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सीकर के सरकारी स्कूल की प्रिंसीपल ने छात्राओं के साथ किया ऐसा बेहूदा व्यवहार जानकर आपको भी आएगा गुस्सा

स्कूल की कक्षा नौ व 11वीं की इन छात्राओं का आरोप था कि प्रार्थना धीरे बोलने के कारण उनके साथ मारपीट की गई थी।

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सीकर. सबलपुरा स्थित राजकीय स्कूल की चार छात्राओं को सोमवार की दोपहर एसके अस्पताल में भर्ती कराया गया था। छात्राओं का आरोप था कि प्रार्थना धीरे बोलने के कारण प्रिंसीपल ने उन्हें पहले तो मुर्गा बनाकर सजा दी। इसके बाद इन चारों के साथ मारपीट की गई। लेकिन, जब शाम को पुलिस व शिक्षा विभाग के अधिकारी अस्पताल पहुंचे तो इन छात्राओं ने प्रिंसीपल के खिलाफ कार्रवाई से मना कर दिया। इधर, बाल कल्याण समिति ने शिक्षा विभाग की जांच पर सवालिया निशान खड़े करते हुए आरोप लगाए है।

स्कूल की कक्षा नौ व 11वीं की इन छात्राओं का आरोप था कि प्रार्थना धीरे बोलने के कारण उनके साथ मारपीट की गई थी। चक्कर आने के बाद प्रिंसीपल ही उन्हें लेकर अस्पताल पहुंची थी। इधर, प्रिंसीपल मनीषा का कहना था कि योग की क्लास के दौरान एक छात्रा को चक्कर आ गए थे। मारपीट व मुर्गा बनाने के आरोप निराधार हैं। बाहर के कुछ युवाओं ने छात्राओं को बरगला दिया था। जबकि स्कूल में ऐसी कोई घटना नहीं घटी।

हालांकि स्कूल में बच्चों व उनके अभिभावकों के साथ मिटिंग का कार्यक्रम तय था। ऐसे में वे लोग भी वहीं मौजूद थे। एक के बाद एक चार छात्राओं ने चक्कर आने की शिकायत की तो परिजनों की भीड़ जमा हो गई। इसके बाद इन्हें अस्पताल लेकर गए थे। परिजनों का कहना था कि यदि इस तरह मारपीट की गई है तो वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।

बाल कल्याण समिति की टीम भी पहुंची
मामले की जानकारी मिलने पर बाल कल्याण समिति के सदस्य भी एसके अस्पताल पहुंचे। समिति सदस्यों ने छात्रा व शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बातचीत की। सदस्यों ने विभाग के अधिकारियों पर दबाब में जांच करने की बात भी कही। समिति सदस्यों ने शुक्रवार को जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट ली जाएगी।

शाम को डिस्चार्ज
चारों छात्राओं को शाम को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। शिक्षा विभाग के एडीईओ पवन कुमार ने बताया कि शाम को जब छात्राओं व उनके परिजनों से पूछा गया तो उन्होंने किसी भी कार्रवाई से इंकार कर दिया। ऐसा उन्होंने लिखित में भी दिया है।

विभाग करेगा जांच
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना था कि मामले को बेवजह तूल दिया गया है। हालांकि फिर भी विभाग अपने स्तर पर मामले की जांच करवाएगा। उद्योग नगर थाने के एसएचओ राममनोहर के अनुसार दोनों पक्षों में समझौता होने के कारण कार्रवाई की कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है।