
बेहतर शहरीकरण की कल्पना कर सरकार ने नगरीय इलाकों में मास्टर प्लान तो बनवा दिए, मगर उन्हें लागू करवाने में निकाय गैरजिम्मेदार व लापरवाह बने हुए हैं। राजस्थान पत्रिका के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी के पत्र के आधार पर याचिका स्वीकारते हुए हाईकोर्ट ने गत 13 जनवरी को राज्य के स्थानीय निकायों को छह प्रमुख शहरों में मास्टर प्लान की पालना करने और इनमें किसी तरह का बदलाव नहीं करने केसख्त निर्देश दिए थे, मगर चार माह बाद भी हालात में सुधार नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के प्रमुख सचिव को हाईकोर्ट में तलब किया था। सीकर के संदर्भ में बात करे, तो शहर में मास्टर प्लान के कायदे हर कदम पर टूट रहे हैं। मास्टर प्लान 2031 के हिसाब से जहां नए सुविधा क्षेत्र विकसित होने हैं, वहां पहले से ही आवासीय कॉलोनी विकसित हो चुकी है। नए मास्टर प्लान के हिसाब से व्यावसायिक, शैक्षणिक व सुविधा क्षेत्र की बसावट नहीं होने के कारण शहरवासियों के सामने कई चुनौतियां हैं। यदि अब भी इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो आमजन के आवास की समस्या नासूर बन जाएगी। जबकि राजस्थान हाईकोर्ट नगर निकायों को मास्टर प्लान की पालना के संबंध में एेतिहासिक फैसला सुना चुका है। राजस्थान पत्रिका टीम ने शहर के मास्टर प्लान 2001 व 2011 को लेकर हकीकत टटोली तो बड़े भयावह हालात सामने आए। मास्टर प्लान की वस्तुस्थिति को लेकर पत्रिका की खास रिपोर्ट।
एेसे समझे सीकर के मास्टर प्लान को
पुराना शहर: 618 हैक्टेयर
राधाकिशनपुरा क्षेत्र: 2637 हैक्टेयर
देवीपुरा क्षेत्र: 3082 हैक्टेयर
जगमालपुरा रोड: 2710 हैक्टेयर
सीकर शहर में फिलहाल एेसे हो रहा जमीन का उपयोग
नगर परिषद की कुल सीमा: 2257 हैक्टेयर
विकसित क्षेत्र: 2174 हैक्टेयर
आवासीय क्षेत्र: 64.40 हैक्टेयर
व्यावसायिक: 4.51हैक्टेयर
औद्योगिक: 1.61हैक्टेयर
राजकीय: 1.00 हैक्टेयर
मनोरंजन: 1.21 हैक्टेयर
सार्वजनिक: 10.76 हैक्टेयर
जिम्मेदारों की लापरवाही के तीन उदाहरण
1. रीको क्षेत्र:
सीकर के नए मास्टर प्लान के हिसाब से नया रीको क्षेत्र राधाकिशनपुरा योजना क्षेत्र में विकसित होना है। लेकिन यहां पहले से आवासीय योजना विकसित हो चुकी है। एेसे में सवाल खड़ा होता है कि नगर निकाय मास्टर प्लान 2031 के हिसाब से शहर को रीको क्षेत्र कैसे और कहां मिलेगा। यदि अभी सख्त कदम नहीं उठाया गया तो बाद में यह समस्या बढ़ी नासूर हो सकती है।
2. पार्क:
आबादी के हिसाब से शहर में सुविधा क्षेत्र काफी कम है। एेसे में शहर में सात नए पार्को के लिए जगह आरक्षित की गई। इसमें जयपुर रेलवे लाइन, पिपराली रोड, नवलगढ़ रोड, बीकानेर रोड सहित अन्य जोन शामिल है। लेकिन परिषद की लापरवाही के कारण हालत यह है कि ज्यादातर जगह कॉलोनी बस चुकी है। यदि अब भी परिषद ने पहल नहीं की तो यह पार्क महज सपना बनकर रह जाएंगे।
3. पार्र्किंग:
पिछले मास्टर प्लान की समीक्षा के दौरान सामने आया कि शहर में जाम की समस्या का बड़ा कारण पार्र्किंग क्षेत्र का नहीं होना है। इसके लिए मास्टर प्लान में तय किया था कि बिना पार्र्किंग वाले भवनों को तत्काल सीज किया जाएगा। बिना पार्र्किंग क्षेत्र के व्यावसायिक कॉम्पलैक्स को मंजूरी नहीं दी जाए। फिलहाल शहर में हालात यह है कि 90 फीसदी से अधिक कॉम्पलैक्स के नक्शे में पार्र्किंग के लिए जगह तय है। लेकिन मौके पर पार्र्किंग की जगह को भी व्यावसायिक गतिविधियों में काम लिया जा रहा है।
अब तक नहीं सुधारी पिछली गलतियां
मनोरंजन की जमीन को कर दिया खुदबुर्द
शहर के 2001 के मास्टर प्लान के अनुसार 64 हैक्टेयर भूमि पार्क, खेल मैदान के लिए आरक्षित की गई। लेकिन नगर परिषद महज 27 हैक्टेयर भूमि को ही इस प्रयोजन के काम में ले सकी। शेष भूमि को परिषद ने अन्य कार्यो में खुदबुर्द कर दिया।
ट्रक टर्मिनल की स्थापना नहीं
पिछले मास्टर प्लान के हिसाब से शहर में एनएच 11 पर दो ट्रक टर्मिनल की स्थापना होनी थी। लेकिन नगर परिषद एक जगह भी शहर में ट्रक टर्मिनल नहीं बनवा सका। इस कारण जयपुर रोड पर पार्र्किंग की जगह ही ट्रक टर्मिनल बनी हुई। यहां परिषद ने मास्टर प्लान के विपरित पार्क बना दिया।
जयपुर रोड की जगह सांवली रोड पर गोदाम
खाद्यानों के भण्डारन के लिए मास्टर प्लान में गोदाम जयपुर रोड पर प्रस्तावित थे। परिषद ने इनके स्थान पर गोदामों की स्थापना सांवली रोड पर करा दी। इसके पीछे तर्क था कि सांवली रोड पर जिला खेल स्टेडियम, वन क्षेत्र व पार्क की सुविधाएं है। इसके बाद परिषद ने कायदों को कागजों में दफन कर दिया।
Published on:
26 May 2017 02:32 am
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