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खास खबर: अब 12 इंच से लम्बी मथानिया लाल मिर्च, सलाद के रूप में खा सकेंगे

जोधपुर के तिंवरी के युवा का नवाचार : दोगुनी लम्बाई के कारण इंडिया बुक ऑफ रेकॉर्ड में दर्ज

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सीकर

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Ashish Joshi

Feb 09, 2022

खास खबर: अब 12 इंच से लम्बी मथानिया लाल मिर्च, सलाद के रूप में खा सकेंगे

खास खबर: अब 12 इंच से लम्बी मथानिया लाल मिर्च, सलाद के रूप में खा सकेंगे

आशीष जोशी
सीकर. कोरोनाकाल में एक युवा के नवाचार ने विश्व प्रसिद्ध जोधपुर Jodhpur के मथानिया की लाल मिर्च Mathania red chili को नई पहचान दिला दी है। जो मिर्च अपने तीखेपन और सुर्ख रंग के लिए जानी जाती थी, उसकी लम्बाई दो गुनी कर नया रेकॉर्ड कायम किया है। न केवल 12 इंच से ज्यादा लम्बी मिर्च की साढ़े सात टन पैदावार ली बल्कि उसे और सुर्ख व चमकीला भी बना दिया। लम्बाई के कारण इस मिर्च को इंडिया बुक ऑफ रेकॉर्ड India Book of Records में दर्ज किया गया है। खास बात यह भी है कि इस मिर्च को आप सलाद के रूप में भी खा सकते हैं। यह अपेक्षाकृत कम तीखी है। आम तौर पर मथानिया मिर्च की लम्बाई 6 इंच से ज्यादा नहीं होती।
तिंवरी निवासी बीए एलएलबी डिग्रीधारी युवा किसान विकास खिंची के अनुसार क्षेत्र में पानी की कमी के चलते कई किसानों ने मिर्च की खेती कम कर अन्य फसलों की ओर रुख कर लिया था। ऐसे में मथानिया मिर्च इतिहास बन रही थी। कोरोनाकाल में हमारी मशहूर मिर्ची को और बड़ी पहचान दिलवाने की ठानी। फिर क्या था, हिम्मतनगर (गुजरात) से मिर्च के नौ हजार बीज लिए और पॉलीहाउस में यह फसल ली। जिसमें पौधे की अच्छी लम्बाई होती है और ड्रिप सिंचाई पद्धति से इसका अच्छा उत्पादन संभव हो सका। एक एकड़ कृषि भूमि पर स्थित पॉली हाउस में 7.5 टन मिर्च का उत्पादन हुआ। मिर्च की लंबाई का भौतिक सत्यापन उद्यान विभाग के अधिकारियों की ओर से किया गया। करीब 60 हजार रुपए के निवेश पर उन्होंने तीन लाख रुपए की मिर्च की उपज ली।


ऑर्गेनिक खेती पर जोर
विकास ने गोबर, केंचुआ खाद, डी कंपोजर, ट्राईकोडर्मा, नीम खल का भरपूर उपयोग किया। फसल को रोगों और कीड़ों से बचाने के लिए एनपीके, मैग्नीशियम सल्फेट व कैल्शियम नाइट्रेट का सीमित उपयोग किया। वे पॉली हाउस में 4 बार खीरे की फसल ले चुके हैं। उन्होंने उच्चमूल्य सब्जी-ब्रोकली, लाल व पीली शिमला मिर्च का भी उत्पादन लिया था। काजरी से जुड़े होने के साथ ही जयपुर से पॉलीहाउस में संरक्षित खेती का प्रशिक्षण ले चुके हैं। जैविक खेती की ओर अग्रसर है। जैविक गेंहू की फसल लगा रखी है।

कभी 70 हजार हैैक्टेयर में होती थी मिर्च
जोधपुर जिले के मथानिया कस्बे की लाल मिर्च दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है। इसके तीखेपन व रंग के कारण कई देशों के कृषि वैज्ञानिक यहां शोध के लिए आ चुके हैं।यहां बड़े पैमाने पर लाल मिर्च की खेती की जाती थी। मारवाड़ के सर्द मौसम में पकने के साथ इसका सुर्ख लाल रंग और ज्यादा निखर जाता। कभी 70 हजार हैक्टेयर में उगने वाली मिर्ची के एक ही खेत के बार-बार बुवाई करने से नीमाटोड जैसे सूत्रकृमि लगने व भूजल के गहरे चले जाने से पानी में लवण की अधिकता के चलते मथानिया क्षेत्र में मिर्ची की खेती लुप्त होने लगी थी।


हमने कृषि फार्म का दौरा कर लाल मिर्च देखी थी। बारह इंच से लम्बी मिर्च की उपज का नवाचार किया गया है। विकास ने इसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज करवाया है।
-घनश्याम, कृषि अधिकारी (उद्यान) जोधपुर


मथानिया के निकट तिंवरी के फार्म हाउस पर युवा किसान ने 32 सेंटीमीटर लम्बी लाल मिर्च की उपज ली है। हमने नापकर इसकी पुष्टि की है।
जयनारायण स्वामी, उपनिदेशक (उद्यान) जोधपुर