
सीकर में महज बीस दिन में 14 हजार से ज्यादा लोग आए आई-फ्लू की चपेट में
वातावरण में तेजी आ रहे बदलाव के कारण जिले में आई-फ्लू (वायरल कंजंक्टिवाइटिस) ने दस्तक दे दी है। हाल यह हो गया कि अकेले कल्याण अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में रोजाना औसतन चार सौ से ज्यादा मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। निजी अस्पताल व क्लीनिक की ओपीडी का आकंडा जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा करीब 14 हजार मरीजों तक का माना जा रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों की नेत्र रोग की ओपीडी में आने वाला हर तीसरा वां शख्स आई फ्लू से ग्रसित है। हाल यह हो गया कि अस्पताल में चारों तरफ आई फ्लू के मरीज मिल रहे हैं।
तीन हजार से ज्यादा बच्चे बीमार
चिकित्सकों के अनुसार आई फ्लू के कारण हॉस्टल व स्कूलों के छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा है। पिछले बीस दिन में तीन हजार से ज्यादा बच्चे आई फ्लू की चपेट में आ गए हैं। कई स्कूलों में आई फ्लू के लक्षण नजर आने पर संबंधित बच्चे को फौरन घर भेज दिया जाता है।
दवाओं पर खर्च हो रहे लाखों
सरकारी अस्पतालों के निशुल्क दवा वितरण केन्द्रों पर आई फ्लू की दवाओं की कमी हो गई है। जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों व क्लीनिक में उपचार करवाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल बीस दिन में निशुल्क उपचार के लिए आने वाले मरीजों को हजारों रुपए खर्च करके बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल के पास महज चार दिन का दवाओं का स्टॉक बचा है।
पांच साल बाद म्यूटेट
सीकर में आई फ्लू का वायरस म्यूटेट होकर आया है। एडिनो वायरस के सं₹मण के कारण आंख का सफेद भाग लाल हो रहा है और कंजक्टाइवा और आंखों के चारो ओर तेज दर्द व सूजन बढ़ रही है। बीमार तेज रोशनी की तरफ भी नहीं देख पा रहा है।
यह हैं लक्षण
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद महरिया ने बताया कि आई फ्लू से सं₹मित शख्स के सम्पर्क में आने वाले शख्स की पहले एक आंख का लाल होती है। इसके बाद दूसरी आंख भी लाल हो जाती है। इसके अलावा आंखों में सूजन, खुजली आना, सुबह आंखों की पलक चिपक जाती है। कई मरीजों में बुखार के साथ गले में तेज दर्द होता है। सं₹मण शुरू होने के साथ ही धुंधला दिखाई देता है जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाता है।
ये हैं बचाव के उपाय
यह संक्रमक रोग है तथा यह रोग एक-दूसरे के संपर्क में आने से अधिक फैलती है। भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाते हैं, तो आंखों को नहीं छूएं। बाजार-ऑफिस आदि से आते हैं, तो हाथ अवश्य धोएं। बच्चे यदि संक्रमित होते हैं, तो उन्हें स्कूल नहीं भेजे। आंखों पर बार-बार हाथ नहीं लगाएं। बीमार का मोबाइल, गाड़ी की चाबी और अन्य वस्तुओं को नहीं छुएं।
इनका कहना है
आई फ्लू का वायरस म्यूटेट होकर आया है। इसकी संक्रामकता की रफ्तार बहुत तेज है। संक्रमण होने पर आंखों को हल्के गर्म पानी से दिन में एक या दो बार ही धोएं। संक्रमण के लक्षण नजर पर फौरन उपचार लें।
-्डॉ. सुभाष कटेवा, नेत्र रोग विशेषज्ञ
Published on:
02 Aug 2023 07:48 pm
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