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नेता के साथ लोग भी कर रहे इस काम का इंतेजार

लॉटरी के साथ खुलेगा नगर निकाय चुनावों का सियासी तालासियासी दल अभी नहीं कर पा रहे तैयारी, कई वार्डो की सीमा बदलने के साथ समीकरण भी बदले,कई स्थानीय नेताओं की बढ़ेगी चुनौती

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नेता के साथ लोग भी कर रहे इस काम का इंतेजार

नेता के साथ लोग भी कर रहे इस काम का इंतेजार

सीकर. नगर निकायों में जातिगत आधार पर वार्डो की संख्या तय होने के साथ चुनावों की सरगर्मी तो तेज हो गई है। लेकिन अभी जनप्रतिनिधियों की उम्मीदों पर सियासी ताला लगा हुआ है। अब सभी को अध्यक्षों की लॉटरी का इंतजार है। प्रदेश की ज्यादातर नगर निकायों में नवम्बर महीने में चुनाव होने है। सूत्रों का कहना है कि अगस्त के आखिर या सितम्बर के पहले सप्ताह में लॉटरी निकलनी लगभग तय है। वहीं वार्डो की आरक्षण लॉटरी के बाद स्थानीय स्तर पर पूरी तरह समीकरण बदल जाएंगे। इधर, वार्ड परिसीमन सहित अन्य प्रक्रियाओं को लेकर गुुरुवार वीसी हुई। इधर, शहरी सरकार ने वोट बैंक के हिसाब से वार्डो में अधूरे कार्यो को पूरा कराने के लिए प्रयास तेज कर दिए है। इस बार प्रदेश में निकायों में अध्यक्षों के चुनाव सीधे होने है। एेसे में दावेदारों के साथ सियासी दलों की चुनौती बढ़ी है।
टिकट के लिए दावेदारी, लेकिन वार्ड का पता नहीं
परिसीमन के साथ ही नेताओं ने अभी से टिकट के लिए दावेदारी ठोकना तो शुरू कर दिया है लेकिन अभी तक वार्र्डो का पता नहीं है। एेसे में संगठन पदाधिकारियों को भी नगर निकायों की लॉटरी के बाद ही कवायद शुरू करने का मन बना रखा है। हालांकि भाजपा-कांग्रेस व माकपा ने आगामी चुनावों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर कमेटी गठन का काम तेज कर दिया है।
कई को जाना होगा दूसरे वार्डो में
मौजूदा नगर परिषद के कई पार्षदों की सियासी जमीन भी खिसकती हुई नजर आ रही है। आरक्षण की लॉटरी के बाद कई पार्षदों को दूसरे वार्डो में जाकर सियासी जमीन तलाशनी होगी। इसके लिए पार्षदों ने अभी से दूसरे वार्ड में सियासी जमीन टटोलना शुरू कर दिया है। लेकिन अभी इनकी आस पूरी तरह लॉटरी पर टिकी हुई है।