर, यहां दो दिन से तड़पता रहा मरीज

सीकर किसान आंदोलन को आज तेरहवां दिन है। दोपहर एक बजे किसानों के प्रतिनिधिमंडल की सरकार से वार्ता होगी।

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jaam in sikar

50 रुपए से भी ज्यादा में मिला एक लीटर दूध जिले में कई जगहों पर
40 करोड़ से अधिक का व्यापार प्रभावित जिलेभर में

सीकर. सीकर किसान आंदोलन में तीसरे दिन बुधवार को चक्का जाम रहा। जाम के कारण जिंदगी अब दांव पर लगने लगी है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है। 66 साल की उम्र में किडनी फेल का दर्द झेल रहा मुर्तुजा हसन खत्री उपचार के लिए पिछले दो दिन से तड़प रहा था। लेकिन, जाम के कारण मजबूरी में उसे घर में कैद होकर रहना पड़ा।

-मंगलवार को जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गई तो परिजन इलाज के लिए उसे निजी कार में सीकर लेकर पहुंचे।
-लेकिन, जगह-जगह रास्ता अवरुद्ध होने के कारण आधे घंटे का सफर तय करने में उन्हे साढ़े तीन घंटे लगे।
-इसके बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराकर हसन अली की डायलिसिस करवाई गई और उसकी जान बचाई जा सकी।-फतेहपुर रोड निवासी सलीम चौहान ने बताया कि उसके संबंधी मुर्तुजा हसन नवलगढ़ रहते हैं।
-किडनी खराब होने के कारण हर दूसरे दिन डायलिसिस के लिए उन्हें सीकर लाना पड़ता है। लेकिन, पिछले दो दिन से --चक्काजाम होने के कारण उनका यहां तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था।
-सोमवार को इलाज के लिए सीकर लेकर आ रहे थे तो रास्ता जाम होने के कारण बिना उपचार घर लौटना पड़ा।
-परिजनों ने यह सोच कर तसल्ली कर ली कि रात तक हालात सामान्य हो जाएंगे।
-मंगलवार को जब इनकी तबीयत ज्यादा बिगडऩे लगी तो वापस कार की व्यवस्था कर वे घर से निकल पड़े।
-जगह-जगह मिन्नतें कर आगे तक पहुंचे। कई जगह वाहन नहीं निकलने के लिए मना किया तो कच्चे रास्ते व गांव-गांव होकर पिपराली रोड पहुंचे।
-नवलगढ़ पुलिया के पास भी रास्ता रुका होने के कारण पिपराली रोड पर ही निजी अस्पताल में भर्ती कराकर हसन खत्री का इलाज करवाया।
-चिकित्सकों ने बताया कि और ज्यादा देरी होती तो इनके शरीर से पानी निकलना शुरू हो जाता।

ऑपरेशन होना है...वो जाम में फंसे हुए हैं
मेरी बेटी का ऑपरेशन होना है और वो जाम में फंसे हुए हैं। यह बात झुंझुनूं से आई नरबदी देवी ने कही। दरअसल, तीन दिन पहले नरबदी देवी की बेटी की तबीयत अचानक से बिगड़ गई। जिसके बाद नरबदी देवी अपनी बेटी को लेकर सीकर आ गई। यहां डॉक्टरों ने उसे ऑपरेशन बता दिया। नरबदी देवी का कहना है कि वे अपने साथ दो हजार रुपए लेकर आई थी, जो जांच में खत्म हो गए। नरबदी देवी ने पति को फोन किया। लेकिन किसानों के चक्काजाम के चलते वह भी जाम में फंसे हुए हैं। नरबदी देवी का कहना है जाम के चलते ना तो वो अपने गांव जा सकती हैं ना ही पति यहां आ सकते हंै।

पटरियों से होकर पहुंचा सीकर
लक्ष्मणगढ़ तहसील के नजदीकी गांव से इलाज के लिए सीकर पहुंचे गोरधन मीणा के अनुसार उसकी पत्नी मनभरी बीमार थी। दवा के लिए मंगलवार को उसकी जांच तय थी। लेकिन, मुख्य सडक़ों पर जाम होने के कारण बाइक लेकर रेलवे की पटरियों के सहारे यहां तक पहुंचा हूं। इस दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों ने रोकने की कोशिश की। लोगों के हाथ-पैर जोडऩे पड़े।


दूध-छाछ के लिए मची मारामारी, पेट्रोल का स्टॉक रीता
सीकर. महापड़ाव का असर मंगलवार को जिलेभर में नजर आया। सरकारी कार्यालयों में कामकाज नहीं हुआ। रोडवेज व निजी बसों का संचालन ठप रहा। राजमार्ग सहित मुख्य सडक़ों पर वाहन नजर नहीं आए। सीकर शहर में सुबह दस बजे से दुकानें खुलने लगी। बाजारों में नाममात्र के ग्राहक पहुंचे। इक्का-दुक्का ऑटो शहर की सडक़ों पर चलने से लोगों को कुछ राहत मिली। वहीं, दूध की आपूर्ति मंगलवार को शहर में नहीं हुई। ग्रामीण अंचल से दूध डेयरियों तक दूध नहीं पहुंचा। लोग दुकान के चक्कर लगाते रहे।

स्कूल खुले, लेकिन अध्यापक नहीं पहुंचे
जिले में मंगलवार को सरकारी स्कूल खुले लेकिन अधिकांश स्कूलों में बच्चे नहीं पहुंचे। जिन स्कूलों में बच्चे पहुंच गए वहां अध्यापक नहीं पहुंचने से शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह ठप रही। इसी प्रकार कई निजी कोचिंग संस्थान में विद्यार्थियों के नहीं आने के कारण पढ़ाई बाधित हुई। बाद में यहां छुट्टी कर दी गई।

रोडवेज को फटका
पिछले दो दिन से रोडवेज के पहिए थम गए हैं। सीकर में बंद के कारण सीकर, चूरू, झुंझुनूं, हनुमानगढ़, सरदारशहर, गंगानगर, बीकानेर डिपो की जयपुर मार्ग की बसें नहीं चलीं। अकेले सीकर डिपो को दो दिन में 36 लाख से अधिक के राजस्व से हाथ धोना पड़ा।

प्रशासन फेल
किसानों के जाम के दौरान पुलिस और प्रशासन की व्यवस्थाएं पूरी तरह फेल रही। जाम के दौरान पुलिस और प्रशासन ने कहीं भी वैकल्पिक मार्ग का इंतजाम नहीं किया, जिससे हजारों वाहन फंस गए। विरोध-प्रदर्शन का यह पहला मामला है जिसमें प्रशासन की ओर से वैकल्पिक मार्ग की कहीं भी व्यवस्था नहीं की। राजमार्ग को भी भगवान भरोसे छोड़ दिया गया।
चाय की चुस्की और जीत-हार की बाजी
चाय की चुस्की, ताश की पत्तियां। कुछ ऐसा ही देखने को मिला जिलेभर में। राजमार्गों पर किसान टेंट व तंबू तानकर बैठे हुए हैं और चाय की चुस्कियों संग ताश की पत्तियां खेल रहे हैं।