
ओलंपिक मेडलिस्ट मोना अग्रवाल
सीकर। शुक्रवार का दिन भारतीय खेल इतिहास के लिए डबल धमाल लेकर आया। भारत की दो बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पेरिस पैरालंपिक 2024 में गोल्ड व ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया है। दोनों बेटियां राजस्थान की रहने वाली हैं। जयपुर की अवनि लेखरा ने गोल्ड मेडल जीतकर रिकॉर्ड कायम किया है। वह देश की पहली महिला एथलीट बनी, जिन्होंने पैरालंपिक में 2 गोल्ड मेडल जीते हैं। वहीं मोना अग्रवाल ने ब्रॉन्ज मेडल (Mona Agarwal won bronze) जीतकर देश व प्रदेश का मान बढ़ाया है। दोनों भारतीय बेटियों के इस शानदार प्रदर्शन के बाद चारों तरफ से बधाइयों का तांता लग गया। इस उपलब्धि को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी व प्रदेश के सीएम भजनलाल शर्मा ने बधाई व उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी है।
कांस्य पदक विजेता मोना अग्रवाल के संघर्ष की कहानी चुनौतियों से भरी है। राजस्थान के सीकर में जन्मी मोना अग्रवाल की दो बड़ी बहनें हैं। मोना के जन्म से पहले उनके माता-पिता बेटा चाहते थे, लेकिन बेटी पैदा हुई। ऐसे में मोना माता-पिता की चाहत नहीं थी। मोना के लिए चुनौतियां यहीं खत्म नहीं हुईं। लड़की होने का कलंक ही काफी नहीं था, मोना को बहुत छोटी उम्र में ही पोलियो हो गया, जिसके कारण उन्हें व्हीलचेयर पर रहना पड़ा। हालांकि इन सबके बीच मोना की नानी ने उन्हें हिम्मत और साहस दी। मोना को सिखाया कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है, बस काम में मन लगाना है।
मोना बताती हैं कि, बेशक, व्हीलचेयर से बंधे होने के कारण, मुझे बाधाओं से अलग तरीके से निपटना पड़ा। मैं एक सामान्य व्यक्ति की तरह चीजों को नहीं कर सकती थी। लेकिन उसे करने का प्रयास करती।
उन्होंने बताया कि शूटिंग से पहले वह भाला फेंक, शॉट पुट, डिस्कस और पावरलिफ्टिंग करती थी। लेकिन शारिरिक असमर्थता के कारण पावरलिफ्टिंग से दूर हो गई और दूसरे खेलों पर ध्यान देने लगी। इस बीच मोना शादी के बाद जयपुर आ गईं। यहां एकलव्य स्पोर्ट्स शूटिंग अकादमी में 2021 में उन्होंने शूटिंग की शुरुआत की। इस दौरान मोना ने कई प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लिया। इसी साल मार्च महीने में वह पेरिस पैरालंपिक के लिए ओलंपिक कोटा हासिल करने में सफल रही। आज ठीक करीब 6 महीने बाद मोना ओलंपिक मेडलिस्ट बनकर देश में इतिहास रचा है।
Updated on:
30 Aug 2024 09:08 pm
Published on:
30 Aug 2024 07:10 pm
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