
राजस्थान में यहां बिना डॉक्टर के मोबाइल वैन, फार्मासिस्ट कर रहे जांच,राजस्थान में यहां बिना डॉक्टर के मोबाइल वैन, फार्मासिस्ट कर रहे जांच
मोबाइल मेडिकल वैन की ओर से लक्ष्मणगढ़ सीकर में 15 जून व 16 जून के कैम्प बिना चिकित्सक व फार्मासिस्ट के लगाए गए। मोबाइल मेडिकल वैन केवल लर्निंग लाइसेंस धारक व्यक्ति ही चला रहा था। मरीजों को एलटी और जीएनएम ने परामर्श दिया और दवाएं दी। प्रदेश में सिस्टम की खामी का यह महज एक उदाहरण है। सीकर जिले में चिकित्सा सुविधा से वंचित क्षेत्रों के लोगों को मेडिकल सुविधा देने के लिए सीकर जिले में मोबाइल मेडिकल वैन शोपीस बन कर रह गई है। मॉनिटरिंग के अभाव में मोबाइल मेडिकल वैन में चिकित्सक की बजाए फार्मासिस्ट ही मरीजों को जांच कर दवाएं थमा रहे हैं। न ही मोबाइल मेडिकल वैन के जरिए कैम्प लगाए जा रहे हैं। जिसका नतीजा है कि लोगों को साधारण सर्दी जुकाम के उपचार के लिए भी मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। आश्चर्य की बात है कि जिम्मेदारों को यह तक पता नहीं कि मोबाइल मेडिकल वैन कहां और किस अवस्था में चल रही है। कई बार तो चिकित्सक और फार्मासिस्ट के अभाव में केवल चालक ही वैन को लेकर चला जाता है और जहां संबंधित स्वास्थ्य केन्द्र के बाहर वैन को खड़ा करके चला जाता है और कुछ समय बाद वापस आकर चला जाता है।
इन सुविधाओं से वंचित
मोबाइल मेडिकल वैन चलाने का उद्देश्य दूरस्थ इलाके के ग्रामीणों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच करने और मौसमी बीमारियों सर्दी, जुकाम बुखार का घर बैठे इलाज मिल जाए और स्क्रीनिंग होने से मरीज को पता चल सके कि उसे बीमारी के उपचार के लिए उपस्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या हायर सेंटर जाना पड़ेगा। जटिल रोगों की पहचान के बाद चिकित्सक की सलाह पर बेहतर इलाज़ के लिए रोगी को परामर्श दिया जाता था कि आगे उसे कहां उपचार कराना है। वैन में प्रसव पूर्व एवं बाद में जांच की सुविधा, मलेरिया व अन्य प्रकार के ब्लड टेस्ट, टीकाकरण की सुविधा के साथ निशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया जाता था। किशोरियों की स्वास्थ्य जांच एवं स्वास्थ्य शिक्षा व जटिल रोगों की पहचान कर मरीजों को रेफर करने की सुविधा ग्रामीणों को गांव में ही मोबाइल वैन से मिल जाती थी।
प्रतिमाह करोड़ों का बजट
मेडिकल मोबाइल वैन पर प्रतिमाह डेढ़ लाख से 2 लाख रुपए व्यय होते हैं। प्रदेश भर में चलने वाले इन वैन पर हर माह करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। जिसके तहत मोबाइल मेडिकल वैन सहित जांच की मूलभूत सुविधा के उपकरण सरकार की ओर से दिए जाते हैं। इन वैन का संचालन संबंधित एजेंसी के जरिए किया जाता है। जिसकी एवज में तय राशि एजेंसी को दी जाती है। वैन में जिसमें एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, नर्सिंगकर्मी और एलटी की नियुक्ति एजेंसी की ओर से की जाती है। जिले के आठ ब्लॉकों में केवल छह जगह ही वैन जा रही है जबकि दो वैन खराब होने के कारण एजेंसी की ओर से दूसरे वाहन में कैम्प लगाए जाते हैं।
इनका कहना है
मेडिकल मोबाइल वैन का रूट प्लान ब्लॉक स्तर पर तय किया जाता है। जिले में इस समय छह मोबाइल मेडिकल वैन चल रही है। वैन का संचालन माह में करीब 20 दिन होता है। वैन में चिकित्सक व फार्मासिस्ट के नहीं जाने के मामले में कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. निर्मल सिंह सीएमएचओ सीकर
Published on:
22 Jun 2023 05:56 pm
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