
टोडा.
टोडा से छह किलोमीटर दूर स्थित टपकेश्वर की कहानी आमेर रियासत से जुड़ी है। टपकेश्वर धाम मोकलवास पंचायत के अधीन है। धाम पर प्रतिवर्ष सावण मास में देशभर के हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। बारिश के मौसम में पहाड़ी पर स्थित गुफा में भगवान शिव की प्राचीन मूर्तियों का जलाभिषेक बारिश की बूंदों से होता हैं। इसी कारण वर्तमान में इस धाम का नाम ही टपकेश्वर हो गया। रियायत काल के दौरान इस क्षेत्र का नाम अंचलगढ़ था। जिसके कारण धाम का नाम भी अंचलेश्वर था। इसकी स्थापना करीब 450 साल पहले राजा अंचल ने की। तब से लेकर आज तक इस धाम का कोई विकास नहीं हुआ। टपकेश्वर धाम पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग की अनदेखी का शिकार बना हुआ है। इसी कारण धाम पर कोई विकास कार्य नहीं हो पाया ।
समस्याएं मांगती समाधान
टपकेश्वर धाम दो पहाडिय़ों के बीच स्थित है। इन दोनों पहाडिय़ों पर घना जंगल है। इस वन क्षेत्र में पैंथर मौजूद हैं। वन विभाग क्षेत्र को पैंथर रिजर्व घोषित करने में शिथिलता दिखा रहा है। पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग द्वारा टपकेश्वर धाम का हो तो इस की तस्वीर बदल सकती है। धाम पर पयेजल सहित अनेक कई प्रकार की समस्या बनी हुई हैं। ये समस्याएं संबंधित विभाग से समाधान मांग रही हैं। सरकार द्वारा धाम प भौतिक सुविधाएं उपलब्ध करवा दी जाएं तो धाम की स्थिति सुधर सकती है।
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पर्यटन को मिल सकता है बढ़ावा
टपकेश्वर धाम एक प्राकृतिक पर्यटक स्थल है। पर्यटन विभाग इस धाम को पर्यटक स्थलों में शामिल कर ले तो सरकार के साथ-साथ पर्यटकों को भी इसका फायदा मिल सकता हैं। वहीं पर धाम को पर्यटक स्थल घोषित कर दिया जाएं तो बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता हैं।
सावण मास में आते हैं लाखों श्रद्धालु
टपकेश्वर धाम पर प्रतिवर्ष सावण मास तथा महाशिवरात्रि पर देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक व पूजा करने आते हैं। यह धाम पर्यटक स्थल बन जाएं तो पर्यटकों की संख्या में इजाफ हो सकता हैं। साथ सरकार को भी राजस्व प्राप्त हो सकता हैं।
Updated on:
06 Feb 2018 03:50 pm
Published on:
06 Feb 2018 02:56 pm
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