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ये हैं राजस्थान के मांझी, 23 साल से गांव के लिए बहा रहे पसीना

-राजस्थान के मांझी श्रवण कुमार सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ तहसील के गांव सांखू निवासी हैं।

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manjhi sikar

फतेहपुर (सीकर.) बिहार के दशरथ मांझी को कौन नहीं जानता है?। ये ही है वो माउंटमैन , जिसने गहलोर की पहाडिय़ों को महज हथौड़े से काटकर रास्ता बना डाला। इसकी दो वजह थी। एक तो ये कि पहाड़ी की दूसरी छोर पर लकडिय़ां काट रहे पति दशरथ के लिए खाना लेकर आ रही उसकी पत्नी फाल्गुनी की पहाडिय़ों के दर्रे में गिरने से मौत हो गई थी और दूसरी वजह ये थी कि दशरथ मांझी के गांव को अन्य शहर-कस्बों में जाने के लिए पूरा गहलोर पर्वत पार करना पड़ता था।

आइए अब आपको मिलवाते हैं राजस्थान के एक ऐसे शख्स से जो बिहार के दशरथ मांझी के नक्शे कदम पर चल रहा है। हालांकि राजस्थान के इस मांझी की कहानी में रियल मांझी जितना संघर्ष नहीं है। इसका नाम है श्रवण कुमार।

23 साल पहले गांव के रास्ते पर पैदल जा रहे श्रवण कुमार ने खराब रास्ते में फंसी गाड़ी में प्रसव पीड़ा से कहराते हुए एक महिला को देखा। यह दर्द श्रवण से देखा नहीं गया और उसी दिन संकल्प लिया कि वे यह रास्ता ठीक करेंगे। वो दिन है और आज का दिन है। तब से श्रवण कुमार गांव का रास्ता सही करने के लिए रोज सुबह तगारी डालते हैं।

कौन है राजस्थान का ये मांझाी


-राजस्थान के मांझी श्रवण कुमार सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ तहसील के गांव सांखू निवासी हैं।
-गांव के रास्ते पर मिट्टी डालकर उसको सही करते हैं ताकि आने जाने वालों को परेशानी नहीं हो।
-पत्रिका से बात करते हुए श्रवण ने बताया कि 1995 में वह गांव से डूंडलोद पैदल जा रहे थे।
-उस समय कोई सडक़ बनी नहीं थी। इस कारण रास्ते पर पानी भरा रहता था।
-डूंडलोद जाने का उसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था।
-इसी दौरान चूड़ी गांव से किसी महिला को प्रसव पीड़ा में डूंडलोद की साइड ले जाया जा रहा था।
-गांव से निकलते ही गाड़ी फंस गई। इस दौरान महिला प्रसव पीड़ा से कराह रही थी।
-उसको देख कर लगा कि इस रास्ते के कारण किसी के साथ भी ऐसा हो सकता है।
-ऐसे में उसी दिन से रास्ता सही करने का संकल्प ले लिया।

श्रवण कुमार सुबह रोजाना करते हैं श्रमदान

ग्रामीणों के सहयोग से पहले उस रास्ते को कटवाया गया। उसके बाद से रोज श्रमदान कर रहे हैं। श्रवण कुमार धोद तहसील में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में वाणिज्य संकाय में व्याख्याता हैं। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल जाखड़ ने बताया कि रोज सुबह श्रवण कुमार साढ़े पांच बजे से 1 घंटे से लेकर डेढ़ घंटे तक श्रमदान करते हैं। श्रवण कुमार पूरे पांच किलोमीटर की सडक़ का ख्याल रखते हैं। वह गड्डों में मिट्टी भर कर उसको सही करते हैं।